“कैमरा उठाया, कीचड़ में लेट गई, और दुनिया को हैरान कर दिया -ये है 11 साल की श्रेयोवी की कहानी”
आपने कई बड़े-बड़े फोटोग्राफर्स के नाम सुने होंगे, लेकिन क्या आपने किसी 9 साल की बच्ची के बारे में सुना है जिसने दुनिया की सबसे मुश्किल वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी कॉम्पिटिशन में दूसरा स्थान हासिल किया हो? श्रेयोवी मेहता ने ये कारनामा कर दिखाया। उन्होंने नौ साल की उम्र में कीचड़ में लेटकर खींची थी शानदार तस्वीर।
वो सुबह जब बदली ज़िंदगी
राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क में एक सुबह श्रेयोवी अपने परिवार के साथ टहल रही थीं। तभी उनकी नज़र पेड़ों के नीचे सुनहरी धूप में बैठी दो मोरनियों (peahens) पर पड़ी। उन्होंने तुरंत अपने पिता का कैमरा उठाया, कीचड़ में लेट गईं, फ़्रेम एडजस्ट किया और शटर दबा दिया। ये तस्वीर थी “In the Spotlight”।
लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम (London’s Natural History Museum) ने इस पल को “Dreamlike Image” कहा। ये तस्वीर 60,000 से ज़्यादा एंट्रीज़ में से चुनी गई, जो 117 देशों से आई थीं। श्रेयोवी ने “10 और उससे कम उम्र” कैटेगरी में दूसरा स्थान पाया। ये उपलब्धि उन कई प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स को भी नहीं मिलती जो ज़िंदगीभर मेहनत करते हैं।
11 साल की उम्र में दो और अवॉर्ड
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले साल (61वीं एडिशन) में श्रेयोवी ने दो और तस्वीरें भेजीं। दोनों को “Highly Commended” का अवॉर्ड मिला।
पहली तस्वीर “Height Advantage” उत्तर प्रदेश के धनौरी वेटलैंड्स में एक सारस क्रेन (sarus crane) इलेक्ट्रिक वॉटर पंप पर अपने पंख फैला रही है। दूसरी तस्वीर “Wetland Spat” एक जैकाना पक्षी दूसरे पक्षी पर झपटता हुआ, बिल्कुल सही वक़्त पर कैद हुआ।

तीन घंटे का सब्र और फिर वो लम्हा
सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली चीज़ है श्रेयोवी का सब्र और तकनीक। तीन घंटे तक सारस क्रेन को ढूंढने के बाद उन्होने बोरियत दूर करने के लिए एक और पक्षी (Purple Swamphen) की तस्वीर ले रही थी। तभी एक जैकाना उस पर झपटा और उन्होंने तुरंत शटर दबा दिया।
और फिर जब वे जाने ही वाली थीं कि उन्हें वह सारस क्रेन मिल गई। वो सीधे पंप के पास आई और पंख फड़फड़ाने लगी। श्रेयोवी ने वो पल भी कैद कर लिया। ये कोई बड़ा फोटोग्राफर बता रहा हो ऐसा लगता है मगर श्रेयोवी सिर्फ 11 साल की बच्ची हैं।
11 साल, दो इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन, हज़ारों शेयर, और एक Bright Future। श्रेयोवी मेहता की यह कहानी अभी शुरू हुई है।
बेटियाँ अगर ठान लें तो कीचड़ में लेटकर भी सितारे छू सकती हैं।
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