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माहिम दरगाह: मुंबई पुलिस की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक

मुंबई की मख़दूम फकीह अली माहिमी की प्रसिद्ध दरगाह पर 611 वां उर्स मनाया गया। हर साल उर्स के दौरान माहिम के समुद्र तट पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है, और दरगाह पर चढ़ने वाली पहली चादर का सम्मान मुंबई पुलिस को दिया जाता है। इस बार उर्स 10 से 25 दिसंबर तक धूमधाम से मनाया गया, और इन दिनों में देशभर से लगभग 500 मन की चादर दरगाह पर चढ़ाई गई। लाखों भक्त बाबा के दर्शन के लिए दरगाह पहुंचे।

माहिम पुलिस स्टेशन जहां स्थित है, वह स्थान कभी पीर मख़दूम शाह बाबा की बैठक हुआ करता था। 1923 में वहां माहिम पुलिस थाने की स्थापना की गई थी, और तब से हर साल मुंबई पुलिस बाबा की चादर लेकर माहिम में जुलूस निकालती है। इस जुलूस के बाद पुलिस ही दरगाह पर चादर चढ़ाती है। इस दौरान मुंबई पुलिस विशेष सलामी देती हैं। मान्यता है कि बाबा मख़दूम शाह पुलिस के करीबी थे और अक्सर अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की मदद करते थे। यह भी कहा जाता है कि बाबा के अंतिम समय में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें पानी पिलाया था।

हज़रत मख़दूम फकीह अली माहिमी की दरगाह परिसर में बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी की गई हैं। ‘सिंघम 2’ में माहिम दरगाह को दिखाया गया था। बॉलीवुड के कई अभिनेता श्रद्धा भाव से इस दरगाह का दौरा करते हैं। 2020 में, माहिम दरगाह के प्रवेश द्वार पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना स्थापित की गई, और यह भारत का पहला धार्मिक स्थल बन गया, जहां भारतीय संविधान की प्रस्तावना लगी। राष्ट्रीय त्योहारों के दौरान यहां पारंपरिक ध्वज के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है, और राष्ट्रगीत गाकर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी जाती है।

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