जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार करते हुए आसमान में उड़ान भरता है, तो उसके कॉकपिट में बैठे पायलट का हौसला देश की हिफ़ाज़त की पहली ढाल बनता है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) इसी हौसले, तकनीकी जानकारी और लगातार मेहनत की मिसाल हैं। आसमान में 5,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान भरने का तजुर्बा रखने वाले इस जांबाज़ ने दुनिया भर में भारतीय वायुसेना की ताक़त का एहसास कराया है।
उन्होंने भारत में बने लड़ाकू विमान ‘तेजस’ (LCA Tejas) को तैयार करने और उसे वायुसेना में शामिल करने में भी अहम भूमिका निभाई है। आज वो भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख के तौर पर देश और तिरंगे की हिफ़ाज़त में अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं।
फ़ौजी ज़िंदगी की शुरुआत
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) की पैदाइश 27 अक्टूबर 1964 को हुई थी। बचपन से ही उन्हें हवाई जहाज़ों और फ़ौज के अनुशासन में दिलचस्पी थी। शुरुआती तालीम पूरी करने के बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में दाख़िला लिया। यहां उन्होंने कड़ी शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग हासिल की। 21 दिसंबर 1984 को वो भारतीय वायुसेना की फ़ाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए। उन्होंने वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज़ स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी आला फ़ौजी तालीम हासिल की। अपने चार दशक लंबे फ़ौजी सफ़र में उन्होंने हर ज़िम्मेदारी को हौसले, मेहनत और अपनी काबिलियत के साथ निभाया।

शानदार उड़ान का लंबा तजुर्बा
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) को भारतीय वायुसेना के सबसे काबिल और अनुभवी पायलटों में गिना जाता है। वो सिर्फ़ एक फ़ाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि क्वालिफ़ाइड फ़्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उन्हें अलग-अलग तरह के लड़ाकू विमानों, ट्रेनिंग विमानों और ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ाने का 5,000 घंटे से ज़्यादा का तजुर्बा है।
मिग-21 से लेकर मिग-29 और सुखोई जैसे मॉडर्न लड़ाकू विमानों तक, उन्होंने कई तरह के विमानों को उड़ाया है। मुश्किल हालात और हर तरह के मौसम में उन्होंने कई पेचीदा मिशन कामयाबी के साथ पूरे किए हैं। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) की इसी काबिलियत और तजुर्बे ने भारतीय वायुसेना को हर चुनौती का सामना करने के लिए और भी मज़बूत बनाया है।

तेजस प्रोजेक्ट में अहम किरदार
भारत में बने लड़ाकू विमानों की कहानी में एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) का अहम योगदान रहा है। भारत की अपनी तकनीक से तैयार किए गए हल्के लड़ाकू विमान ‘एलसीए तेजस’ को बनाने और उसकी टेस्टिंग में उनकी बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने नेशनल फ़्लाइट टेस्ट सेंटर (NFTC) में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ़्लाइट टेस्ट) के तौर पर काम किया और तेजस की उड़ान से जुड़ी टेस्टिंग की अगुवाई की।
टेस्ट पायलट के तौर पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) इस नए विमान में मौजूद तकनीकी ख़ामियों को दूर करने और उसे लड़ाई के लिए तैयार बनाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने विदेश में भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। रूस के मॉस्को में मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट की टीम की अगुवाई करते हुए उन्होंने भारतीय लड़ाकू विमानों की ताक़त और उनकी जंगी काबिलियत बढ़ाने में अहम किरदार निभाया।

