जब भी Mughal इतिहास का ज़िक्र होता है, तो लोगों के ज़हन में सबसे पहले ताजमहल, लाल किला, शाही खाना, शानदार लिबास और आलीशान महलों की तस्वीर आती हैं। लेकिन Mughal दौर सिर्फ बादशाहों और इमारतों तक सीमित नहीं था। उस ज़माने में कला और पेंटिंग भी अपने उरूज़ पर थी। हालांकि उस दौर में ज़्यादातर मशहूर चित्रकार आदमी हुआ करते थे, लेकिन कुछ ऐसी महिलाएं भी थी जिन्होंने अपने फन से लोगों को हैरान कर दिया।
Mughal और फ़ारसी कला को मिलाकर बनाई गई उनकी पेंटिंग्स आज भी दुनिया के अलग-अलग म्यूज़ियम में मौजूद हैं। साहिफ़ा बानू, रुकैया बानू, नूरी नादिरा बानो, नीनी और ख़ुर्शीद बानो जैसी महिला कलाकार इस बात का सबूत हैं कि Mughal कला में औरतों का भी बड़ा अहम किरदार था।
साहिफ़ा बानू
साहिफ़ा बानू को Mughal दौर की सबसे मशहूर महिला चित्रकारों में गिना जाता है। माना जाता है कि वो बादशाह जहांगीर के दौर में दरबार से जुड़ी हुई थी। उनके बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं मिलती, लेकिन उनकी बनाई कुछ पेंटिंग्स आज भी उनके हुनर की गवाही देती हैं।
पुराने तारीख़ी रिकॉर्ड में उनकी बनाई चार पेंटिंग्स का ज़िक्र मिलता है। उनकी कला की सबसे ख़ास बात थी कि उसमें औरतों की दुनिया को बहुत करीब से दिखाया गया। उस ज़माने में महिलाओं की जिंदगी ज़्यादातर महल के अंदर तक ही सीमित रहती थी। इसलिए बाहरी दुनिया को उनकी जिंदगी के बारे में बहुत कम पता होता था।
साहिफ़ा बानू ने अपनी पेंटिंग्स के ज़रिए इसी छिपी हुई दुनिया की झलक दिखाई। उनकी एक मशहूर पेंटिंग में एक औरत अपना चित्र बना रही है और उसकी सेविका उसके सामने आईना पकड़े खड़ी है। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी, बल्कि उस दौर की महिलाओं की जिंदगी और उनके निजी माहौल को दिखाने वाली झलक थी।
साहिफ़ा बानू की कला में रंगों का बेहद खूबसूरत इस्तेमाल देखने को मिलता है। उनकी पेंटिंग्स में जज़्बात और बारीक काम साफ दिखाई देता है। उस दौर में जब कला की दुनिया में औरतों के लिए जगह बनाना आसान नहीं था, तब उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

रुकैया बानू
रुकैया बानू भी जहांगीर के दौर की एक ख़ास महिला चित्रकार थी। उनकी कला का ज़िक्र आज भी कई कला इतिहासकार करते हैं। Feminism India के एक आर्टिकल में मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कला इतिहासकार मीका नैटिफ ने अपनी किताब मुग़ल ऑक्सीडेंटलिज़्म में उनकी पेंटिंग्स के बारे में लिखा है।
रुकैया बानू की सबसे चर्चित पेंटिंग्स में एक बैठे हुए यूरोपियन नग्न आदमी की तस्वीर है। ये पेंटिंग 17वीं सदी में बनाई गई थी। ख़ास बात थी कि ये एक यूरोपियन कलाकार की कला से प्रेरित थी, लेकिन रुकैया बानू ने उसे पूरी तरह मुग़ल अंदाज़ में ढाल दिया।
इतिहासकारों का मानना है कि उन्होंने सिर्फ नकल नहीं की, बल्कि उस पेंटिंग को नया मतलब और नया एहसास दिया। उनकी एक और पेंटिंग गुलशन एल्बम में मिलती है। इस तस्वीर में उनकी कला की समझ और अलग सोच साफ नजर आती है। उन्होंने मुग़ल और फ़ारसी कला के साथ यूरोपियन स्टाइल को मिलाकर एक नया अंदाज़ तैयार किया।
