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वीज़ा रिजेक्ट, फिर वही अमेरिका बना मुरीद: किसान का बेटा जिसने रॉकेट से लिखी कामयाबी

एक तरफ जहां देश के कई बड़े शहरों के होनहार छात्र विदेशी संस्थानों में दाख़िले के लिए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु के एक छोटे-से गांव का किसान का बेटा, जिसने कभी 6 किलोमीटर पैदल स्कूल जाने का सफ़र तय किया, आज नासा से जुड़े प्रोग्राम में दुनिया के 23 चुनिंदा एक्सपर्ट्स में शामिल है।

    ये कहानी है डॉ.आनंद मेगालिंगम (Dr.Anand Megalingam) की, स्पेस जोन इंडिया के फाउंडर और CEO (Founder and CEO of Space Zone India) की।

    जब स्कूल तक पहुंचना भी था चुनौती

    तमिलनाडु के एक सुदूर गांव में पैदा हुए आनंद के पिता ट्रैक्टर चलाते थे। घर में इतना पैसा नहीं था कि साइकिल ख़रीदी जा सके। रोज सुबह 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना उनका डेली रूटीन था। ये कठिनाई ने उनमें वो धैर्य और अनुशासन पैदा किया, जो बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

    ड्रॉपआउट से गोल्ड मेडलिस्ट तक का सफ़र

    शुरुआत में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया। पारिवारिक दबाव था कि नौकरी सुरक्षित रहे। लेकिन मन नहीं लगा। कॉलेज छोड़ा, यही वो मोड़ था जहां ज्यादातर सपने टूट जाते हैं।

    लेकिन आनंद ने हार नहीं मानी। Aeronautical Engineering में दाखिला लिया। रिज़ल्ट? 9.8 CGPA के साथ गोल्ड मेडल। अपने संस्थान के इतिहास में Highest Score।

    Image-Dr. Anand Megalingam (LinkedIn Post)

    जब अमेरिका ने ठुकराया, तो दुनिया ने सराहा

    अमेरिका में एरोस्पेस के मौके तलाशने वाले आनंद का वीजा रिजेक्ट हो गया था। कई टूट जाते। उन्होंने कहा — “सीमाएं इंसानों के लिए हैं, इनोवोशन की कोई सीमा नहीं होती।”

    और फिर वही अमेरिका उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित लीडरशिप कार्यक्रम (The U.S. Department of State’s Prestigious Leadership Programs) के लिए चुन लाया। नासा के वैज्ञानिकों, स्पेस फोर्स कमांडरों, रक्षा विशेषज्ञों के साथ एक महीने तक Advanced Aerospace Technology पर काम किया।

    भारत का अपना रॉकेट: RHUMI मिशन

    आनंद ने Space Zone India की स्थापना की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि RHUMI-H मिशन है। भारत का पहला रियूज़ेबल हाइब्रिड रॉकेट, जो मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च हुआ (India’s first reusable hybrid rocket, launched from a mobile platform)। इसके बाद RHUMI-1 ने इंटरनेशनल लेवल पर भारत का नाम रोशन किया।

    आगे का रास्ता: RHUMI ट्विन मिशन

    अब स्पेस जोन इंडिया चेन्नई से दो रॉकेटों का एक साथ Launch करने की तैयारी कर रहा है। ये भारत के निजी एरोस्पेस इतिहास में पहली बार होगा। Reusable Launch Systems, Satellite Technology, and Defense Aerospace पर भी काम चल रहा है।

    क्या है संदेश?

    एक किसान का बेटा, जो रोज़ 6 किमी पैदल चलता था, आज उन मिशनों को लीड कर रहा है जिन्हें देखकर दुनिया के बड़े संस्थान सीखना चाहते हैं।

    डॉ. आनंद कहते हैं —
    “मैं कभी दरवाजे पर दस्तक देता था। आज मैं दरवाजे खोलता हूं-अपने देश के लिए।”

    ये कहानी सिर्फ एयरोस्पेस की नहीं, बल्कि ये बताती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो न कोई गांव रोक सकता है, न गरीबी, न वीज़ा रिजेक्शन और न ही कोई सीमा।

    ये भी पढ़ें:  ‘दक्षिणी तहज़ीब’ का चेहरा और केरल की सांस्कृतिक ‘पहचान’ हैं कासरगोड की हथकरघा साड़ियां

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