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CDS से राष्ट्रपति भवन तक: मेजर नव्या शेख़ावत बनीं प्रेसिडेंट की पहली महिला सेना ADC

राष्ट्रपति भवन की सीढ़ियों पर जब कोई नौजवान अफ़सर राष्ट्रपति के साथ खड़ा होता है, तो ये तस्वीर महज़ एक प्रोटोकॉल की तस्वीर नहीं होती। इसके पीछे छुपी होती है पांच साल की फ़ौजी खिदमत, यूपीएससी का एक सख़्त इम्तिहान, ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग अकादमी की मशक़्क़त भरी ट्रेनिंग, और एक ऐसी तैनाती जो अनुशासन, बारीकी और हाज़िर-दिमाग़ी की बेमिसाल मांग करती है।

मेजर नव्या शेख़ावत ने ADC बनकर इतिहास रचा 

मेजर नव्या शेख़ावत ने इंडियन आर्मी की पहली महिला अफ़सर के तौर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एड-द-कैंप (ADC) बनकर इतिहास रच दिया है। वो राष्ट्रपति की ADC पद संभालने वाली दूसरी महिला हैं। उनसे पहले 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ़्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने ये मुक़ाम हासिल किया था।

एक ख़्वाब की शुरुआत- CDS की राह

मेजर शेखावत की कहानी राष्ट्रपति भवन के दरवाज़े से नहीं, बल्कि देश के सबसे मुश्किल डिफ़ेंस इम्तिहानों में से एक से शुरू होती है। उन्होंने UPSC की संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा I, 2020 में हिस्सा लिया और ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में शॉर्ट सर्विस कमीशन (Women Non-Technical Course) के लिए चुन ली गईं। उनका नाम महिलाओं की मेरिट लिस्ट में शामिल था।

OTA वो जगह है जहां एक उम्मीदवार से फ़ौजी अफ़सर बनने का सफ़र शुरू होता है।  जिस्मानी मशक़्क़त, फ़ौजी हुनर, लीडरशिप और अनुशासन का ऐसा इम्तिहान जो इंसान को निखार देता है।

AI IMAGE Genereted-मेजर शेखावत

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें 2021 में आर्मी सर्विस कोर (ASC) में कमीशन मिला। ASC सेना की रसद, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई जैसे अहम काम देखता है, जो फ़ौजी फ़ॉर्मेशनों को हर वक़्त तैयार रखते हैं। महज़ पांच साल की कमीशनड सर्विस में वो मेजर के रुतबे तक पहुंचीं और मुल्क के सबसे बड़े आइनी ओहदे पर तैनाती हासिल की।

राष्ट्रपति का ADC आख़िर करता क्या है?

ADC का लफ़्ज़ सुनकर लगता है ये महज़ एक रस्मी ओहदा है, लेकिन ज़िम्मेदारी इससे कहीं बड़ी है। राष्ट्रपति के ADC सरकारी और रस्मी तक़रीबात में मदद करते हैं, कोऑर्डिनेशन, फ़ौजी प्रोटोकॉल और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की बेहतरीन अंजाम-देही में अहम किरदार निभाते हैं। राष्ट्रपति के पांच फ़ौजी ADC होते हैं, तीन सेना से, एक नौसेना से और एक वायुसेना से।

यह तैनाती क्यों अहम है?

मेजर शेखावत की तैनाती की अहमियत सिर्फ़ इस बात में नहीं कि वो एक महिला हैं, बल्कि इस बात में भी है कि एक महिला सेना अफ़सर उस मुक़ाम तक पहुंची है जहां अब तक मर्दों का दबदबा था। भारतीय सेना में महिलाओं का सफ़र 1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन से शुरू हुआ था। 2020 में सुप्रीम कोर्ट के हुक्म के बाद महिला SSC अफ़सरों को मर्दों के बराबर परमानेंट कमीशन का हक़ मिला। तब से महिलाओं ने कमांड, ऑपरेशनल और नुमाइंदगी वाले ओहदों पर लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

ADC कैसे बना जा सकता है?

इसके लिए कोई अलग इम्तिहान नहीं होता। पहले भारतीय सशस्त्र बलों में कमीशनड अफ़सर बनना पड़ता है। सेना की राह चुनने वालों के लिए रास्ता है। CDS जैसा ऑफ़िसर-एंट्री इम्तिहान देना, सिलेक्ट प्रोसेस पास करना, OTA जैसी अकादमी से ट्रेनिंग पूरी करना, कमीशन हासिल करना, फिर बेहतरीन प्रोफ़ेशनल रिकॉर्ड बनाकर ख़िदमत की ज़रूरत और चयन प्रक्रिया के हिसाब से नामी तैनातियों के लिए Considered होना।

मेजर नव्या शेख़ावत का सफ़र साबित करता है कि असली बात सिर्फ़ इम्तिहान पास करना नहीं, बल्कि लगातार बेहतरीन अदा और जज़्बे का साबित करना है। उनकी ये तैनाती भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी और मुल्क के लिए उनकी ख़िदमत के एक और सुनहरे बाब का इज़ाफ़ा है।

ये भी पढ़ें- चेट्टीनाड साड़ी: कपास के धागों में पिरोई तमिलनाडु की दास्तान

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