Friday, October 16, 2026
21.2 C
Delhi

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए कि आपके सामने हज़ारों साल पुरानी किसी सभ्यता की लिखावट रख दी जाए, लेकिन उसे समझने के लिए न कोई डिक्शनरी हो, न व्याकरण की किताब और न ही कोई ऐसा इंसान जो उस भाषा को जानता हो। ऐसे में उस रहस्य को सुलझाना कितना मुश्किल होगा? दुनिया के कई वैज्ञानिक, पुरातत्वविद और भाषा विशेषज्ञ आज भी इसी चुनौती से जूझ रहे हैं।

इतिहास में कई ऐसी सभ्यताएं रही हैं, जिन्होंने अपनी भाषा और लिपि तो छोड़ी, लेकिन समय के साथ उनकी समझ गायब हो गई। आज हालत ये है कि हमारे पास उन लोगों की लिखी हुई चीज़ें तो हैं, लेकिन हम ये नहीं जानते कि उनमें आख़िर लिखा क्या है।

पुरानी लिपियों को समझने की कोशिश

जर्मनी की Cologne University में काम करने वाली भाषा विशेषज्ञ Svenja Bonmann ऐसी ही Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां) भाषाओं को समझने की कोशिश करती हैं। उनके मुताबिक, ये काम किसी बड़ी पहेली को हल करने जैसा है। उनके लिए ये पुरानी लिपियां किसी टाइम मशीन की तरह हैं। इनके ज़रिए हम उन लोगों और उनकी दुनिया के बारे में जान सकते हैं, जो सदियों पहले इस धरती पर रहते थे।

लेकिन परेशानी ये है कि इन भाषाओं को समझने के लिए हमारे पास बहुत कम सबूत हैं। कई जगह सिर्फ कुछ चिन्ह मिले हैं, कहीं टूटी हुई तख्तियां हैं, तो कहीं मिट्टी के बर्तनों पर बने छोटे-छोटे निशान। इतने कम डेटा से पूरी भाषा समझना बेहद मुश्किल हो जाता है।

अनसुलझी लिपियां: इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

Svenja Bonmann इस समय मेक्सिको की एक पुरानी लिपि Epi-Olmec पर काम कर रही हैं। कुछ चिन्हों से पता चलता है कि वहां के लोग लिखना जानते थे, लेकिन लिखावट बहुत कम मिली है। ऊपर से ये भी साफ नहीं कि उन चिन्हों का असली मतलब क्या था। ऐसा ही हाल Indus Valley Civilization यानी Harappan Civilization की लिपि का भी है। भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में फैली इस सभ्यता से कई मुहरें और मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जिन पर छोटे-छोटे चिन्ह बने हैं।

Rongorongo is a system of glyphs discovered on Chile’s Easter Island. Image: CPA Media/IMAGO

लेकिन आज तक कोई ये तय नहीं कर पाया कि यह पूरी भाषा थी या सिर्फ कुछ ख़ास प्रतीकों का इस्तेमाल। चिली के ईस्टर आइलैंड पर मिली Rongorongo script भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी पहेली बनी हुई है। इसमें इंसानों, पक्षियों और अलग-अलग आकृतियों जैसे निशान बने हैं। ये लिखावट लकड़ी की कुछ पुरानी तख्तियों पर मिली है, जिनमें से कई टूट चुकी हैं।

ग्रीस के क्रीट द्वीप की मिनोअन सभ्यता की भी तीन अलग-अलग लिखने की प्रणालियां थी। इनमें से सिर्फ एक Linear B को ही समझा जा सका है। बाकी दो लिपियां — Linear A और Cretan Hieroglyphic — आज भी रहस्य हैं। इसी सभ्यता से जुड़ी एक ख़ास चीज़ “फाइस्टोस डिस्क” भी मिली थी। ये मिट्टी की बनी एक गोल डिस्क है, जिस पर घुमावदार तरीके से कई चिन्ह बने हुए हैं। ये करीब 1700 ईसा पूर्व की मानी जाती है। देखने में बेहद शानदार इस डिस्क को पढ़ना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि ऐसी दूसरी कोई चीज़ दुनिया में नहीं मिली, जिससे तुलना की जा सके।

