Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से जुड़ा एक पब्लिकेशन हाउस है। इस इदारे की बुनियाद मशहूर इस्लामी स्कॉलर Maulana Wahiduddin Khan ने रखी थी। साल 2021 में उनके इंतकाल के बाद भी उनका पैग़ाम, उनकी तहरीरें और उनकी फ़िक्र आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।
आज इस मिशन को उनके बेटे Saniyasnain Khan पूरी संजीदगी और ख़ुलूस के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
बच्चों के लिए आसान और दिलचस्प तालीम
Goodword की ख़ास पहचान बच्चों की किताबें हैं। मक़सद ये है कि दीन और अख़लाक़ की बुनियादी बातें बच्चों तक आसान, दिलचस्प और क्रिएटिव अंदाज़ में पहुंचें। मुल्क के मुख़्तलिफ़ शहरों में बुक फेयर के ज़रिये ये किताबें लोगों तक पहुंचती हैं और Dnn24 से बात करते हुए आसिफ़ ख़ान कहते हैं कि, किताबों को वालिदैन काफ़ी पसंद करते हैं।
इन किताबों में बोर्ड बुक्स, कलरिंग बुक्स और बच्चों के लिए इस्लामी गेम्स भी शामिल हैं। कुरआन की कहानियों को बच्चों की समझ के मुताबिक़ सादा लफ़्ज़ों में पेश किया गया है। हुज़ूर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ज़िंदगी, सहाबा और सहाबियात के वाक़िआत को भी बच्चों के लिए आसान अंदाज़ में तशकील दिया गया है।
नमाज़ जैसे अहम अमल को भी तस्वीरों और आसान हिदायतों के साथ पेश किया गया है, ताकि बच्चा उसे समझे भी और उससे जज़्बाती तौर पर जुड़ भी सके।
मौलाना की फ़िक्र: पॉजिटिव सोच का पैग़ाम
Maulana Wahiduddin Khan ने अपनी ज़िंदगी में दो सौ से ज़्यादा किताबें तहरीर कीं। उन्होंने फ़ेथ, सियासी ताबीर, समाजी मसाइल और ख़ास तौर पर “पॉजिटिव थिंकिंग” पर गहरी बात की। उनका मानना था कि इंसान के अंदर एक मुसबत (पॉज़िटिव) सोच होना बेहद ज़रूरी है। यही सोच इंसान को तख़लीकी (क्रिएटिव) बनाती है और उसे नफ़रत की बजाय अमन और मोहब्बत की राह पर चलने की तालीम देती है।
मुल्क के मशहूर साइंटिस्ट और साबिक़ राष्ट्रपति A. P. J. Abdul Kalam ने भी मौलाना की तालीमात को सराहा और उन्हें अपना रूहानी रहनुमा माना।
नई नस्ल के लिए एक जदीद अंदाज़
Goodword की कोशिश है कि दीन की तालीम सिर्फ़ किताबों के लफ़्ज़ों तक महदूद न रहे, बल्कि बच्चों के दिलों तक पहुंचे। इसलिए किताबों का डिज़ाइन, रंगों का इस्तेमाल और कहानी कहने का अंदाज़- सब कुछ इस तरह तैयार किया जाता है कि बच्चा उसे बोझ नहीं, बल्कि दिलचस्प तजुर्बा समझे।
माता पिता अक्सर कहते हैं कि उनके बच्चे इन किताबों से जल्दी जुड़ जाते हैं। यही असल कामयाबी है जब तालीम आसान भी हो और असरदार भी।
किताब की अहमियत
डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और स्क्रीन का चलन बढ़ गया है, वहीं मोहम्मद आसिफ़ ख़ान का मानना है कि किताबों की अपनी एक अलग शान है। किताब को हाथ में लेना, उसके सफ़्हात पलटना, उसकी खुशबू महसूस करना, यह एहसास डिजिटल दुनिया नहीं दे सकती।
वक़्त के साथ ज़रूर कुछ तब्दीलियां आएंगी, मगर फिज़िकल किताबों का मक़ाम हमेशा बरक़रार रहेगा। क्योंकि किताब सिर्फ़ मालूमात नहीं देती, बल्कि इंसान के साथ एक रूहानी रिश्ता भी क़ायम करती है।
Goodword पब्लिकेशन सिर्फ़ एक कारोबारी इदारा नहीं, बल्कि एक फ़िक्र और मिशन है। ये मिशन है अमन, मुसबत सोच (Positive Thinking) और आसान तालीम का पैग़ाम फैलाना। GoodWord Publication की Quran Stories अब बच्चों के लिए आसान भाषा, रंगीन चित्रों और क्रिएटिव डिज़ाइन के साथ पेश की जा रही हैं।
इन किताबों का मकसद है कि बच्चे कहानी के ज़रिए इस्लाम की सीख को समझें, उससे जुड़ें और सकारात्मक सोच विकसित करें।
मौलाना वहीदुद्दीन ख़ान की विरासत को संभालते हुए Goodword नई नस्ल को तालीम, तहज़ीब और तख़लीक़ का रास्ता दिखा रहा है। और यही उसकी असली पहचान है इल्म के ज़रिए दिलों को रोशन करना।
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