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एवरेस्ट बेस कैंप से थोरोंग ला पास तक: 7 साल के माउंटेनियर तेगबीर ने बनाए विश्व रिकॉर्ड

दुनिया में सिर्फ़ एक पिता ही ऐसा इंसान होता है, जो हमेशा चाहता है कि उसका बच्चा उससे भी ज़्यादा कामयाब बने। फिर चाहे वो कामयाबी दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ तक पहुंचने की ही क्यों न हो। कहा जाता है कि पिता का साथ बच्चे की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सहारा होता है। जब पिता का हाथ बच्चे के सिर पर होता है, तो उसका हौसला कई गुना बढ़ जाता है और कोई भी मुश्किल रास्ता आसान लगने लगता है।

ऐसी ही एक मिसाल पंजाब के रोपड़ शहर के रहने वाले सुखिंदर दीप सिंह और उनके 7 साल के होनहार बेटे तेगबीर सिंह ने पेश की है। इतनी छोटी उम्र में तेगबीर ने पर्वतारोही (माउंटेनियर) बनकर ऐसा कारनामा किया कि उनका नाम एशिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।

तेगबीर का शानदार सफ़र

तेगबीर सिंह का पहाड़ों पर चढ़ने का सफ़र करीब दो साल पहले शुरू हुआ था। सबसे पहले अप्रैल 2024 में, सिर्फ़ 5 साल की उम्र में उन्होंने नेपाल में मौजूद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचकर सबको हैरान कर दिया। इसके बाद उनका ये सफ़र लगातार आगे बढ़ता गया। अगस्त 2024 में उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फ़तह किया। फिर जून 2025 में तेगबीर ने रूस में स्थित यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भी कामयाबी से चढ़ाई की।

Source: Sadda Punjab

अपने इस मिशन को आगे बढ़ाते हुए, अप्रैल 2026 में उन्होंने नेपाल के अन्नपूर्णा सर्किट का करीब 235 किलोमीटर लंबा और बेहद मुश्किल ट्रेक पूरा किया। इस दौरान वो इस ट्रेक के सबसे ऊंचे पड़ाव थोरोंग ला पास तक भी पहुंचे। महज़ 7 साल की उम्र में तेगबीर अब तक चार बड़े अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों को कामयाबी से पूरा कर चुके हैं। इतनी छोटी उम्र में उनकी ये उपलब्धि उन्हें दूसरे बच्चों से बिल्कुल अलग बनाती है।

खेलों से जुड़ा परिवार और अलग सोच

तेगबीर के पिता सुखिंदर दीप सिंह बताते हैं कि उनका परिवार हमेशा से खेलों से जुड़ा रहा है। हालांकि, उन्होंने कभी पर्वतारोही बनने का सपना नहीं देखा था। उन्हें दौड़ने का शौक़ था और आज भी वो रोटरी क्लब के ज़रिए इस शौक़ को जारी रखे हुए हैं। वो कहते हैं कि उनके समय में खेलों को करियर के तौर पर अपनाने का मौक़ा नहीं मिला, लेकिन अब वो चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने शौक़ और हुनर के दम पर आगे बढ़ें।

सुखिंदर दीप सिंह का मानना है कि खेल सिर्फ़ जीतना नहीं सिखाते, बल्कि संघर्ष करना और हार को भी कबूल करना सिखाते हैं। खेल का मैदान इंसान को सही योजना बनाना, कड़ी मेहनत करना और मुश्किल हालात में अपने जज़्बात पर काबू रखना सिखाता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे खिलाड़ी का दिल बड़ा होता है। वो जीत और हार, दोनों को ज़िंदगी का हिस्सा मानकर हमेशा आगे बढ़ता रहता है। यही सोच आज तेगबीर सिंह की सबसे बड़ी ताक़त बन गई है।

Source: Sadda Punjab

कड़ी ट्रेनिंग और कोच का साथ

पहाड़ों की मुश्किल और ख़तरनाक चढ़ाई के लिए कई सालों की कड़ी ट्रेनिंग, मज़बूत शरीर और सही खान-पान की ज़रूरत होती है। तेगबीर के पिता सुखिंदर दीप सिंह बताते हैं कि रोपड़ की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि यहां शिवालिक की पहाड़ियां और नदी-नाले काफ़ी पास हैं। इसी वजह से शहर में ट्रेकिंग का अच्छा माहौल है।

वो कहते हैं कि तेगबीर की कामयाबी का सबसे बड़ा श्रेय उनके कोच को जाता है। कोच ने ही तेगबीर के अंदर छिपे हुनर को पहचाना और उसे सही दिशा दिखाई। उन्होंने तेगबीर को पहाड़ों पर चढ़ाई के लिए कड़ी शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग दी। कोच की देखरेख में हर हफ्ते पहाड़ों पर की जाने वाली ट्रेकिंग ने तेगबीर का स्टैमिना बढ़ाया और उन्हें मुश्किल हालात का सामना करने के लिए तैयार किया।

Source: Sadda Punjab

पिता बनने का हर दिन एक नया अनुभव

सुखिंदर दीप सिंह का कहना है कि बेटे के इस सफ़र के लिए समय निकालने से उनकी निजी ज़िंदगी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा। उनका मानना है कि आज के दौर में अपने बच्चों के साथ वक़्त बिताना कोई समझौता नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का एक मौक़ा है।

तीन बच्चों के पिता सुखिंदर कहते हैं कि पिता बनने का अनुभव आपको हर दिन कुछ नया सिखाता है। आज जब वो खुद एक पिता हैं, तो अपने पिता की मेहनत और संघर्ष को पहले से कहीं ज़्यादा अच्छी तरह समझ पाते हैं। उन्हें एहसास होता है कि उनके पिता ने भी कभी उनकी उंगली पकड़कर उन्हें चलना सिखाया था। वो कहते हैं कि अपनी बेटियों के प्यार और बेटे की कड़ी मेहनत को करीब से देखना उनके लिए हर दिन एक नया तजुर्बा है। यही छोटी-छोटी बातें पिता होने के एहसास को और भी ख़ास बना देती हैं।

Source: Sadda Punjab

पिता के लिए बेटे का प्यार

इस पूरे सफ़र का सबसे भावुक पल तब आया, जब 7 साल के मासूम तेगबीर ने अपने पिता को गले लगाकर कहा, “आई लव यू पापा! आपने मुझे इतना कुछ दिखाया, इतनी जगहों पर लेकर गए। आज जो भी मेरी पहचान बनी है, वो आपकी वजह से है। आपने मुझसे इतनी मेहनत करवाई, इसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।”

तेगबीर के ये मासूम शब्द बताते हैं कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर पहुंचने वाला ये छोटा सा पर्वतारोही आज भी अपने सबसे बड़े हीरो अपने पिता को ही मानता है। उसके लिए असली सुपरहीरो कोई और नहीं, बल्कि उसके पापा हैं, जिन्होंने हर कदम पर उसका साथ दिया और उसके सपनों को उड़ान दी।

स्टोरी– मनमीत कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

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