कुछ कहानियां ज़िंदगी के मुश्किल दौर की याद दिलाती हैं, लेकिन Mehakpreet (महकप्रीत) की कहानी बताती है कि अगर हौसला मजबूत हो और समाज का साथ मिले, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी पार की जा सकती है। Mehakpreet (महकप्रीत) ने बचपन में ही ऐसे दुख देखे, जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उन्होंने अपने पिता को हार्ट अटैक की वजह से और मां को कैंसर जैसी बीमारी के चलते खो दिया। इसके बाद उनके दादा भी एक हादसे के बाद इस दुनिया से रुख़्सत हो गए। दादा साइकिल पर कपड़े बेचकर परिवार का गुज़ारा चलाते थे।
इन मुश्किल हालातों में Mehakpreet (महकप्रीत) और उनके भाई की परवरिश उनकी दादी ने की, जिन्हें वो प्यार से “मम्मी” कहती हैं। लंबे समय तक उनका घर बहुत कम आमदनी में चलता रहा। कई बार घर की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था। लेकिन इन हालातों ने Mehakpreet (महकप्रीत) का हौसला नहीं तोड़ा। उन्होंने Medical Professional बनने और डॉक्टर कहलाने का सपना देखा। अपने इस सपने को हमेशा ज़िंदा रखने के लिए वो अपने कमरे में एक मेडिकल चार्ट लगाकर रखती थी, जो उन्हें हर दिन उनके मक़्सद की याद दिलाता था।
आठवीं कक्षा में Sponsorship
Mehakpreet (महकप्रीत) की ज़िंदगी में सबसे बड़ा बदलाव 25 दिसंबर 2015 को आया, जब वो आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। इसी दौरान वो ‘SAF International’ के Sponsorship Program से जुड़ी। इस मदद की वजह से Mehakpreet (महकप्रीत) अपनी पारिवारिक परेशानियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रख सकी। Sponsorship ने न सिर्फ़ उनकी पढ़ाई में मदद की, बल्कि उनके बेहतर भविष्य की राह भी आसान की। इस Sponsorship की सबसे ख़ास बात ये थी कि इसमें सिर्फ़ बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाना ही मक़्सद नहीं था, बल्कि ये भी यकीनी बनाया जाता था कि बच्चे की पढ़ाई लगातार चलती रहे और वो बीच में पढ़ाई न छोड़े।

पढ़ाई से रोज़गार तक का सफ़र
Mehakpreet (महकप्रीत) ने मेहनत और हौसले के साथ अपनी 10+2 (Medical) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने Medical Laboratory Technology (MLT) में B.Sc. की डिग्री First Division से हासिल की। आज वो एक मेहनती Medical Professional के तौर पर उसी मशहूर संस्था श्री गुरु रामदास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च में Lab Technician के तौर पर काम कर रही हैं, जहां से उन्होंने अपनी Bachelor’s Degree पूरी की थी।
एक समय था जब उनके घर का खर्च सिर्फ़ उनकी दादी की कमाई से चलता था। लेकिन आज Mehakpreet (महकप्रीत) खुद घर की आमदनी में हिस्सा डाल रही हैं। वो घर की ज़रूरतें पूरी करने और अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी देने में मदद कर रही हैं। Sponsorship ने सिर्फ़ महकप्रीत की पढ़ाई नहीं बदली, बल्कि उनके साथ पूरे परिवार का भविष्य भी बदल दिया।
आत्मविश्वास बढ़ा और मिली नई पहचान
पहले Mehakpreet (महकप्रीत) हर काम को लेकर खुद पर शक करती थी। लेकिन Private School में पढ़ाई करने, लोगों से मिलने-जुलने और रोज़मर्रा के काम करने से उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ने लगा। उन्होंने अपनी Communication Skills बेहतर की और धीरे-धीरे खुद को अपनी परेशानियों के बजाय अपनी काबिलियत की नज़र से देखना शुरू किया। ये बदलाव बहुत मायने रखता है। क्योंकि जब कोई बच्चा खुद से कहता है, “हां, मैं ये कर सकता हूं,” तो उसके लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलने लगते हैं।
‘डॉक्टर’ बनने का अधूरा सपना अभी भी जारी
Mehakpreet (महकप्रीत) का सपना हमेशा डॉक्टर बनने का रहा है। आर्थिक तंगी की वजह से वो MBBS नहीं कर सकी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिलहाल महकप्रीत Microbiology में MSc कर रही है और आगे PhD करने का इरादा रखती हैं, ताकि एक दिन अपने नाम के आगे ‘Dr.’ लिख सकें। उनके लिए ये सिर्फ़ एक ओहदा नहीं है, बल्कि उनकी पूरी ज़िंदगी के संघर्ष और मेहनत का सम्मान है।
SAF International के CEO शमंदीप सिंह कहते हैं कि जब वो पहली बार Mehakpreet (महकप्रीत) से मिले थे, तब उनका भविष्य काफी धुंधला नज़र आ रहा था। लेकिन आज वो एक Trained Medical Professional के तौर पर अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनके मुताबिक, लंबे वक़्त तक मिलने वाली Sponsorship इसी तरह किसी बच्चे के साथ-साथ पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल सकती है।
स्टोरी– मनमीत कौर
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