Thursday, September 10, 2026
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Tag: Communal Harmony

सिख राज की तालीमी विरासत: Maharaja Ranjit Singh की सरपरस्ती और तालीम का फैलाव

18वीं सदी के बीच तक पंजाब के सिखों के पास कोई एक मज़बूत सियासी क़यादत नहीं थी। हालां कि...

साझा Punjab की कहानी: जहां रिश्ते धर्म से नहीं, दिलों से जुड़े हैं

Punjab (पंजाब) गुरुओं, पीरों और फ़कीरों की पाक ज़मीन है। ये एक ऐसा राज्य है, जो अपनी संस्कृति, लज़ीज़...

Mattan: जहां मस्जिद से अज़ान, मंदिर की घंटी और गुरबाणी मिलकर सुनाती हैं भाईचारे की कहानी

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में बसा Mattan (मट्टन) सिर्फ़ एक गांव नहीं है। ये उस गंगा-जमुनी तहज़ीब की ख़ूबसूरत...

एक हादसा, 200 ग्राम दूध और Padma Shri Gurvinder Singh का सफ़र जिसने बदली हज़ारों ज़िंदगियां

कभी-कभी ज़िदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां इंसान के सामने सिर्फ़ दो रास्ते होते हैं या तो...

दरवाज़े कभी बंद नहीं हुए: जब Gurudwara Bangla Sahib ने एक बार फिर इंसानियत की सेवा की मिसाल पेश की

अगर किसी को रहने की जगह, खाना या किसी भी तरह की मदद की ज़रूरत है, तो Gurudwara Bangla...

समयसुन्दर: वो जैन भिक्षु जिन्हें अकबर ने लाहौर बुलाकर किया सम्मानित

इतिहास में मेरे सबसे प्रिय यात्रियों में से एक हैं सोलहवीं शताब्दी में हुए एक जैन भिक्षु Samaysundar (समयसुन्दर)।...

गुलाबी उर्दू, 5 हवाई जहाज़ और चार बेगमों का शहर, भोपाल की वो कहानी जो शायद आपने कभी नहीं सुनी

भारत में कई शहर अपनी अलग पहचान रखते हैं। कोई अपनी इमारतों के लिए मशहूर है, कोई अपने खानपान...

Narayanpur Budruk: मंदिर, मस्जिद, हरियाली और विकास, एक गांव की ऐसी कहानी जो दिल छू जाए

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में बसा Narayanpur Budruk (नारायणपुर बुद्रुक) पहली नज़र में एक आम गांव लगता है, लेकिन...

भगत पूरन सिंह: इंसानियत के रहनुमा और बेसहारा लोगों का सहारा

बीसवीं सदी में पंजाब की सरज़मीन पर कई महान शख़्सियतों ने जन्म लिया। लेकिन अगर किसी ने सच में...

गिल कलां बना आपसी भाईचारे और एकता की मिसाल

पंजाब इस समय पानी की कमी की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में बठिंडा ज़िले के...

गद्दों की दुकान से बिछी जिंदगी की सड़क: Malviya Nagar हादसे में रियाज़ुद्दीन ने पेश की मानवता की मिसाल

दिल्ली के Malviya Nagar में 3 जून 2026 को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे शहर को हिला कर...

क्या है साल 1812 से चली आ रही Phool Walon Ki Sair, जो Mughal दौर से आज तक लोगों को जोड़ती है

“दिल्ली की हस्ती मुनासिर कई हंगामों पर है” Mirza Ghalib के ये अल्फ़ाज़ उस दौर की याद दिलाते हैं,...