Tuesday, September 1, 2026
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मेघालय की पहचान: जब पहनावा बन जाता है इतिहास,जैनसेम-डाकमंडा खासी और गारो जनजाति की पारंपरिक वेशभूषा

नॉर्थईस्ट के बादलों की गोद में बसा मेघालय, जहां हर बूंद कहानी सुनाती है, हर पहाड़ी रहस्य समेटे है, और हर धागा अपनी माटी...

मुंबई की 152 साल पुरानी करीमी लाइब्रेरी: हिंदू धर्मग्रंथों की फारसी-उर्दू अनुवादों को बचाने की मुहिम

साउथ मुंबई की हलचल भरी सड़क के पार एक सदी पुरानी इमारत में एक खामोश कोशिश जारी है।यह कोशिश है उन नायाब फारसी और...

बाघों का जश्न और पट्टानी मुसलमानों से जुड़ी कहानी, 200 साल पुरानी है Pulikali की दास्तान

ढोल की तेज़ थाप, कमर में बंधी घंटियों की आवाज़, चारों तरफ़ पीले, काले और लाल रंग से सजे...

अजरक: सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर सूफी संगीत, रेगिस्तान की धूप और कारीगर के पसीने की महक

क्या आपने कभी ऐसे कपड़े को देखा है जिसमें नीला आसमान, लाल सूरज, और सफेद तारे एक साथ बसे...

बेग़म अख़्तर का शायर

श्रीनगर में अप्रैल 1969 की एक दोपहर जब बरसात हो रही थी, उसके घर का टेलीफोन बजा। उसके पिता...

Baluchari Saree: रेशम पर बुनी गई बंगाल की मिट्टी, मुग़लिया शान और मल्ल राजाओं की वीरगाथा के इतिहास की ज़ुबान

क्या आपने कभी ऐसा लिबास पहना है जो सिर्फ़ ख़ूबसूरत ही न हो, बल्कि अपनी तहों में सदियों का...

राखी के धागे में बंधा भाई-बहन का प्यार, उर्दू शायरों ने भी सजाए जज़्बात

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्यार और ख़ुलूस का त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी...

पोचम्पल्ली इकत साड़ी: हाथों की करामात,सिर्फ कपड़ा नहीं एक विरासत

जब बात भारतीय पारंपरिक वस्त्रों की हो, तो पोचम्पल्ली की इकत साड़ी (Pochampally Ikat Saree) का नाम सबसे ऊपर...