Monday, May 18, 2026
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Akshay Dubey

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Indo-Persian Culture: कला, भाषा, खानपान और गंगा-जमुनी तहज़ीब की कहानी

Indo-Persian Culture:आजकल ईरान काफ़ी चर्चा में है। भारत और ईरान (फ़ारस) के संबंध सदियों पुराने रहे हैं। भौगोलिक नज़दीकी और प्राचीन व्यापारिक मार्गों ने इन दोनों सभ्यताओं को एक-दूसरे से गहराई से जोड़ा।

ग्वालियर घराना : जहां से ख्याल गायकी की धारा पूरे हिंदुस्तान में फैली

सुबह का समय है। तानपुरे की स्थिर ध्वनि कमरे में गूंज रही है—सा, प, सा। गुरु धीरे-धीरे राग की...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

मोहनजोदड़ो से मुगल दरबार तक: कैसे बदली Zari-Zardozi की कहानी? भोपाल के सुनहरे धागों में बसती नवाबी कला 

झीलों की ठंडी हवा जब पुराने भोपाल के चौक बाज़ार की तंग गलियों से होकर गुजरती है, तो वो...

गया के मूर्तिकार जो लकड़ी में तराश रहे हैं आस्था, बबलू कुमार की मेहनत और पहचान की अनूठी कहानी

बबलू मूर्तियों के निर्माण में मुख्य रूप से गम्हार पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, इस लकड़ी में बेहतर फिनिशिंग आती है और यह लंबे समय तक टिकाऊ रहती है।
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