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12 साल बाद: India में Formula 1 की वापसी! बुलंद इंजन की आवाज़, तेज़ रफ्तार गाड़ियां और हवा में तैरता जोश-ख़रोश

Imagine, बुलंद इंजन की आवाज़, तेज़ रफ्तार गाड़ियां और हवा में तैरता जोश-ख़रोश… ये नज़ारा आख़िरी बार भारत में 2013 में देखा गया था। Formula 1 ने India को अलविदा कह दिया था। लेकिन अब 2026 में, एक उम्मीद की रोशनी दिखी है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया (Sports Minister Dr. Mansukh Mandaviya) ने इशारे दिए हैं कि सरकार F1 की भारत वापसी के प्रयासों को तेज़ कर रही है। आइए जानते हैं, आखिर ये रेस क्यों बंद हुई, क्या है इसका शानदार इतिहास और क्या सचमुच ये दोबारा शुरू हो सकती है?

भारत में Formula 1 का इतिहास: एक सुनहरा सपना जो अधूरा रह गया

भारत और फॉर्मूला 1 (India and Formula 1) का रिश्ता बहुत पुराना नहीं है, लेकिन बेहद दिलचस्प है। इस सफ़र की शुरुआत हुई एक ड्राइवर से।

भारत के पहले F1 ड्राइवर: नारायण कार्तिकेयन

साल 2005 में जब नारायण कार्तिकेयन (Narain Karthikeyan) ने जॉर्डन टीम (Jordan Team) के लिए F1 में कदम रखा, तो पूरा देश गर्व से भर गया। कोयंबटूर के इस बेटे ने वो कर दिखाया जो कोई भारतीय पहले नहीं कर सका था। 2005 के अमेरिकी ग्रैंड प्रिक्स (American Grand Prix) में चौथा स्थान हासिल कर उन्होंने 5 कीमती प्लाइंट हासिल किएष ये उपलब्धि आज भी किसी भारतीय ड्राइवर ने नहीं दोहराई है। उनके बाद करुण चंधोक ने भी 2010-2011 में भारत का नाम रोशन किया। पद्मश्री से सम्मानित कार्तिकेयन सचमुच ‘भारत के सबसे तेज़ रेसर’ कहलाने के हकदार हैं ।

विजय माल्या और फोर्स इंडिया टीम

भारत का F1 सपना सिर्फ ड्राइवरों तक महदूद नहीं था। 2007 में विजय माल्या ने स्पाइकर F1 टीम (Spyker F1 Team) को ख़रीदा और उसका नाम रखा ‘Force India’। ये टीम भारतीय लाइसेंस के साथ दौड़ती थी और अपने दमदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती थी। बाद में सहारा समूह ने भी इसमें हिस्सेदारी ली। ये वो दौर था जब भारत F1 की दुनिया में सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि एक भागीदार था।

बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट: भारत का गौरव

2011 में इतिहास रचा गया जब भारत ने पहली बार अपने यहां F1 Grand Prix की मेज़बानी की। ग्रेटर नोएडा का बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (Buddh International Circuit) अपनी अत्याधुनिक डिजाइन के लिए दुनियाभर में सराहा गया । पहली भारतीय F1 रेस में नारायण कार्तिकेयन ने हिस्सा लिया। ये एक ऐतिहासिक पल था । 2011 से 2013 तक लगातार तीन साल यहां दौड़ हुई, लेकिन फिर अचानक ये सब रुक गया।

आख़िर F1 भारत से क्यों चला गया? (The Real Reasons)

भारत में F1 के बंद होने की असली वजह सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई कारण थे-

  1. सबसे बड़ा मुद्दा था टैक्स को लेकर। International Baccalaureate  पर F1 टीमों और ड्राइवरों को प्राइज मनी पर टैक्स छूट मिलती है।
  2. भारत सरकार ने इसे ‘मनोरंजन कर’ (Entertainment Tax) की कैटेगरी में रखा, जिस पर टीमों को भारी टैक्स देना पड़ता। F1 के मालिक बर्नी एक्लेस्टोन (F1 boss Bernie Ecclestone) ने इसे लेकर सख़्त रुख़ अपनाया।
  3. बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट बनाना और उसे बनाए रखना बेहद महंगा था। हर साल होने वाली दौड़ के लिए भारी भरकम फीस भी देनी पड़ती थी। 

F1 इतना फेमस क्यों है?

