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khurja pottery: कला और विरासत का अनमोल खज़ाना

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले (Bulandshahr district of Uttar Pradesh) की आग़ोश में बसा खुर्जा शहर (Khurja City), जिसे ‘Ceramic City’ के नाम से जाना जाता है, मिट्टी के हुनर का एक ऐसा गुलिस्तां है जहां सदियों से कला की ख़ुशबू बिखरती आ रही है। खुर्जा पॉटरी (khurja pottery) भारत की उस दिलकश विरासत का नाम है जो सिर्फ़ 600 साल पुरानी नहीं, बल्कि आज भी दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है। यहां की रंग-बिरंगी, चमकदार और पकी हुई मिट्टी की चीज़ें देखकर हर कला-प्रेमी का दिल मुस्कुरा उठता है। यही वजह है कि आज खुर्जा पॉटरी को Geographical Indication यानी GI टैग हासिल है।

Image-Social Media

मोहब्बत से बनी मिट्टी की कहानी

खुर्जा पॉटरी की कहानी करीब 600 साल पुरानी है। माना जाता है कि मुल्तान से कारीगर आकर खुर्जा में बस गए और उन्होंने यहां मिट्टी के हुनर को ज़िंदा किया। आज भी कई कारीगर ख़ुद को ‘मुल्तानी कुम्हार’ कहते हैं, जो इस कला की जड़ों की गवाही देता है। इन नायाब चीज़ों को बनाना एक निहायत बारीक और मेहनत का काम है। ‘सफ़ेद मिट्टी’ यानी गोल्डन क्ले को क्वार्ट्ज़ पत्थर और फेल्सपार के साथ मिलाया जाता है, जो गुजरात और राजस्थान से मंगवाए जाते हैं। फिर इसे हाथ या इलेक्ट्रिक मशीन से घड़ा, फूलदान, टाइल्स और क्रॉकरी की शक्ल दी जाती है। हर पीस को बारीकी से चिकना किया जाता है और गर्म रंगों-हरे, लाल, नीले और भूरे रंग में फूल-पत्तियों के नक़्श उकेरे जाते हैं। किनारों पर काला रंग दिया जाता है। फिर ग्लेज़ करके तेज़ आंच पर पकाया जाता है, जिससे रंग निखरते हैं और मज़बूती आती है।

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मिट्टी में छुपी ज़िंदगी

खुर्जा पॉटरी सिर्फ़ कला नहीं, बल्कि इस इलाक़े की संस्कृति, रोज़गार और पहचान है। हज़ारों परिवार इसे अपनी विरासत मानकर सहेजते हैं। ये बिज़नेस करीब 25,000 कारीगरों को रोज़ी-रोटी देता है और 5,000-7,000 लोग सहायक कामों से जुड़े हैं। 500 से ज़्यादा फैक्ट्रियां यहां की पॉटरी को दुनिया भर में पहुंचा रही हैं। ख़ास बात ये है कि ये मिट्टी के बर्तन खाने के PH संतुलन को ठीक रखते हैं, भाप को बराबर फैलाते हैं, जिससे तेल कम लगता है और पोषक तत्व बने रहते हैं। यानी ये कला स्वाद और सेहत, दोनों का ख़ज़ाना है।

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यादगार तोहफ़े

खुर्जा पॉटरी सदियों की मेहनत और मिली-जुली संस्कृति का सबूत है। रंगों की बहार, बारीक डिज़ाइन और वाजिब दाम इसे सैलानियों और कला-प्रेमियों के लिए ख़ास बनाते हैं। आप फैक्ट्री या सीधे कारीगरों से ख़रीदारी करके उनकी मेहनत और इस इलाक़े की विरासत को सलाम कर सकते हैं। खुर्जा पॉटरी सचमुच एक ऐसा हुनर है जो मिट्टी में जान डाल देता है और हमारे दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ जाता है।

ये भी पढ़ें- Farrukhabad Prints: हज़ार साल पुरानी कला, जो आज भी दुनिया के दिलों पर राज करती है

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