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भारत की ये 4 Railways UNESCO World Heritage Site: जहां सफ़र बन जाता है एक ख़ूबसूरत तजुर्बा

भारत में ट्रेन का सफ़र सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का ज़रिया नहीं है, बल्कि ये एक जज़्बात है। खिड़की से गुज़रते मंज़र, प्लेटफॉर्म की चाय, और हर स्टेशन की अपनी अलग कहानी। इसी कहानी में कुछ ऐसे Railway स्टेशन और रेल लाइन्स भी हैं, जो अपनी तारीख़ी अहमियत, शानदार बनावट और दिलकश नज़ारों की वजह से UNESCO World Heritage Site का हिस्सा बन चुकी हैं।

ये जगहें हमें सिर्फ माज़ी की याद नहीं दिलाती, बल्कि ये दिखाती हैं कि कैसे मुश्किल हालात में भी बेहतरीन इंजीनियरिंग और फनकारी से कुछ ऐसा बनाया गया, जो आज भी ज़िंदा है और लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा है। आइए, जानते हैं इन ख़ास रेलवे धरोहरों के बारे में-

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई

मुंबई का ये रेलवे स्टेशन अपनी शानदार बनावट और तारीख़ी अहमियत के लिए मशहूर है। इसमें विक्टोरियन गोथिक और हिंदुस्तानी स्टाइल का ख़ूबसूरत संगम देखने को मिलता है, इसी वजह से इसे UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिला। इसे F. W. Stevens ने डिज़ाइन किया था और इसका काम 1878 में शुरू होकर करीब 10 साल में मुकम्मल हुआ। इस इमारत का बड़ा गुंबद, नुकीले मेहराब, मीनारें और बारीक नक़्क़ाशी इसे किसी पुराने शाही महल जैसा बनाते हैं। यहां ब्रिटिश इंजीनियरों और हिंदुस्तानी कारीगरों ने मिलकर एक नई पहचान दी, जो आज मुंबई की शान है।

स्टेशन के दरवाज़े पर दो खंभे हैं। एक पर शेर (ब्रिटेन की निशानी) और दूसरे पर बाघ (हिंदुस्तान की निशानी)। साथ ही मोर की सूरतें भी बनी हुई हैं, जो इसकी ख़ूबसूरती को और बढ़ाती हैं। 1997 में इसे “हेरिटेज ग्रेड-I” का दर्जा दिया गया और इसकी देखभाल इंडियन रेलवे करती है।

भारत की माउंटेन रेलवे भारत की पहाड़ी रेल लाइनें भी UNESCO Heritage में शामिल हैं। इनमें तीन ख़ास रेल मार्ग आते हैं—

Darjeeling Himalayan Railway (पश्चिम बंगाल)
Nilgiri Mountain Railway (तमिलनाडु)
Kalka Shimla Railway (हिमाचल प्रदेश)
ये तीनों रेलवे स्टेशन आज भी चल रहे हैं और 19वीं–20वीं सदी की बेहतरीन इंजीनियरिंग की ज़िंदा मिसाल हैं। 1881 से 1908 के बीच बनी इन लाइनों ने मुश्किल पहाड़ी रास्तों को आसान बना दिया और लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाया।

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे

दार्जिलिंग हिमालयन Railway भारत की पहली पहाड़ी रेलवे है, जो 1879 से 1881 के बीच बनी। ये जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक जाती है और रास्ते में दिलकश मंज़र दिखाती है। दार्जिलिंग स्टेशन के आसपास पुराने अंग्रेज़ी दौर के स्कूल और चाय के हरे-भरे बागान इसकी रौनक बढ़ाते हैं। साथ ही Mount Kanchenjunga की मौजूदगी इस जगह को और भी ख़ास बना देती है। Ghum Railway Station भारत का सबसे ऊंचा स्टेशन है। यहां मौजूद म्यूज़ियम में पुरानी तस्वीरें, ट्रेन के मॉडल और ‘Baby Sivok’ नाम का पुराना इंजन भी देखा जा सकता है।

Darjeeling Himalayan Railway, Photo Source: incredibleindia

कालका-शिमला रेलवे

कालका-शिमला Railway एक खूबसूरत पहाड़ी रेल लाइन है, जो शिवालिक पहाड़ियों से होकर गुज़रती है। शिमला स्टेशन पहले 1903 में बना था और बाद में 1921 में इसे दो मंज़िला इमारत में तब्दील किया गया। यहां आज भी पुराने सिग्नल और विंटेज ट्रेन कोच जैसे Himalayan Queen और Shivalik Deluxe देखने को मिलते हैं, जो पुराने दौर की याद दिलाते हैं। अंग्रेज़ों के समय शिमला भारत की गर्मियों की राजधानी थी, और इस Railway ने इसे पूरे देश से जोड़ने में अहम किरदार निभाया।

Kalka–Shimla Railway, Photo Source: Wikipedia

नीलगिरी माउंटेन रेलवे

नीलगिरी माउंटेन रेलवे एक बेहद खूबसूरत छोटी लाइन की रेलवे है, जो 1908 से चल रही है। ये मेट्टूपालयम से ऊटी तक जाती है और रास्ते में कई दिलचस्प स्टेशनों से गुज़रती है। 2005 में इसे UNESCO Heritage का दर्जा मिला। इस सफ़र में Western Ghats और चाय के बागानों के शानदार नज़ारे देखने को मिलते हैं। इस सफ़र का सबसे मज़ेदार हिस्सा है कि ट्रेन 16 सुरंगों, 250 पुलों और 208 घुमावदार मोड़ों से होकर गुज़रती है।

Nilgiri Mountain Railway, Photo: Tamil Nadu Tourism

पूरा सफ़र ऐसा लगता है जैसे आप किसी खूबसूरत तस्वीर का हिस्सा बन गए हों। ये रेलवे स्टेशन और पहाड़ी रेल मार्ग सिर्फ सफ़र का ज़रिया नहीं, बल्कि हमारी तारीख़, तहज़ीब और इंजीनियरिंग की बेहतरीन मिसाल हैं। आज भी ये जगहें लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं और हमें हमारे शानदार माज़ी की याद दिलाती हैं।

ये भी पढ़ें: सांची का स्तूप: मूर्तिकला और नक़्क़ाशी का बेमिसाल संगम

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