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हुनर को बाज़ार और ज़रूरतमंदों की मदद, Mansimar Kaur के जज़्बे की कहानी

चंडीगढ़ की रहने वाली एक स्टूडेंट Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) के लिए समाजी ख़िदमत कोई अचानक शुरू की गई मुहिम नहीं, बल्कि लगातार जारी कोशिशों का सिलसिला है। गांव की महिला कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने से लेकर पंजाब के बाढ़ से मुतासिर लोगों तक राहत का सामान पहुंचाने तक, Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ समाजी मसलों पर भी लगातार काम किया है।

हाल ही में पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) को बाढ़ राहत, महिलाओं को सशक्त बनाने और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को महफूज़ रखने में उनके योगदान के लिए ख़ास तौर पर सम्मानित किया। चंडीगढ़ के स्ट्रॉबेरी फील्ड्स हाई स्कूल की स्टूडेंट मानसिमर ने दिसंबर 2022 में ‘प्रोजेक्ट कला’ की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद पंजाब की ग्रामीण महिला कारीगरों को सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेनिंग देना और उनके बनाए सामान को बड़े बाज़ारों तक पहुंचाना था।

इस मुहिम के तहत महिलाओं को इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप बिज़नेस जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करना सिखाया गया। इसके साथ ही डिजिटल हिफाज़त और पैसों से जुड़ी जानकारी पर भी ख़ास तवज्जो दी गई। शुरुआत में फतेहगढ़ साहिब ज़िले के बस्सी पठाना इलाके की करीब 25 से 30 ग्रामीण महिला कारीगरों के साथ काम शुरू किया गया।

‘प्रोजेक्ट कला’ का ख़ास मरकज़ पंजाब की रिवायती फुलकारी कढ़ाई रही। Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) का मक़सद सिर्फ़ इस पुरानी कला को महफूज़ रखना नहीं था, बल्कि उन औरतों को भी आगे बढ़ाना था, जो इस हुनर को ज़िंदा रखे हुए हैं। वो चाहती थी कि ये महिलाएं अपने हुनर को आज के बाज़ार से जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकें और आर्थिक तौर पर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। आगे चलकर ‘प्रोजेक्ट कला’ से 50 से ज़्यादा ग्रामीण महिला कारीगर जुड़ीं और उनके सामान की ₹2 लाख से ज़्यादा की सीधी बिक्री भी हुई।

इस बेहतरीन पहल को ‘इक्वलिटी क्लब इनक्यूबेटर प्रोग्राम’ में भी बड़ी पहचान मिली। 150 से ज़्यादा टीमों के बीच हुए मुकाबले में Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) की टीम ने दूसरा मुकाम हासिल किया और ₹1 लाख की ग्रांट जीती। फुलकारी के हुनर को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्ट्रॉबेरी फील्ड्स हाई स्कूल में एक ख़ास नुमाइश भी लगाई गई। इसमें करीब 2,000 लोगों ने शिरकत की।

इस तरह ‘प्रोजेक्ट कला’ ने रिवायती हुनर को सिर्फ़ पंजाब की सांस्कृतिक पहचान तक महदूद नहीं रखा, बल्कि इसे महिलाओं की माली मज़बूती और आर्थिक तौर मज़बूती का ज़रिया भी बनाया। Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) की सरगर्मियां सिर्फ़ समाजी काम तक ही महदूद नहीं हैं। एक स्टूडेंट जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते हुए उन्होंने ‘BehanBox’ के लिए “Glass Ceilings and Sticky Floors” के विषय पर एक रिसर्च पेपर भी लिखा है। इसमें लैंगिक गैर-बराबरी, मेहनत और समाज में महिलाओं की नुमाइंदगी जैसे अहम मुद्दों को सामने रखा गया है।

Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) खुद को ज़मीनी सतह पर काम करने वाली एक सामाजी आयोजक मानती हैं। उनका मकसद ऐसा विकास बढ़ावा देना है, जिसमें सभी के लिए बराबरी हो और समाज में सांस्कृतिक इंसाफ कायम हो। Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) की लीडरशिप का एक और अहम पहलू पंजाब में आई भयानक बाढ़ के दौरान सामने आया। अपनी साथी स्टूडेंट ईवा जैन के साथ मिलकर उन्होंने स्कूल के स्टूडेंट्स, उनके वालिदैन और टीचरों को एकजुट किया और बड़े पैमाने पर बाढ़ राहत मुहिम शुरू की।

इस मुहिम के तहत नकद मदद के साथ बड़ी तादाद में ज़रूरी सामान भी जमा किया गया। इनमें चावल, दालें, पीने का पानी, दवाइयां, टॉयलेटरी किट, सैनिटरी पैड, गद्दे, बेडशीट और कंबल शामिल थे। अलग-अलग आंकड़ों के मुताबिक, इस राहत मुहिम के ज़रिए ₹40 से ₹45 लाख से ज़्यादा की आर्थिक और सामान की मदद जुटाई गई। जमा की गई इस मदद को ‘ग्लोबल सिख्स’, ‘सेवा पंजाब’ और ‘ग्लोबल शेपर्स सोसाइटी’ जैसी गैर-सरकारी तंजीमों की मदद से बाढ़ से मुतासिर इलाकों तक पहुंचाया गया। इस काबिले-तारीफ़ काम के लिए राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भी दोनों स्टूडेंट्स को ख़ास तौर पर सम्मानित किया।

Pic Credit: Social Media

पहली नज़र में फुलकारी के हुनर को महफूज़ रखने और बाढ़ राहत मुहिम को दो अलग-अलग काम माना जा सकता है। एक तरफ़ गांव की औरतों को माली तौर पर मज़बूत बनाने की कोशिश थी, तो दूसरी तरफ़ आफत के वक्त लोगों तक फौरन मदद पहुंचाने की कोशिश। लेकिन दोनों कोशिशों के पीछे एक ही जज़्बा था, समाज की भलाई के लिए लोगों को एकजुट करना और मौजूद ज़रियों का सही इस्तेमाल करना।

डॉ. बलजीत कौर से मिले सम्मान ने Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) की कोशिशों को पूरे पंजाब में पहचान दिलाई है। आज के दौर में जब नौजवानों की बात अक्सर सिर्फ़ विदेश जाने या करियर बनाने तक सीमित रह जाती है, Mansimar Kaur (मानसिमर कौर) की ये पहल एक नई मिसाल पेश करती है। उनका सफ़र साफ़ बताता है कि उम्र चाहे कोई भी हो, अगर इरादा पक्का हो तो स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ भी समाज में बदलाव लाया जा सकता है और एक नई इबारत लिखी जा सकती है।

लेख: हरविंदर कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

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