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विश्व संगीत दिवस: मामे ख़ान, माटी बानी और ताबा चाके कैसे बने भारत की वैश्विक संगीत पहचान

संगीत एक ऐसी ज़ुबान है, जिसे समझने के लिए शब्दों की ज़रूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि किसी गांव की लोक धुन भी हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे इंसान के दिल को छू सकती है। शायद इसी ताक़त का जश्न मनाने के लिए हर साल 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। विश्व संगीत दिवस, जिसे मेक म्यूज़िक डे (Make Music Day) और फ़ेत द ला म्यूज़िक (Fête de la Musique) के नाम से भी जाना जाता है, संगीत की उस ताक़त का जश्न है जो लोगों को जोड़ती है। इस दिन दुनिया भर में खुले मंचों, सड़कों, पार्कों और पब्लिक जगहों पर संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस दिन की शुरुआत 1982 में फ्रांस से हुई थी। वहां के संस्कृति मंत्रालय ने एक ऐसी पहल शुरू की, जिसका मक़सद था कि संगीत सिर्फ़ बड़े मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों तक पहुंचे। देखते ही देखते ये पहल दुनिया भर में फैल गई और आज करीब 125 से देशों में मनाई जाती है। संगीत की यही ख़ूबसूरती है कि ये भाषा, धर्म, संस्कृति और भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ता है। भारत में भी कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी मिट्टी की ख़ुशबू को दुनिया तक पहुंचाया है। इनमें मामे ख़ान, माटी बानी और ताबा चाके जैसे नाम ख़ास तौर पर शामिल हैं।

थार के रेगिस्तान से दुनिया तक पहुंचे मामे ख़ान

राजस्थान के मशहूर लोक गायक मामे ख़ान (Mame Khan) को “रेगिस्तान की आवाज़” कहा जाता है। उन्होंने थार की सदियों पुरानी लोक संगीत परंपरा को दुनिया के 60 से ज़्यादा देशों तक पहुंचाया है। मंगणियार समुदाय से आने वाले मामे ख़ान (Mame Khan) ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां पीढ़ियों से संगीत की विरासत आगे बढ़ती रही है।

Image Source: Mame Khan

उनकी गायकी में राजस्थान की लोक परंपरा के साथ सूफ़ी रंग भी दिखाई देता है। मीरा बाई, कबीर, बुल्ले शाह और लाल शाहबाज़ क़लंदर जैसे संत और सूफ़ी कवियों की रचनाओं को उन्होंने अपनी आवाज़ दी है। कोक स्टूडियो का लोकप्रिय गीत “चौधरी” हो या बॉलीवुड की फ़िल्में, मामे ख़ान (Mame Khan) ने हर मंच पर लोक संगीत की ताक़त को साबित किया है। विश्व संगीत दिवस हमें याद दिलाता है कि लोक संगीत सिर्फ़ अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आज की दुनिया की भी आवाज़ है।

माटी बानी (Maati Baani): धरती की ज़ुबान, दुनिया की धुन

अगर मामे ख़ान लोक संगीत की जड़ों की बात करते हैं, तो माटी बानी (Maati Baani) उन जड़ों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़ने का काम करती है। “माटी बानी (Maati Baani)” का मतलब ही है “धरती की ज़ुबान”। निराली कार्तिक और कार्तिक शाह की ये जोड़ी भारतीय लोक और शास्त्रीय संगीत को वैश्विक धुनों के साथ मिलाकर एक नया संगीत रचती है। उन्होंने दुनिया के 30 देशों के 200 से ज़्यादा संगीतकारों के साथ काम किया है।

माटी बानी (Maati Baani) की सबसे ख़ास बात है कि उन्होंने भारत के दूर-दराज़ गांवों में छिपे लोक कलाकारों को दुनिया के सामने लाने का काम किया। उनके गीतों में हिन्दी, गुजराती, सिंधी और राजस्थानी जैसी कई भाषाओं की झलक मिलती है। उनका संगीत इस बात का उदाहरण है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है।

Image Source: Maati Baani

ताबा चाके (Taba Chake): पहाड़ों की सादगी, संगीत की नई आवाज़

अरुणाचल प्रदेश के शांत पहाड़ों, घने जंगलों और ख़ूबसूरत वादियों से निकलकर ताबा चाके (Taba Chake) ने भारतीय इंडी संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई है। बिना किसी ट्रेनिंग के उन्होंने खुद गिटार बजाना सीखा और अपनी मेहनत के दम पर लाखों लोगों के दिलों तक पहुंचे। आज उनकी पहचान सिर्फ़ एक गायक के तौर में नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और संस्कृति की आवाज़ के तौर पर होती है।

ताबा चाके (Taba Chake) एक फिंगर-स्टाइल गिटारिस्ट, मल्टी-इंस्ट्रूमेंटलिस्ट और बहुभाषी गायक-गीतकार हैं। उनकी सुरीली आवाज़ और लोक, इंडी- आधुनिक संगीत के अनोखे मेल ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया है। उनके गीत “आओ चलें”, “शायद” और “वॉक विद मी” श्रोताओं के बीच बेहद पसंद किए जाते हैं। ये सभी गीत उनके चर्चित एल्बम बॉम्बे ड्रीम्स (2019) का हिस्सा हैं।

Image Source: Taba Chake

ताबा चाके (Taba Chake) की सबसे बड़ी ख़ासियत है कि वो अपनी मातृभाषा न्यीशी के साथ-साथ हिन्दी, असमिया और अंग्रेज़ी में भी गीत लिखते और गाते हैं। वो अरुणाचल प्रदेश के पहले ऐसे कलाकार माने जाते हैं, जिन्होंने न्यीशी भाषा के गीतों को वैश्विक म्यूज़िक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचाया। अपने संगीत के ज़रिए उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाया है।

संगीत जो दुनिया को जोड़ता है

विश्व संगीत दिवस सिर्फ़ संगीत सुनने का दिन नहीं है, बल्कि ये उन कलाकारों को सलाम करने का दिन भी है जो अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संगीत के ज़रिए दुनिया तक पहुंचाते हैं। मामे ख़ान (Mame Khan) के रेगिस्तानी सुर, माटी बानी (Maati Baani) का फ्यूज़न संगीत और ताबा चाके (Taba Chake) की पहाड़ी धुनें भले ही अलग-अलग दुनिया से आती हों, लेकिन इन सबमें एक बात समान है ये अपनी मिट्टी से जुड़े हैं और अपनी कला के ज़रिए दुनिया को जोड़ते हैं। शायद यही विश्व संगीत दिवस का असली संदेश भी है कि संगीत सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों, संस्कृतियों और दिलों को जोड़ने वाला सबसे ख़ूबसूरत पुल है।

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