Saturday, June 20, 2026
38.6 C
Delhi

हीरे-जवाहरात को छोड़ जब इंदौर के महाराजा ने ‘Future Metal’ के साथ लिखी Modernity की नई इबारत

महाराजाओं की दुनिया में, जहां हीरे-जवाहरात और शान-ओ -शौकत का बोलबाला था, इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर द्वितीय (Maharaja Yeshwantrao Holkar II of Indore) ने एक अनोखी राह पकड़ी वो थी-The Obsession with Modernity। उनके लिए लग्ज़री सोने-चांदी में नहीं, बल्कि नए आइडियाज़ और टेक्नोलॉजी में बसती थी।

जब महाराजा ने चुना Aluminium

1920-30 के दशक में, जब देश के राजमहल ट्रेडिशनल लग्ज़री से सजे थे, इंदौर के यंग महाराजा (6 सितंबर 1908-5 दिसंबर 1961) यूरोप की नई आर्किटेक्टर और इंजीनियरिंग के दीवाने थे। उनका दिल एक ऐसे मेटल पर आकर ठहरा, जो उस ज़माने में ‘Future Metal’ कहलाती थी वो थी ऐल्युमिनियम। हल्की, मज़बूत और हवाई जहाजों से लेकर ऑटोमोबाइल तक में इस्तेमाल होने वाली ये मेटल उनके लिए प्रगति की निशानी बनी।

Maharaja Yeshwantrao Holkar II of Indore (Image-wikipedia)

मणिक बाग: ख़्वाबों का महल

इसी सोच का नतीजा था Manik Bagh Palace। जिसे ‘Ruby Garden’’ या ‘Garden of Jewels’ भी कहते हैं। 1930 के दशक में German architect Hermann Muthesius ने इस महल को डिज़ाइन किया। ये महल भारत के रियासती ठाठ-बाट से एकदम अलग था। यहां क्रोम, शीशा, स्टील और ऐल्युमिनियम (Chrome, glass, steel, and aluminium) का जलवा था, हल्की सजावट और साफ-सुथरी लाइन्स। ये किसी भारतीय राजा का महल नहीं, बल्कि यूरोप की कोई Modern Work लगता था।

कैसे बना ये अनोखा महल?

महाराजा की मुलाकात मुथेसियस से 1928 में इंग्लैंड में हुई, जब वे Oxford University में पढ़ रहे थे। दोनों को आधुनिक डिज़ाइन का शौक था, और ये दोस्ती एक ऐतिहासिक प्लानिंग में बदली।

इस महल की 40 कमरों में हर चीज़ नई सोच के साथ बनी

दीवारों पर न तो वॉलपेपर था और न रेशम, बारिश के महीनों में नमी की वजह से महाराजा ने सबसे बढ़िया शीशे का धूल (glass dust) दीवारों पर जड़वाया। फर्श संगमरमर का था। फर्नीचर काले आबनूस की लकड़ी से बना था, जो Bauhaus style में था। ऐल्युमिनियम के बिस्तर फ्रांसीसी डिज़ाइनरों लुई सोग्नो और शार्लोट एलिक्स ने बनाए।

Image- architecturaldigest.in

World Lavel आर्टिस्ट्स का संगम

महाराजा ने दुनिया-भर से बेहतरीन कलाकारों को बुलाया- 

  • मैन रे (फेमस फ़ोटोग्राफ़र) ने महाराजा और महारानी की तस्वीरें खींचीं
  • बर्नार्ड बूटे द मोंवेल ने उनके दो बड़े दोहरे चित्र बनाए
  • कॉन्स्टेंटिन ब्रांकुसी (मूर्तिकार) ने ‘ध्यान मंदिर’ डिज़ाइन किया, हालांकि महारानी की असामयिक मृत्यु से ये प्रोजेक्ट अधूरा रह गया
  • ली कॉर्बूसिए ने अपनी मशहूर चेज़लॉन्ग (chaise longue) डिज़ाइन की
  • जैक्स-एमिल रुलमैन ने ‘भारतीय राजकुमार का स्टूडियो’ बनाया, जिसमें भारत का बड़ा नक्शा दीवार पर था।

प्रकृति से प्रेरित डिजाइन

माणिक बाग महल की ख़ासियत ये है कि एक भी पेड़ नहीं काटा गया जब इसे बनाया गया। महल के आंगन में एक विशाल बरगद का पेड़ है, जो वैदिक परंपराओं का प्रतीक है। म्यूसियस ने इस पेड़ के साथ Geometric and symmetrical  मुगल बागानों और वॉटर एलिमेंट को जोड़ा, जिससे ईस्ट और वेस्ट का एक अद्भुत संगम तैयार हुआ।