नूरी नादिरा बानो
नूरी नादिरा बानो मुग़ल दरबार की एक बेहद काबिल महिला चित्रकार थी। माना जाता है कि वो मशहूर मुग़ल चित्रकार आक़ा रिज़ा की शागिर्द थी। उनकी पेंटिंग्स में मुग़ल दरबार की शान, कुदरत की खूबसूरती और फ़ारसी कला का असर साफ दिखाई देता था। उन्होंने शाही खानदान, धार्मिक विषयों और प्राकृतिक मंज़रों पर कई शानदार पेंटिंग्स बनाई।
द हेरिटेज लैब में छपे एक लेख के मुताबिक, उनकी एक ख़ास पेंटिंग संत मैथ्यू पर आधारित थी। इस तस्वीर में यूरोपियन और ईसाई कला का असर भी दिखाई देता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उस पेंटिंग पर नूरी नादिरा बानो के दस्तख़त मौजूद हैं। उसमें उन्होंने खुद को आक़ा रिज़ा की शागिर्द बताया है।
नीनी
नीनी शाहजहां के दौर की एक जानी-मानी महिला कलाकार थीं। उन्हें ख़ास तौर पर मुग़ल कला को यूरोपीय अंदाज़ में पेश करने के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे मशहूर पेंटिंग संत सेसिलिया की शहादत मानी जाती है। असल में ये पेंटिंग एक यूरोपियन कलाकार की बनाई हुई थी, लेकिन नीनी ने उसे अपने तरीके से दोबारा तैयार किया।
नीनी की सबसे बड़ी ख़ासियत थी कि उन्होंने असली पेंटिंग में कई बदलाव किए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने संत के गर्दन के ज़ख्मों को हटा दिया, जिससे तस्वीर में हिंसा कम हो गई और नरमी ज़्यादा दिखाई देने लगी। उन्होंने तस्वीर के नीचे अमीर खुसरो की ग़ज़ल भी लिखी। इस ग़ज़ल में मोहब्बत, दर्द और क़ुर्बानी की बात थी। इस तरह उन्होंने एक धार्मिक पेंटिंग को मोहब्बत और जज़्बात से जोड़ दिया।
इतिहासकार मानते हैं कि नीनी की कला में औरतों की सोच और एहसास साफ दिखाई देते हैं। उनकी पेंटिंग्स में रोशनी, नरमी और सुकून महसूस होता है। हालांकि आज उनकी बहुत कम पेंटिंग्स बची हैं, लेकिन जो भी मौजूद हैं, वो उनके गहरे इल्म और शानदार कला की गवाही देती हैं।

ख़ुर्शीद बानो
ख़ुर्शीद बानो के बारे में इतिहास में बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं मिलती, लेकिन उनकी कला उन्हें ख़ास बनाती है। वो ख़ास तौर पर हाथियों और जानवरों की पेंटिंग्स के लिए मशहूर थी। मुग़ल दौर में हाथियों की लड़ाई शाही तमाशों का हिस्सा हुआ करती थी। खुर्शीद बानो ने अपनी एक मशहूर पेंटिंग में दो हाथियों की लड़ाई को बेहद शानदार तरीके से दिखाया।
आज उनकी पेंटिंग हावर्ड होडकिन के संग्रह का हिस्सा मानी जाती है। उनकी कला में सिर्फ जानवरों की तस्वीरें ही नहीं, बल्कि मुग़ल दौर की शान और उस वक्त के मनोरंजन की झलक भी दिखाई देती है। खुर्शीद बानो की पेंटिंग्स में रंगों और बारीकियों का शानदार इस्तेमाल देखने को मिलता है। उन्होंने साबित किया कि महिला कलाकार भी किसी से कम नहीं थी।
इन महिला चित्रकारों के काम और उनके योगदान को भी उतनी ही अहमियत दी जाए। इन कलाकारों की बनाई हुई पेंटिंग्स आज भी यह याद दिलाती हैं कि मुग़ल कला की दुनिया में औरतों का किरदार भी उतना ही खूबसूरत और अहम था।
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