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David Sassoon Library: मुंबई की 155 साल पुरानी विरासत की तारीख़, तहज़ीब और हुनर के आइने की कहानी

मुंबई शहर की शान, काला घोड़ा के पास मौजूद डेविड सासून लायब्रेरी और रीडिंग रूम (David Sassoon Library And Reading Room) सिर्फ एक किताबखाना नहीं, बल्कि 155 सालों की तारीख़, तहज़ीब और हुनर का आइना है। ये इमारत उस ज़माने की गवाह है जब मुंबई अपने सुनहरे दौर से गुज़र रहा था। 1847 की बात है, जब मुंबई  की टकसाल (Government Mint) और डॉकयार्ड में काम करने वाले यूरोपीय मुलाज़िमों ने ‘Mechanics’ Institution’ की बुनियाद रखी। उनका मकसद था बालिगों को टेक्नोलॉजी की तालीम देना और लेक्चरों का इंतज़ाम करना। शुरुआत में उन्होंने किराए की जगह से काम शुरू किया, लेकिन जल्द ही उन्हें अपनी खुद की इमारत की ज़रूरत महसूस हुई।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

यहां पर आते हैं डेविड सासून, एक नाम जो चीन-भारत अफीम के कारोबार और परोपकार के लिए जाना जाता है। इस यहूदी (बगदादी) ताजिर (बिज़नेसमैन) ने इस इंस्टीट्यूशन को अपनी जायदाद से मदद दी और बाद में इसका नाम उन्हीं के नाम पर डेविड सासून लायब्रेरी एंड रीडिंग रूम रखा गया।

जब बनी ये शानदार इमारत

ये ऐतिहासिक इमारत 1867 से 1870 के दौरान विक्टोरियन नियोगोथिक (Victorian Neo Gothic) स्टाइल में बनाई गई। इसकी ख़ूबसूरती देखते ही बनती है।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

नुकीली मेहराबें (pointed arches) जैसे किसी चर्च की याद दिलाती हैं। काले दक्कन ट्रैप पत्थर के कलमें (Black Deccan Trap stone pillars) और पीला मालाड पत्थर, वही पत्थर जो एलफिंस्टन कॉलेज, आर्मी एंड नेवी बिल्डिंग और वाटसन होटल (Elphinstone College, Army and Navy Building, and Watson’s Hotel) में लगा है। बर्मा की तेज़ लकड़ी की छतें और ट्रसेज़ (trusses) अपनी जगह मज़बूत और ख़ूबसूरत बनाती है। जानवरों के नक़्क़ाशी वाले कलमें और मिंटन टाइल्स का फ़र्श। ये सब कुछ आज भी अपने असली रंग में हैं। 

इस इमारत को डिज़ाइन किया जे. कैंपबेल और जी. ई. गोसलिंग ने, स्कॉट मैक्लेलैंड एंड कंपनी के लिए, उस ज़माने की 1,25,000 रुपये की लागत में। इसमें डेविड सासून ने 60,000 रुपये दान दिए, बाकी खर्च बॉम्बे प्रेसीडेंसी की सरकार ने उठाया।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

दरवाज़े पर नज़र: डेविड सासून की मूरत

इमारत के मेन गेट (entrance portico) के ऊपर सफ़ेद संगमरमर का एक बस्ट (आधी मूरत) है। ये डेविड सासून का है। ये मूरत थॉमस वूलनर (Thomas Woolner) का वो वर्क मॉडल था जिसके बेस पर उन्होंने 1865 में सासून की पूरी खड़ी मूरत (statue) बनाई। इस मूरत को सर बार्टल फ्रेर (तब के गवर्नर) ने बनवाया था और इसके लिए पैसे यहूदी समुदाय, कारोबारियों और इंग्लैंड के दोस्तों ने दिए थे।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

किताबखाने की किताबें और मेंबर्स

आज इस लाइब्रेरी में 40,000 से ज़्यादा किताबें हैं। अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं में। यहां दुनियाभर की  सारी बड़ी मैगज़ीन भी आती हैं। करीब 2,000 लाइफ मेंबर्स और 400 साधारण मेंबर्स  हैं।

 2023 में हुआ बड़ा Revival

2023 में ये लाइब्रेरी एक और ऐतिहासिक मरहले से गुज़री। JSW फाउंडेशन और ICICI फाउंडेशन ने मिलकर इसकी मरम्मत का बीड़ा उठाया। संगीता जिंदल (JSW फाउंडेशन की अध्यक्ष) ने अभा नारायण लम्बाह (Renowned conservation architect of India) के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट की निगरानी की।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

इस मरम्मत के लिए कई संगठनों ने साथ दिया- 

  • हर्मीस इंडिया (Hermès India)
  • काला घोड़ा एसोसिएशन (Kala Ghoda Association)
  • इज़राइल का मुंबई कॉन्सुलेट (Israel Consulate in Mumbai)
  • एमके टाटा ट्रस्ट्स (MK Tata Trusts)

रिसर्च और बहाली की कहानी

अभा नारायण लम्बाह की टीम ने इस प्रोजेक्ट में पुराने अभिलेखों (archives) और दस्तावेज़ों का गहराई से रीसर्च किया। हर नई चीज़ जैसे chandeliers को 19वीं सदी के असली नमूनों के अनुसार ही तैयार किया गया, ताकि पुरानी स्टाइल के साथ तालमेल बना रहे।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

सबसे बड़ी उपलब्धि थी 1960 के दशक में डाली गई सीमेंट की सपाट छत (RCC slab) को हटाकर, उसकी जगह ढलानदार (sloping) असली छत वापस लाना। ये सपाट छत लीकेज की वजह बनी थी, जिससे किताबें और इमारत दोनों को नुकसान पहुंच रहा था।

आज लाइब्रेरी की हैसियत और अहमियत

आज ये लाइब्रेरी रैम्पर्ट रो पर, जहांगीर आर्ट गैलरी के सामने मौजूद है। 1860 के दशक में जब बुंबई के किले की दीवारें हटाई गईं, तब इस इलाके की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है ये। इसे ग्रेड हेरिटेज स्ट्रक्चर (Graded Heritage Structure) का दर्जा मिला हुआ है, यानी ये देश की उन अनमोल इमारतों में शुमार है जिन्हें हर हाल में बचाया जाना चाहिए।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-wikipedia)

एक मिसाल: यहूदी-भारतीय रिश्ता

डेविड सासून लायब्रेरी (David Sassoon Library And Reading Room) सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहज़ीब और यहूदी-भारतीय रिश्तों का जीता-जागता सबूत है। एक बग़दादी यहूदी कारोबारी ने इस मुल्क के लिए क्या कुछ किया, इसकी मिसाल है ये लाइब्रेरी।

David Sassoon Library And Reading Room (Image-architecturaldigest.in)

आज जब मुंबई जाएं, तो इस पीली इमारत को एक बार ग़ौर से देखें। इसकी मेहराबें, लकड़ी की छतें, सफ़ेद संगमरमर का सासून का बस्ट, ये सब आपको 155 साल पीछे ले जाएंगे, जब  मुंबई में अंग्रेज़ों की हुकूमत थी, किले की दीवारें गिर रही थीं, और एक यहूदी ताजिर ने इस शहर को एक ऐसी नेमत दी जो आज भी रूहानीयत बख़्शती है।

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