फॉर्मूला 1 सिर्फ एक रेस नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, ताकत और इंसानी हौसले का एग्ज़ाम है। ये दुनिया की सबसे महंगी और तेज़ रफ्तार खेलों में से एक है। कारों की डिजाइन, इंजीनियरिंग और ड्राइवरों की फिटनेस, सब कुछ चरम पर होता है। मशहूर ड्राइवरों की बात करें तो माइकल शूमाकर, लुईस हैमिल्टन, आयरटन सेन्ना (Michael Schumacher, Lewis Hamilton, Ayrton Senna) जैसे नाम इस खेल की दुनिया में किंग हैं। भारत के पास भी नारायण कार्तिकेयन और करुण चंधोक जैसे सितारे रहे हैं, और अब ज़ेहान दारुवाला नई पीढ़ी के चमकते सितारे हैं। 

क्या F1 की वापसी के चांस हैं?

अच्छी ख़बर ये है कि हां, अब कंडीशन चेंज हो रही हैं। खेल मंत्री ने जो संकेत दिए हैं, उससे उम्मीदें जागी हैं । 2013 के बाद पहली बार सरकारी स्तर पर F1 को वापस लाने की बात हो रही है।

हालांकि, टैक्स और लॉजिस्टिक्स के मुद्दे अभी भी हैं, लेकिन केंद्र सरकार की मंशा और खेल मंत्रालय की activity से ऐसा लगता है कि बात आगे बढ़ सकती है। इसके अलावा, भारतीय दर्शकों की F1 में बढ़ती रुचि – खासकर Netflix की ‘Drive to Survive’ सीरीज़ के बाद – इस खेल को लेकर उत्साह बढ़ा है ।

क्या क्रिकेट के अलावा भारत में F1 पॉपुलर हो सकता है?

ये सबसे बड़ा और दिलचस्प सवाल है। क्रिकेट के दीवाने इस मुल्क में क्या F1 अपनी जगह बना सकता है?

इसका जवाब है-हां, बिल्कुल.. पर शर्तों के साथ। भारत में युवा पीढ़ी अब ग्लोबल स्पोर्ट्स को फॉलो कर रही है। फुटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस की तरह F1 के भी लाखों फैन हैं। हाल ही में हुए सर्वे बताते हैं कि F1 देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

हां, ये कभी भी क्रिकेट जितना पॉपुलर नहीं होगा, लेकिन अपने एक अलग दर्शक वर्ग को ज़रूर बना सकता है। इसके लिए जरूरी है कि-

  • किफायती आयोजन: टिकटों की कीमतें इतनी हों कि आम आदमी भी इस रोमांच का हिस्सा बन सके।
  • लोकल हीरो: हमें अपने नारायण कार्तिकेयन या ज़ेहान दारुवाला जैसे ड्राइवर चाहिए, जिनके लिए फैन गर्व महसूस करें ।
  • मीडिया कवरेज: जिस तरह क्रिकेट की हर गेंद दिखाई जाती है, उसी तरह F1 को भी बेहतर Publicity चाहिए।

F1 की वापसी सिर्फ एक रेस की वापसी नहीं होगी, बल्कि भारत में मोटरस्पोर्ट्स संस्कृति के Building की शुरुआत हो सकती है। ये हमें दिखाएगा कि हम क्रिकेट के साथ-साथ स्पीड, टेक्नोलॉजी और ग्लैमर के इस खेल को भी गले लगाने के लिए तैयार हैं।

ये भी पढ़ें: Lady Meherbai Tata: बाल विवाह के ख़िलाफ जंग से लेकर साड़ी पहन टेनिस जीतने वाली ‘Brand Ambassador’ ऑफ इंडिया

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