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रणवीर सिंह की दादी थीं ‘डांसिंग लिली ऑफ़ पंजाब’, प्री-पार्टीशन के दौर की वो सुपरस्टार

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बॉलीवुड के सुपर स्टार रणवीर सिंह अपनी अपनी एनर्जी और शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी ये कला और जुनून उन्हें विरासत में मिला है। उनके इस हुनर के पीछे एक ऐसी शख़्सियत की कहानी छुपी है, जो खुद अपने दौर की बड़ी स्टार रही उनकी दादी चांद बर्क, जिन्हें प्यार से “डांसिंग लिली ऑफ पंजाब” कहा जाता था।

लाहौर की गलियों से शुरू हुआ सफ़र

चांद बर्क की पैदाइश 2 फरवरी 1932 को अविभाजित भारत में हुई, जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है। वो एक क्रिश्चियन परिवार में पैदा हुईं और 12 भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। बचपन से ही उन्हें डांस और अदाकारी का शौक था।

(Source-The Indian Express)

1940 के दशक में उन्होंने लाहौर से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की। उस वक़्त लाहौर फ़िल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था। अपनी खूबसूरती और बेहतरीन डांस की वजह से वह जल्दी ही मशहूर हो गईं और लोगों ने उन्हें “डांसिंग लिली” कहना शुरू कर दिया।

पंजाबी सिनेमा में कामयाबी

महज़ 14 साल की उम्र में चांद बर्क ने फ़िल्म “कहां गए” से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पोस्ती, कौडे शाह, मुटियार, शाह जी, पगड़ी संभाल जट्टा, वनजारा, बिल्लो, परदेसी ढोला और परदेसन जैसी कई फ़िल्मों में काम किया।

उनकी अदाकारी और ख़ास तौर पर उनके डांस ने उन्हें पूरे पंजाब में एक अलग पहचान दी। उन्हें आधिकारिक तौर पर “डांसिंग लिली ऑफ पंजाब” का ख़िताब भी मिला।

(Source-The Indian Express)

बंटवारे का दर्द और नई शुरुआत

1947 के बंटवारे ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। लाखों लोगों की तरह उन्हें भी अपना घर छोड़कर मुंबई आना पड़ा। यहां उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ी। जद्दोजहद के इस दौर में उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनानी शुरू की।

(Source-MSN)

राज कपूर ने बदली किस्मत

उनकी ज़िदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब मशहूर फ़िल्मकार राज कपूर की नज़र उन पर पड़ी। फ़िल्म “बूट पॉलिश” (1954) के लिए राज कपूर एक मज़बूत किरदार निभाने वाली अभिनेत्री ढूंढ रहे थे।

(Source-The Indian Express)

करीब 200 ऑडिशन के बाद उन्होंने चांद बर्क को चुना। फ़िल्म में कमला देवी का उनका किरदार बेहद सराहा गया और वह रातों-रात मशहूर हो गईं। इसके बाद उन्होंने परदेसी, दुश्मन, श्रवण कुमार और अदालत जैसी फ़िल्मों में भी काम किया।

निजी ज़िंदगी और परिवार

चांद बर्क की निजी ज़िंदगी भी उतार-चढ़ाव से भरी रही। उनका पहला निकाह निर्देशक निरंजन से हुआ, जो ज़्यादा वक़्त तक नहीं चला। बाद में उन्होंने बिजनेसमैन सुंदर सिंह भवनानी से शादी की।

उनके दो बच्चे हुए टोनिया और जगजीत सिंह भवनानी। यही जगजीत सिंह आगे चलकर रणवीर सिंह के पिता बने। यानी चांद बर्क, रणवीर सिंह की सगी दादी थीं।

(Source-The Indian Express)

रणवीर सिंह कई बार इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उनकी दादी बेहद स्टाइलिश और कला से मोहब्बत करने वाली औरत थीं। उनका मानना है कि एक्टिंग का जुनून उन्हें अपनी दादी से ही मिला है।

सोनम कपूर से रिश्ता

दिलचस्प बात ये है कि रणवीर सिंह और सोनम कपूर भी रिश्तेदार हैं। चांद बर्क और सोनम कपूर की नानी सगी बहनें थीं। इस तरह दोनों दूर के भाई-बहन लगते हैं। चांद बर्क चाहती थीं कि उनका बेटा फ़िल्म इंडस्ट्री में आए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि उनका यह ख़्वाब उनके पोते रणवीर सिंह ने पूरा कर दिया।

(Source-Vogue India)

28 दिसंबर 2008 को चांद बर्क इस दुनिया को अलविदा कह गईं। अफसोस, वह रणवीर की कामयाबी नहीं देख सकीं। रणवीर ने 2010 में फ़िल्म “बैंड बाजा बारात” से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री की।

एक यादगार दास्तान

चांद बर्क की ज़िंदगी सिर्फ़ एक अदाकारा की कहानी नहीं, बल्कि बंटवारे के दर्द, संघर्ष और कला के लिए जुनून की मिसाल है।

(Source-Social Media)

लाहौर की गलियों से लेकर मुंबई के फ़िल्मी स्टूडियो तक का उनका सफ़र आज भी नए कलाकारों के लिए मिसाल है। रणवीर सिंह की कामयाबी में उनकी दादी की दुआएं और उनकी विरासत की झलक साफ नज़र आती है।

स्टोरी– मनमीत कौर

इस लेख को पंजाबी और अंग्रेज़ी में पढ़ें

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