Thursday, September 10, 2026
36 C
Delhi

गुट्टापुसालु: नाम में छुपा है राज़ जो दक्षिण भारतीय दुल्हनों का है  अनमोल ख़ज़ाना

दक्षिण भारत की शादियों में एक ऐसा ज़ेवर है जो सदियों से दुल्हनों की ख़ूबसूरती का ताज है वो है गुट्टापुसालु (Guttapusalu)। ये सिर्फ़ एक हार नहीं, बल्कि मोतियों की एक ऐसी कहानी है जो हर क़दम पर झूमती है, हर लम्हे में चमकती है। अगर आपने कभी किसी दक्षिण भारतीय दुल्हन (South Indian brides) को देखा है जिसके गले में सैकड़ों छोटे मोती हरकत करते हुए चमकते हैं, तो आपने गुट्टापुसालु देखा है।

 Image Guttapusalu-pinterest.com

नाम में ही छुपा है राज़

तेलुगु में गुट्टा का मतलब है झुंड (जैसे छोटी मछलियों का झुंड), और पुसालु का मतलब है मोती। यानी गुट्टापुसालु हार वो सोने का हार है जिसके निचले किनारे पर छोटे मोतियों के गुच्छे लटकते हैं, जिन्हें अक्सर माणिक, पन्ना या पोल्की (कटे बिना) हीरों से सजाया जाता है। ये आंध्र और तेलंगाना की दुल्हनों का पहचान वाला हार है।

ये नाम बेहद सीधा है। यहां के कारीगर जो ये हार बनाते थे, उन्हें मोतियों के ये लटकते गुच्छे पानी में तैरती मछलियों के झुंड जैसे लगते थे गुट्टा। हर मोती, जिसे छेद करके पिरोया जाता था, बन जाता था पुसालु। यानी नाम में वही है जो आंखें देखती हैं,  मोतियों के गुच्छे जो दुल्हन की हर हरकत के साथ झूलते हैं।

 Image Guttapusalu-pinterest.com

18वीं सदी से आज तक का सफ़र

गुट्टापुसालु की जड़ें आंध्र प्रदेश के मोती-मछुआरे तटों में 18वीं सदी में पाई जाती हैं। दरबार के सुनारों ने माणिक, पन्ना और पोल्की हीरों को एक चौड़े सोने के आधार पर जड़कर, नीचे मोतियों की झालर लगाकर एक ऐसा हार बनाया जो राजाओं-रानियों के लायक़ था। जो शुरूआत में मंदिर और राजपरिवार का ज़ेवर था, वही धीरे-धीरे दक्षिण भारतीय दुल्हनों की तैयारी का सेंटर प्वाइंट बन गया और ये मुक़ाम आज भी बरक़रार है। आज बॉलीवुड की दुल्हनें भी अपनी शादी के दिन गुट्टापुसालु हार चुनती हैं।

 Image Guttapusalu -pinterest.com

हर दुल्हन इसके बिना अधूरी क्यों?

तीन वजहें इसे हर दुल्हन के जूलरी बॉक्स का दिल बनाती हैं:-

1. शुभ प्रतीक: दक्षिण भारतीय परंपरा में मोती पवित्रता और समृद्धि के प्रतीक हैं। मछली जैसे गुच्छे भरपूर बरकत का इशारा करते हैं, नई शादी के लिए एक दुआ। कई डिज़ाइनों के बीच में देवी लक्ष्मी का पेंडेंट होता है, जो धन और कृपा को दिखाता है। 

2. बेमिसाल हरकत और चमक: आम चपटे हार की तरह ये एक जगह रुका नहीं, बल्कि ज़िंदा है। सैकड़ों मोती रोशनी झपकाते हैं और दुल्हन के चलने पर झूलते हैं। कांजीवरम और बनारसी सिल्क के साथ तस्वीरों में बेहद ख़ूबसूरत लगते हैं।

3. विरासत की क़ीमत: 22K सोने, असली मोतियों और बेशक़ीमती पत्थरों से बना गुट्टापुसालु हार मां से बेटी को मिलने वाला ज़ेवर है, जिसके इमोशन और क़ीमत हर पीढ़ी के साथ बढ़ती जाती है।

 Image Guttapusalu-pinterest.com

नेकलेस  की चमक

ये डिज़ाइन हर नेकलाइन पर फिट बैठता है। गुट्टापुसालु नेकलेस या चोकर गले की हड्डी के पास बैठता है और मॉडर्न दुल्हनों के लिए बेहतर है जो हल्का लुक पसंद करती हैं। गुट्टापुसालु लॉन्ग सीने के नीचे तक आता है यह क्लासिक ब्राइडल सिल्हूट है, जिसे अक्सर चोकर के ऊपर लेयर किया जाता है। 40–80 ग्राम के हल्के वर्ज़न ने इसे रिसेप्शन, फेस्टिवल और गिफ़्टिंग के लिए भी पहनने लायक़ बना दिया है।


गुट्टापुसालु सिर्फ़ एक ज़ेवर नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की मिट्टी, समंदर और परंपरा की महक है। यह मोतियों की झालर में छुपी एक दुआ है जिसमें है बरकत, पवित्रता और प्यार। जब कोई दुल्हन इसे पहनती है, तो लगता है जैसे सदियों की विरासत उसके गले में झूम रही हो।

ये भी पढ़ें-त्रिपुरा की रिसा: जो बुनती है इतिहास, संजोती है पहचान और बिखेरती है चमक

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हुनर को बाज़ार और ज़रूरतमंदों की मदद, Mansimar Kaur के जज़्बे की कहानी

चंडीगढ़ की रहने वाली एक स्टूडेंट Mansimar Kaur (मानसिमर...

असर लखनवी: लखनऊ की तहज़ीब, ज़बान की नज़ाकत और शायराना रिवायत की दास्तान

असर लखनवी उर्दू शायरी की उस आख़िरी नस्ल के...

ख़ान-ए-आरज़ू: फ़ारसी के साये से उर्दू को निकालने वाला शाइर 

सिराज उद्दीन अली ख़ान- जिन्हें अदब की दुनिया "आरज़ू"...

जोश मल्सियानी: दीवान-ए-ग़ालिब की शरह लिखने वाले शायर 

पंडित लभु राम को अदब की दुनिया में सब...

Topics

हुनर को बाज़ार और ज़रूरतमंदों की मदद, Mansimar Kaur के जज़्बे की कहानी

चंडीगढ़ की रहने वाली एक स्टूडेंट Mansimar Kaur (मानसिमर...

ख़ान-ए-आरज़ू: फ़ारसी के साये से उर्दू को निकालने वाला शाइर 

सिराज उद्दीन अली ख़ान- जिन्हें अदब की दुनिया "आरज़ू"...

जोश मल्सियानी: दीवान-ए-ग़ालिब की शरह लिखने वाले शायर 

पंडित लभु राम को अदब की दुनिया में सब...

गुरु नानक की उदासियाँ: ईश्वर से पहले मनुष्य की खोज का रास्ता

अपनी एक यात्रा के दौरान गुरु नानक पाकपत्तन शरीफ़...

हिमाचली बुनाई की कला ‘कुल्लू पट्टी’: हर धागे में बसी है पहाड़ों की कहानी

पहाड़ों की गोद में बसा कुल्लू वैली अपनी खूबसूरती...

IFFJK 2026: कश्मीर बना Global Cinema का नया Hotspot! दुनिया भर की हज़ारों फ़िल्में

सदियों से अपने हुस्न, अपनी शिकारों और अपनी ख़ूबसूरती...

Related Articles

Popular Categories