Etruscan और Proto-Elamite की उलझन

इटली की प्राचीन Etruscan भाषा का मामला भी कुछ ऐसा ही है। इसके अक्षर ग्रीक भाषा से मिलते-जुलते हैं, इसलिए उन्हें पढ़ा तो जा सकता है, लेकिन परेशानी ये है कि इस भाषा से मिलती-जुलती कोई दूसरी भाषा नहीं मिली। इसी वजह से वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे कि उसमें लिखा क्या है। वहीं Proto-Elamite नाम की लिपि, जो आज के ईरान वाले इलाके में इस्तेमाल होती थी, दुनिया की सबसे पुरानी लिखावटों में गिनी जाती है। लेकिन वहां मिली ज़्यादातर तख्तियां टूटी हुई हैं और उन पर सरकारी हिसाब-किताब जैसी बातें लिखी लगती हैं। सबसे बड़ी मुश्किल है कि ये किसी भी जानी-पहचानी भाषा परिवार से मेल नहीं खाती।

इन सभी लिपियों की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इनके पास “रोसेटा स्टोन” जैसा कोई सबूत नहीं है। रोसेटा स्टोन एक ऐसा पत्थर था, जिस पर एक ही बात तीन अलग-अलग लिपियों में लिखी गई थी। क्योंकि विद्वान प्राचीन ग्रीक भाषा जानते थे, इसलिए उसकी मदद से मिस्र की Hieroglyphic लिपि को समझ लिया गया। लेकिन जिन भाषाओं का रहस्य आज तक नहीं सुलझा, उनके लिए ऐसा कोई “कुंजी” वाला सबूत नहीं मिला।

The Phaistos Disc bears unique signs pressed into soft clay. Image: Dreamstime/IMAGO

इसी वजह से वैज्ञानिकों को अंदाज़े लगाने पड़ते हैं कि कौन-सा चिन्ह किस आवाज़, शब्द या अर्थ को दिखाता होगा। हालांकि Hieroglyphic मानती हैं कि ये काम नामुमकिन नहीं है। उनके मुताबिक, अगर किसी लिपि में किसी राजा, देवता या शहर का नाम मिल जाए, तो उससे भाषा को समझने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन जब टेक्स्ट बहुत छोटे और कम हों, तब पैटर्न पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

आजकल इन रहस्यमयी भाषाओं को समझने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी मदद ली जा रही है। AI अलग-अलग चिन्हों में पैटर्न ढूंढ सकता है, टूटे हुए हिस्सों को जोड़ सकता है और ये भी बता सकता है कि कौन-सा चिन्ह कितनी बार इस्तेमाल हुआ है। लेकिन Svenja Bonmann के मुताबिक AI की भी अपनी सीमाएं हैं। AI को सही तरीके से काम करने के लिए बहुत ज़्यादा डेटा चाहिए होता है, जबकि इन पुरानी भाषाओं में जानकारी बहुत कम है। फिर भी इन रहस्यमयी भाषाओं का आकर्षण आज भी बना हुआ है। शायद इसलिए क्योंकि इतनी मॉडर्न टेक्नोलॉजी होने के बावजूद इतिहास की कुछ आवाज़ें आज भी ख़ामोश हैं।

ये लेख DW की रिपोर्ट पर आधारित है।

ये भी पढ़ें: सांची का स्तूप: मूर्तिकला और नक़्क़ाशी का बेमिसाल संगम

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

Topics

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

मुजतबा हुसैन: हंसी के पीछे छुपी सच्चाई का बेमिसाल क़लमकार

उर्दू अदब में तंज़-ओ-मज़ाह की बात हो और मुजतबा...

Balbir Singh Senior: भारतीय हॉकी को गोल्ड की राह दिखाने वाले

भारतीय हॉकी के इतिहास में जब भी बड़े खिलाड़ियों...

Related Articles

Popular Categories