Image-luxuryfacts.com

सिर्फ महल नहीं, बल्कि एक विज़न

म्यूसियस ने रॉयल्स के लिए झील के किनारे विला, कश्मीर में हाउसबोट, निजी हवाई जहाज और लाउंज कार भी डिजाइन की। ये सब गेसामटकुंस्टवर्क (The holistic form of art) की भावना को दिखाता है, जो Bauhaus movement की स्प्रिट थी।

Image-architecturaldigest.in
Image-architecturaldigest.in

इस महल का एक कमरा सिर्फ़ लड़कियों के लिए नहीं था, बल्कि ये एक राजनीतिक बयान था-’Modernity, Transcending The Colonial Tradition’।

Image-luxuryfacts.com

महाराजा की दो दुनियां

महाराजा यशवंतराव होल्कर द्वितीय (1908-1961) का जीवन विरोधाभासों से भरा था। 17 साल की उम्र में जब उन्हें गद्दी मिली, तो परिस्थितियां बहुत ख़राब थीं। उनके पिता को एक घोटाले के कारण गद्दी छोड़नी पड़ी थी।

उन्होंने 13 साल की उम्र में इंग्लैंड में जाकर पढ़ाई की, जहां उन्हें नस्लीय भेदभाव सहना पड़ा। कुछ सहपाठी उन्हें ‘काला शैतान’ (black devil) कहते थे। ये Dilemma उनकी ज़िंदगी भर रहा।

Image-luxuryfacts.com

कहां है मणिक बाग?

आज मणिक बाग महल भारतीय राजस्व विभाग (CGST, Customs & Central Excise) का ऑफिस है। 1980 में सोथबी (Sotheby’s) की नीलामी में महल का सारा फर्नीचर और कलाकृतियां बिक गईं। फ्रांस के मशहूर फ़ैशन डिज़ाइनर यवेस सेंट लॉरेंट भी उस नीलामी में शामिल थे।

Image- luxuryfacts.com

मणिक बाग की विरासत

मणिक बाग में पहली बार भारत में एयर-कंडीशनिंग, मेटल-फ्रेम वाली खिड़कियां, हाइड्रोलिक दरवाज़े, और मॉडर्न प्लंबिंग लगाई गई थी। आज भी पेरिस के म्यूज़ी डे आर्ट्स डेकोरेटिफ़ (Musée des Arts Décoratifs) में महाराजा होल्कर और उनके मणिक बाग पर प्रदर्शनी लगती है। उनके लैंप और फर्नीचर के टुकड़े आज भी नीलामी में लाखों डॉलर में बिकते हैं।

महाराजा यशवंतराव होल्कर द्वितीय वह शख्स थे, जिन्होंने सोने-चांदी के बजाय ऐल्युमिनियम में विलासिता की परिभाषा खोजी। वो दो दुनियाओं के बीच जीते रहे। एक जहां उनकी जड़ें थीं,और दूसरी जिससे उनका दिल था। मणिक बाग आज भी उस Audacious dreams की गवाही देता है, जब एक भारतीय राजा ने बॉहॉस को रियासती ठाठ से जोड़ा और एक ऐसी विरासत छोड़ी, जो आज भी दुनिया-भर के कला-प्रेमियों को हैरान करती है।

ये भी पढ़ें:   गंडिकोटा-दिगुवापट्टनम की गुफाओं में मिला 10 लाख साल पुराना रहस्य,मद्रास यूनिवर्सिटी के छात्र की चौंकाने वाली खोज 

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Bharole (भड़ोले) की महक: पंजाब की मिट्टी और लोक कला की कहानी

पंजाब की मिट्टी और वहां के लोगों का रिश्ता...

नाज़िम: ग़ालिब के शागिर्द, रामपुर के नवाब और इश्क़ के शायर

नाज़िम उर्दू शायरी की दुनिया का एक ऐसा नाम...

रेलवे स्टेशन नहीं, देश की रूह है New Delhi Railway Station, पढ़िए 1926 से 2026 की अनसुनी दास्तान

ये स्टेशन सिर्फ पटरियों और प्लेटफॉर्मों का संगम नहीं,...

मुंशी नौबत राय नज़र: लखनऊ की तहज़ीब और उर्दू शायरी की पहचान 

उर्दू अदब की तारीख़ में कुछ नाम ऐसे हैं...

Topics

Bharole (भड़ोले) की महक: पंजाब की मिट्टी और लोक कला की कहानी

पंजाब की मिट्टी और वहां के लोगों का रिश्ता...

नाज़िम: ग़ालिब के शागिर्द, रामपुर के नवाब और इश्क़ के शायर

नाज़िम उर्दू शायरी की दुनिया का एक ऐसा नाम...

रेलवे स्टेशन नहीं, देश की रूह है New Delhi Railway Station, पढ़िए 1926 से 2026 की अनसुनी दास्तान

ये स्टेशन सिर्फ पटरियों और प्लेटफॉर्मों का संगम नहीं,...

Related Articles

Popular Categories