Punjab (पंजाब) गुरुओं, पीरों और फ़कीरों की पाक ज़मीन है। ये एक ऐसा राज्य है, जो अपनी संस्कृति, लज़ीज़ खान-पान और ख़ास पहनावे के लिए पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन Punjab (पंजाब) की एक और ख़ास बात है, जो सदियों से इसकी असली ताक़त रही है, मगर अक्सर इसके बारे में कम बात होती है। वो है हिंदू और सिख समुदाय के बीच आपसी भाईचारा और मेल-जोल। ये रिश्ता आज का नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। आज भी पंजाब में दोनों समुदायों के बीच ये प्यार, अपनापन और भाईचारा उतना ही मज़बूत है।
नरिंदर पाल और कुलविंदर: आपसी भाईचारे की मिसाल
आज के दौर में इस ख़ूबसूरत भाईचारे की मिसाल हैं। पशु आहार का कारोबार करने वाले नरिंदर पाल और उनके करीबी दोस्त और पशुपालक कुलविंदर सिंह। आज भी दोनों अपने दिन की शुरुआत साथ करते हैं। नरिंदर पाल बताते हैं कि वो रोज़ सुबह सबसे पहले गुरुद्वारे जाकर माथा टेकते हैं। इसके बाद चाय-पानी पीकर अपने काम की शुरुआत करते हैं। उनके लिए धर्म कभी भी किसी तरह की दूरी या बंटवारा नहीं बनता। वो रोज़ गुरुद्वारे जाते हैं और मंदिर भी जाते हैं।

बचपन का ख़ुशनुमा माहौल और धर्मों का सम्मान
अपने बचपन को याद करते हुए कुलविंदर सिंह बताते हैं कि हमारे गांवों का माहौल शुरू से ही ऐसा रहा है, जहां बच्चे किसी एक धर्म की सोच के दायरे में नहीं पले-बढ़े। गांवों में मस्जिदें, मंदिर और गुरुद्वारा साहिब सभी मौजूद हैं। बचपन से ही हम पंजाब के खुले और खुशनुमा माहौल में बड़े हुए हैं, जहां हमें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हम किसी दूसरे धर्म से अलग हैं।
जब मंदिर में कोई प्रोग्राम होता है, तो सिख समुदाय बढ़-चढ़कर उसमें हिस्सा लेता है और मदद करता है। वहीं, गुरुद्वारा साहिब के किसी समागम में हिंदू समुदाय भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है। यही आपसी रिश्ते और भाईचारा बताते हैं कि हर धर्म की अपनी जगह है और सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।

कारोबार, खेती और आपसी मदद का रिश्ता
इन दोनों दोस्तों का रिश्ता सिर्फ़ जज़्बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी मदद और एक-दूसरे पर भरोसे से भी जुड़ा हुआ है। नरिंदर पाल पशुओं के चारे की दुकान चलाते हैं, जबकि कुलविंदर सिंह पशुपालन का काम करते हैं। यानी एक का कारोबार सीधे दूसरे की ज़रूरत से जुड़ा हुआ है।
अगर पंजाब की बात करें, तो यहां खेती और कारोबार का रिश्ता धर्म की दीवारों से ऊपर है। किसान को खेती के लिए किसी औज़ार या ट्रैक्टर की ज़रूरत होती है, तो वो बाज़ार में बैठे हिंदू, मुस्लिम या सिख दुकानदार के पास जाता है। यहां ज़रूरत और इंसानियत को धर्म से ऊपर रखा जाता है।
इसी तरह, डेयरी फ़ार्मों का दूध शहरों के सभी लोगों तक पहुंचता है। इस पूरे कारोबारी रिश्ते में जात-पात के बिना गुज़ारा मुमकिन ही नहीं है। नरिंदर पाल के मुताबिक, Punjab (पंजाब) का ज़्यादातर कारोबार खेती पर टिका है। अगर किसान की गेहूं की फ़सल अच्छी होगी, तो बाज़ार में बैठे कारोबारी का काम भी अच्छा चलेगा। यानी किसान और कारोबारी, दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत हैं।

इंसानियत की ख़िदमत और गुरु घर का पैग़ाम
कुलविंदर सिंह बताते हैं कि Punjab (पंजाब) में एक पुरानी सोच रही है कि जब भी देश या समाज पर कोई मुसीबत आती है, तो यहां जाति या धर्म नहीं देखा जाता। एक इंसान होने के नाते, सिख हिंदूओं की मदद करते हैं और हिंदू भी सिखों का साथ देते हैं। Punjab (पंजाब) की धरती पर ऐसा कोई भेदभाव नहीं, जो लोगों को एक-दूसरे से दूर करें। सभी के दिल में यही यक़ीन है कि परमात्मा एक है और सभी इंसान बराबर हैं।
इस बराबरी की सबसे बड़ी मिसाल गुरुद्वारा साहिब के लंगर में देखने को मिलती है। यहां हिंदू, सिख और मुस्लिम एक ही पंगत में बैठकर बिना किसी भेदभाव के लंगर खाते हैं। लंगर की सेवा करने वालों में भी हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं।
श्री गुरुद्वारा साहिब के चार दरवाज़े—पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण इस बात की पाक निशानी हैं कि गुरु घर के दरवाज़े हमेशा हर जाति, हर धर्म और दुनिया के हर कोने से आने वाले इंसान के लिए खुले हैं।

खाटू श्याम मंदिर की मिसाल
Punjab (पंजाब) के पातड़ां शहर में मौजूद खाटू श्याम मंदिर की मिसाल देते हुए नरिंदर पाल बताते हैं कि एकादशी के मेले के दौरान वहां जाकर देखें तो मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं के साथ गांवों के सिख ज़मींदार भी बड़ी तादाद में नज़र आते हैं। इतना ही नहीं, अमृतधारी सिख भी वहां पूरी श्रद्धा और साफ़ दिल से माथा टेकते हैं।
जिस तरह हिंदू भाई गुरुद्वारे जाते हैं, उसी तरह सिख परिवार भी खाटू श्याम मंदिर और हनुमान मंदिर में पूरी आस्था के साथ सिर झुकाते हैं। कुलविंदर सिंह के मुताबिक, Punjab (पंजाब) की धरती पर अलग-अलग धर्मों और जातियों के बीच जो प्यार, अपनापन और इज़्ज़त देखने को मिलती है, वो शायद ही किसी और सूबे में इतनी आसानी से नज़र आए।
यहां नफ़रत की दीवारें कभी कामयाब नहीं हो सकती। हिंदू-सिख भाईचारे और आपसी प्यार का ये रिश्ता कई सदियों से चला आ रहा है, आज भी कायम है और आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह मज़बूत बना रहेगा।
लेख– मनमीत कौर
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