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स्विट्जरलैंड-बेल्जियम भूल जाएं और आएं Chocolate City कोडईकनाल, जहां चॉकलेट सिर्फ़ स्वाद नहीं एहसास है

दोस्तों, ब्रांडेड चॉकलेट (branded chocolate) की बात ही क्या? वो तो मशीनों की उपज है। बिना दिल की, बिना जान की। मशीनें जहां एक जैसा, बोरिंग सा स्वाद थोप देती हैं, वहीं कोडईकनाल की होममेड चॉकलेट (Homemade Chocolates of Kodaikanal) में हाथों की गर्माहट होती है। ब्रांडेड चॉकलेट को बने हुए 6 महीने हो जाते हैं, पर यहां की चॉकलेट तो कल रात बनी होती है, जैसे मां ने अभी-अभी बनाकर रखी हो। टेस्ट की बात करो तो ब्रांडेड वाली हर बार एक जैसी लगती है, मानो कोई फॉर्मूला हो, लेकिन Kodaikanal में हर बार नया सरप्राइज़ मिलता है। कभी ज्यादा मेवा, कभी हल्की मिठास, कभी कोई अनोखा ट्विस्ट। और सबसे बड़ी बात-ब्रांडेड चॉकलेट पर लिखा होता है ‘Flavor Natural’, लेकिन असलियत में वो सिर्फ केमिकल का खेल होता है। जबकि कोडईकनाल (Chocolate City Kodaikanal) में तुम्हें असली फ्रूट के टुकड़े चबाने को मिलेंगे, असली मेवा, असली कॉफी, असली पुदीना और माहौल? ब्रांडेड चॉकलेट दुकानों में ठंडे डिब्बों में बंद पड़ी रहती है, लेकिन यहां तो सड़क किनारे बनती हुई चॉकलेट दिख जाएगी। जैसे कोई जादू तुम्हारी आंखों के सामने घुल रहा हो। भई, ये चॉकलेट खानी नहीं, महसूस करनी होती है। और यही फर्क है, एक है ब्रांड, दूसरी है अपनापन।

हां, ठीक सुना। लोग जाते हैं कोडईकनाल घूमने, लेकिन लौटते हैं चॉकलेट ख़रीदने का बहाना बनाकर। ये वो पहाड़ी है जहां बादल सिर्फ बारिश नहीं लाते, बल्कि कोको की महक भी बिखेरते हैं।

धमाकेदार सच: कोडईकनाल को ‘Princess of Hill Station’ तो सब कहते हैं, लेकिन असली फैंस इसे ‘चॉकलेट की गंगोत्री’ कहते हैं। क्योंकि जहां से चॉकलेट की नदी बहती है, वो यहीं है।

Chocolate City Kodaikanal

200 साल पुराना राज़ जो तुम्हें कोई नहीं बताएगा

जब तुम समझते हो कि चॉकलेट तो स्विट्जरलैंड और बेल्जियम की चीज़ है, तो रुको। 19वीं सदी में जब भारत में ज्यादातर लोग चीनी और गुड़ खाते थे, तब अमेरिकी मिशनरी कोडईकनाल में कोको के बीज लेकर आए।

लेकिन सबसे मजेदार बात ये है –
ये लोग चॉकलेट बनाना नहीं जानते थे  

हां, सच में। वो कोको से दवाई और मॉइश्चराइज़र बनाते थे। फिर एक दिन किसी लोकल बेकर ने सोचा – “क्यों न इस मटमैले बीज को मीठा कर दूं?”

और बस… इतिहास बन गया।

चॉकलेट का ‘गुप्त मसाला’

यहां की चॉकलेट में दालचीनी, इलायची, तुलसी और कभी-कभी गुलाब जल भी मिलता है। यहां रेसिपी नहीं, दिल से बनती है चॉकलेट।

बारिश में भी नहीं पिघलती

कोडईकनाल का मौसम इतना परफेक्ट है कि चॉकलेट बिना फ्रिज के 2 हफ्ते तक ख़राब नहीं होती। यही वजह है कि यहां के लोग चॉकलेट को डिब्बे में बंद नहीं, खुले में रखकर बेचते हैं।

अब जान लो-कोडईकनाल की चॉकलेट ब्रांडेड चॉकलेट से कैसे सौ गुना बेहतर है?

वो चॉकलेट जिनके नाम सुनकर दंग रह जाओगे

  • चिली चॉकलेट: पहले मीठी, फिर आग लगा दे  
  • ब्लैक पेप्पर चॉकलेट: काली मिर्च और चॉकलेट? हां, कमाल है।
  • करुप्पट्टी चॉकलेट: सिर्फ कोडईकनाल में मिलने वाला स्पेशल नट
  • गुलाब चॉकलेट: जैसे फूल को खा रहे हों  
  • कॉफी बीन चॉकलेट: जिसे चबाओ तो कॉफी फटे

इनमें से 4 नाम पहले कभी नहीं सुने होंगे। क्योंकि ये सिर्फ स्थानीय लोगों को ही पता होता है।

सबसे अनोखी बात-चॉकलेट का ‘ब्लैक मार्केट’

हां, तुमने सही पढ़ा। कोडईकनाल में चॉकलेट की ब्लैक मार्केट है। क्या?
दरअसल, कुछ दुकानदार वो चॉकलेट जो ब्रांडेड नहीं है, लेकिन बहुत मशहूर है,उसे बंद दरवाजे के पीछे बेचते हैं। क्योंकि इतनी डिमांड है कि हाथों-हाथ खत्म हो जाती है।

चॉकलेट तो बस बहाना है, असली मज़ा तो उस पहाड़ी की मिट्टी में है जहाँ मीठा सिर्फ खाने में नहीं, एहसास में होता है।

ये भी पढ़ें: खर्चा-ए-पानदान: लखनऊ की नवाबी तहज़ीब में बेगमात की निजी सल्तनत

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