Monday, October 5, 2026
32.2 C
Delhi

पटियाले की गायकी के किस्से

बड़े गुलाम अली ख़ान साहब को गाता हुआ सुनिए। उनकी तमाम कम्पोजीशन्स में बेहद मज़बूत तानों की मदद से बांधी गयी स्निग्ध-मुलायम बंदिशें सुनने को मिलती हैं। किसी पहलवान की सी डीलडौल और चौधरी मूंछों वाले खान साहब जब “का करूं सजनी आये न बालम”, “याद पिया की आये” या “बाजूबंद खुल खुल जाये” गाते हैं तो लगता है कोई शेर प्रणय निवेदन कर रहा हो। एक ख़ास तरह से स्त्रैण (Feminine) लेकिन जिंदादिल मर्दानापन उनकी आव़ाज की खूबी है। यही खूबी उनके समूचे पटियाला घराने पर लागू होती है।

हिन्दुस्तानी ख़याल गायकी के इस घराने से ताल्लुक रखने वाले बड़े गवैये अपनी तानों के लिए जाने गए। दिल्ली, ग्वालियर और जयपुर-अतरौली घरानों की संगीत परम्पराओं की जड़ों से उभरे और उन्नीसवीं शताब्दी के आख़िरी सालों में अस्तित्व में आये इस घराने की शुरुआत का श्रेय उस्ताद अली बख्श (1850 – 1920) और उनके दोस्त उस्ताद फ़तेह अली खान को जाता है। कुछेक इतिहासकार उस्ताद आशिक अली खान को पटियाला घराने का जनक मानते हैं तो कुछ उस्ताद तानरस ख़ान को और कुछ उस्ताद जस्से खान को। बहुमत अलबत्ता अली बख्श और फ़तेह अली खान की जोड़ी के पक्ष में है।

अंग्रेजों के शासन के दौरान मुग़लों का पतन हुआ और बहुत सारे संगीतकार संरक्षण की तलाश में दिल्ली दरबार को छोड़कर पंजाब की तमाम रियासतों की तरफ चले गए। पटियाले के अलावा नाभा, शाम-चौरासी, तालवंडी, कपूरथला और लाहौर जैसी जगहों पर इन्हें पनाह मिली।

तेज़ रफ्तारी और फिरत की तानों में कम्पोज की गयी बेहद खूबसूरत बंदिशें पटियाला घराने की गायकी की सबसे बड़ी खूबी हैं। इस गायकी में सुर-ताल और बोल-बनाव के विकट संयोजन की मदद से चमत्कार पैदा करने का रिवाज है। आज क्लासिकल संगीत के तमाम बड़े नाम किसी न किसी तौर पर पटियाला घराने से जुड़े मिलते हैं।

अली बख़्श और फ़तेह अली खान की जोड़ी को दुनिया में आलिया-फत्तू के नाम से ख्याति मिली। पटियाला गायकी के ये दो आदिपुरुष जरनैल-करनैल भी कहे गए. फ़ौज के जनरल-कर्नल जिस तरह अपनी बहादुरी से सेना का नेतृत्व करते हैं उसी तरह इन दोनों के काम को देखा गया।

इन दोनों के जलवे को पीढ़ियों तक कायम रखने की नीयत से उनकी तानों की तारीफ़ में बेहद आकर्षक बंदिशें भी रची गयी हैं। ग्वालियर घराने के गायक रामकृष्ण बुवा ने राग हमीर में एक बंदिश गई है:

“गुनी जन में जब गावे

आलिया-फत्तू, कहत गुन पावे”

इस जरनैल-करनैल की जोड़ी में से उस्ताद फ़तेह अली खान को तो तानों का खलीफा यानी तान कप्तान कहा जाता था. राग अड़ाना में एक जबरदस्त कम्पोजीशन है:

“तान कप्तान कहायो जग में फ़तेह अली खान

तान कप्तान जब गावे तब गुनी रिझावे गुनी भये मेहरबान

तान कप्तान की ऐसी फिरत है जैसे अर्जुन जी के बान”

बीस-पच्चीस साल पहले म्यूजिक टुडे ने एक अल्बम निकाला था – ग्रेट वॉइसेज़ ऑफ़ इंडिया. उसमें राजन-साजन मिश्र बंधुओं ने इस दूसरी वाली बंदिश को शानदार गाया है. उसे सुनते हुए तान-कप्तान की याद आ जाना स्वाभाविक है।

ज्यादातर लोगों को मेरी ही तरह क्लासिकल म्यूजिक की एबीसीडी भी नहीं आती होगी। क्या हुआ जो तानसेन न बन सके। कानसेन तो बन ही सकते हैं।

ये भी पढ़ें: खर्चा-ए-पानदान: लखनऊ की नवाबी तहज़ीब में बेगमात की निजी सल्तनत

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

Ashok Pande
Ashok Pandehttp://kabaadkhaana.blogspot.com
अशोक पांडे चर्चित कवि, चित्रकार और अनुवादक हैं। उनका प्रकाशित उपन्यास ‘लपूझन्ना’ काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा है। पहला कविता संग्रह ‘देखता हूं सपने’ 1992 में प्रकाशित। जितनी मिट्टी उतना सोना, तारीख़ में औरत, बब्बन कार्बोनेट अन्य बहुचर्चित किताबें। कबाड़खाना नाम से ब्लॉग kabaadkhaana.blogspot.com। अभी हल्द्वानी, उत्तराखंड में निवास।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

क़ाबिल अजमेरी: वो शायर जिसे बीमारी ने छीना, मगर अशआर ने ज़िन्दा रखा 

 वक़्त करता है परवरिश बरसों हादिसा एक दम नहीं...

Farrukhabad Prints: हज़ार साल पुरानी कला, जो आज भी दुनिया के दिलों पर राज करती है

जब बात हिंदुस्तान की हस्तनिर्मित विरासत की होती है,...

मनीष शुक्ला: उर्दू के बहाने सलीक़ा सीखने वाला शायर

कुछ लोग ज़बान को सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं, और...

बनारस की गुलाबी मीनाकारी: चांदी पर उकेरा जाता है ज़िंदगी का रंग

काशी की गलियों में एक ऐसी कला सदियों से...

Topics

क़ाबिल अजमेरी: वो शायर जिसे बीमारी ने छीना, मगर अशआर ने ज़िन्दा रखा 

 वक़्त करता है परवरिश बरसों हादिसा एक दम नहीं...

Farrukhabad Prints: हज़ार साल पुरानी कला, जो आज भी दुनिया के दिलों पर राज करती है

जब बात हिंदुस्तान की हस्तनिर्मित विरासत की होती है,...

मनीष शुक्ला: उर्दू के बहाने सलीक़ा सीखने वाला शायर

कुछ लोग ज़बान को सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं, और...

Baba Hanuman Singh की शहादत और सोहाना साहिब का इतिहास

सिख इतिहास कुर्बानियों, बहादुरी और शहादत की अनगिनत मिसालों...

Related Articles

Popular Categories