अहम कमान और बड़े ओहदे
अपने लंबे फ़ौजी सफ़र में एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) ने ज़मीनी स्तर से लेकर वायुसेना के हेडक्वार्टर तक कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाई हैं। वो मिग-27 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफ़िसर रहे। इसके बाद उन्होंने देश की पश्चिमी सरहद पर मौजूद एक अहम एयरबेस के एयर ऑफ़िसर कमांडिंग (AOC) की ज़िम्मेदारी भी संभाली। आगे चलकर वो ईस्टर्न एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफ़िसर (SASO) और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफ़िसर कमांडिंग-इन-चीफ़ (AOC-in-C) बने।
फरवरी 2023 में उन्होंने वाइस चीफ़ ऑफ़ एयर स्टाफ का ओहदा संभाला। इस दौरान उन्होंने वायुसेना को आधुनिक बनाने, नए हथियारों और विमानों की ख़रीद से जुड़े कामों और हर वक़्त जंग के लिए तैयार रहने की ज़िम्मेदारी निभाई। इसके बाद 30 सितंबर 2024 को उन्होंने भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख यानी चीफ़ ऑफ़ एयर स्टाफ के तौर पर कमान संभाली। आज वो देश की हवाई हिफ़ाज़त की अहम ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं।

जंगी अभ्यास और रणनीति में महारत
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) ने भारतीय वायुसेना को अलग-अलग तरह की जंग की रणनीतियों में माहिर बनाने के लिए कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों की अगुवाई की है। उनकी रणनीतिक सोच की झलक हाल ही में हुए बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में भी देखने को मिली। इस अभ्यास में दुनिया के कई बड़े देशों की वायुसेनाओं ने भारत में एक साथ जंगी अभ्यास किया।
एपी सिंह आधुनिक डिजिटल वॉरफेयर सिस्टम, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और एयर डिफेंस नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल पर ख़ास ज़ोर देते हैं। उनका मक़सद ये है कि अगर देश को एक साथ दो सरहदों पर चुनौती का सामना करना पड़े, तो भी भारत की हवाई हिफ़ाज़त मज़बूत रहे और दुश्मन के लिए हवाई सरहद में दाख़िल होना आसान न हो।

देश को अपने हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की सोच
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) की सबसे बड़ी कोशिश है कि भारतीय वायुसेना को विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने की ज़रूरत कम से कम पड़े। वो ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम के बड़े समर्थक हैं। उनका मानना है कि आने वाले वक़्त में वही देश जंग जीत पाएगा, जिसके पास अपने हथियार और अपनी तकनीक होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने वायुसेना में नए प्रयोगों और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए प्राइवेट कंपनियों, स्टार्टअप और DRDO के साथ मिलकर काम करने पर ज़ोर दिया है।
उनके वायुसेना प्रमुख बनने के बाद नई पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों यानी AMCA और मिसाइल सिस्टम को बनाने की कोशिशों को भी रफ़्तार मिली है। उनका मक़सद है कि भारत अपनी ज़रूरत के आधुनिक हथियार ख़ुद बनाए और देश की हवाई हिफ़ाज़त के लिए दूसरे देशों पर उसकी निर्भरता कम हो।

राष्ट्रीय सम्मान और अवॉर्ड
देश के लिए उनकी शानदार ख़िदमात और बेमिसाल काम के लिए एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) को कई बड़े राष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ा गया है। उनकी फ़ौजी ख़िदमात के लिए साल 2023 में उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ (PVSM) और साल 2019 में ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) से सम्मानित किया गया। ये दोनों सम्मान भारत के राष्ट्रपति की तरफ़ से दिए गए। ये सम्मान एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) की काबिलियत, क़ियादत और भारतीय वायुसेना के लिए उनकी मज़बूत लगन और बेपनाह मेहनत की गवाही देते हैं।

रिटायरमेंट और भविष्य के लिए प्रेरणा
देश की हवाई हिफ़ाज़त को मज़बूत बनाने में अहम किरदार निभाने वाले एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Air Chief Marshal AP Singh) 31 अक्टूबर 2026 को 62 साल की उम्र पूरी होने पर रिटायर हो रहे हैं। भारतीय वायुसेना में उनके चार दशक लंबे सफ़र को हमेशा याद रखा जाएगा। अपने अनुशासन, तकनीकी समझ और लगातार मेहनत से उन्होंने नौजवान पायलटों और आने वाले अफ़सरों के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। आसमान की बुलंदियों तक पहुंचने वाला उनका ये सफ़र आने वाली नस्लों को हमेशा देश की ख़िदमत, बहादुरी और हौसले का पैग़ाम देता रहेगा।
लेख: मनमीत कौर
इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ें
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