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दरवाज़े कभी बंद नहीं हुए: जब Gurudwara Bangla Sahib ने एक बार फिर इंसानियत की सेवा की मिसाल पेश की

अगर किसी को रहने की जगह, खाना या किसी भी तरह की मदद की ज़रूरत है, तो Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब) के दरवाज़े उसके लिए हमेशा खुले हैं। यहां किसी से उसका मज़हब, जाति, ज़ुबान या पहचान नहीं पूछी जाती।” दिल्ली में हाल ही में बने मुश्किल हालात के दौरान सोशल मीडिया पर साझा किया गया। ये पैग़ाम एक बार फिर दुनिया को सिख धर्म की उस महान रिवायत की याद दिलाता है, जिसकी बुनियाद निस्वार्थ सेवा, लंगर और ‘सरबत दा भला’ यानी सबकी भलाई के उसूल पर टिकी हुई है।

कुछ दिनों तक राजधानी में बने हालात की वजह से कई लोगों को रहने की जगह, खाने और महफ़ूज़ ठिकाने की ज़रूरत पड़ी। ऐसे वक़्त में Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिख गुरुद्वारों के दरवाज़े हर ज़रूरतमंद के लिए हमेशा खुले रहते हैं। Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब) सिर्फ़ इबादत की जगह नहीं, बल्कि इंसानियत की ख़िदमत की एक ज़िंदा मिसाल है। यहां हर दिन हज़ारों लोग लंगर छकते हैं, सराय में ठहरते हैं और ज़रूरत पड़ने पर हर तरह की मदद हासिल करते हैं।

Pic Credit: Jaypee Hotels

यहां आने वाले किसी भी शख़्स से ये नहीं पूछा जाता कि वो किस मज़हब, जाति, ज़ुबान या सूबे से ताल्लुक़ रखता है। सबसे पहले उसका इज़्ज़त के साथ इस्तक़बाल किया जाता है, उसे पानी पिलाया जाता है, लंगर छकाया जाता है और ज़रूरत पड़ने पर रहने का इंतज़ाम भी किया जाता है। यही सिख धर्म की वो रिवायत है, जो सदियों से बिना किसी भेदभाव के इंसानियत की ख़िदमत करती आ रही है।

हाल ही में जब दिल्ली में कुछ लोग अचानक मुश्किल हालात में फंस गए, तब Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब), गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और दूसरे कई गुरुद्वारों ने भी अपने दरवाज़े खोल दिए। सेवादारों ने वहां आने वाले हर शख़्स का अपने परिवार के सदस्य की तरह ख़याल रखा। किसी को पीने का पानी दिया गया, किसी के रहने का इंतज़ाम किया गया और कई लोगों को अपने परिवार से राब्ता करने में भी मदद मिली। सबसे बड़ी बात ये रही कि ये पूरी ख़िदमत बिना किसी प्रचार और बिना किसी भेदभाव के की गई।

Pic Credit: The Print

इस पूरे दौर में Delhi Sikh Gurdwara Management Committee (डीएसजीएमसी) ने भी साफ़ कहा कि गुरुद्वारों में हर ज़रूरतमंद के लिए जगह है और लंगर की सेवा लगातार जारी रहेगी। ये सिर्फ़ एक इंतज़ामी ऐलान नहीं था, बल्कि उस सोच की झलक थी जिसमें इंसान की ज़रूरत को उसकी पहचान से ज़्यादा अहमियत दी जाती है।

सिर्फ़ गुरुद्वारों ने ही नहीं, बल्कि सिख सेवा से जुड़ी कई तंजीमों ने भी इस मौक़े पर अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाई। Hemkunt Foundation के वॉलंटियर्स ने हज़ारों ज़रूरतमंद लोगों तक ताज़ा खाना, पीने का पानी, जूस और दूसरी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाई। उनका मक़सद सिर्फ़ इतना था कि कोई भी शख़्स भूखा न रहे। इसी तरह Sachkhand Foundation ने भी लंगर की सेवा को पूरे जज़्बे के साथ आगे बढ़ाया। वॉलंटियर्स ने खाना बांटने के साथ-साथ फ़र्स्ट एड किट, दवाइयां और दूसरी ज़रूरी मदद भी मुहैया कराई।

सिख रिवायत में सेवा सिर्फ़ खाना खिलाने तक महदूद नहीं होती। हज़ारों लोगों को लंगर छकाने के बाद वॉलंटियर्स ने अपने हाथों से आसपास की सफ़ाई भी की। प्लास्टिक की बोतलें, इस्तेमाल की हुई प्लेटें और दूसरा कूड़ा इकट्ठा करके पूरे इलाके को फिर से साफ़ किया गया। यही सेवा का जज़्बा सिख धर्म को सिर्फ़ एक मज़हब नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ ज़िंदगी जीने का तरीका बनाता है।

Pic Credit: X

Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब) का इतिहास भी इंसानियत की ख़िदमत से गहराई से जुड़ा हुआ है। सिखों के आठवें गुरु, श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने दिल्ली में चेचक और हैज़े की महामारी के दौरान बीमार लोगों की निस्वार्थ सेवा की थी। आज भी गुरुद्वारा परिसर का पवित्र सरोवर और गुरु घर की सेवा लाखों लोगों के लिए उम्मीद और यक़ीन का मरकज़ है। वक़्त बदलता रहा, लेकिन गुरु घर की ये रिवायत कभी नहीं बदली।

कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन लंगर चलाने से लेकर कुदरती आफ़तों और मुश्किल वक़्त में प्रभावित लोगों की मदद करने तक, सिख भाईचारा हर बार सबसे पहले ख़िदमत के लिए आगे आया है। दिल्ली की हालिया घटनाओं ने एक बार फिर ये पैग़ाम दिया कि Gurudwara Bangla Sahib (गुरुद्वारा बंगला साहिब) सिर्फ़ एक मज़हबी जगह नहीं, बल्कि इंसानियत, रहमदिली और निस्वार्थ सेवा की पहचान है।

यहां आने वाले हर शख़्स का इस्तक़बाल उसकी पहचान से नहीं, बल्कि उसकी ज़रूरत को देखकर किया जाता है। शायद यही सिख धर्म का सबसे बड़ा पैग़ाम है “मानव सेवा ही प्रभु की सेवा है।” यानी जो इंसान की ख़िदमत करता है, वही असल मायनों में ईश्वर की सेवा करता है।

स्टोरी– हरविंदर कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: दिल्ली में ‘वीर जी दा डेरा’ करीब 35 सालों से लोगों की कर रहा सेवा

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