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कैनबरा से तमिलनाडु तक: ऑस्ट्रेलिया ने लौटाई भारत की 12वीं सदी की चोरी हुई मूर्तियां

सदियों पुरानी विरासत और गौरवशाली अतीत को संजोए हुए तीन बेशकीमती मूर्तियां (Three priceless statues) अब ऑस्ट्रेलिया से वापस भारत आ रही हैं। ये वही मूर्तियां हैं जो तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिरों से चोरी हो गई थीं और सालों तक विदेशी संग्रहालयों की शान बनी रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा (Prime Minister Narendra Modi’s visit to Australia) के दौरान यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया, जो भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।

(Image-Ministry of Culture)

कौन-कौन सी मूर्तियां हैं वापस आ रही?

वापस लौटने वाली इन तीनों मूर्तियों का इतिहास बेहद गौरवशाली है। ये सभी 11वीं और 12वीं शताब्दी की हैं, जब दक्षिण भारत में चोल साम्राज्य (The Chola Empire in South India) का वर्चस्व था। आइए, एक-एक करके इनके बारे में जानते हैं-

भद्रकाली का त्रिशूल (Bhadrakali’s Trident): यह दुर्लभ धातु से बना त्रिशूल है, जिस पर मां भद्रकाली की आकृति बनी हुई है। ये त्रिशूल शक्ति और बुराई के विनाश का प्रतीक है।इसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। ये मूर्ति तिरुवरुर जिले के कोल्लुमंगुड़ी गांव के श्री काशी विश्वनाथस्वामी मंदिर से चोरी हुई थी।

नंदी की प्रतिमा (Statue of Nandi): भगवान शिव के वाहन नंदी की यह भव्य पत्थर की मूर्ति करीब 4 करोड़ रुपये की है। यह तिरुवरुर जिले के कडुवनकुडी गांव स्थित अरुल्मिगु कैलासनाथर मंदिर से गायब हुई थी। अपने आभूषणों और मालाओं से सजी यह मूर्ति चोल कला का अद्भुत नमूना है।

(Image-Ministry of Culture)

षण्मुख (कार्तिकेय) की मूर्ति (Statue of Shanmukha (Kartikeya)) : छह सिर वाले भगवान कार्तिकेय की यह पत्थर की प्रतिमा थंजावुर जिले के मनम्बाडी गांव के अरुल्मिगु नागनाथस्वामी मंदिर से संबंधित है। करीब 2 करोड़ रुपये की इस मूर्ति में भगवान कार्तिकेय को छह सिरों के साथ दिखाया गया है, जो ज्ञान, वीरता और दैवीय सुरक्षा का प्रतीक है.

ऐसे हुआ खुलासा और वापसी का प्रोसेस

साल 2016 में तमिलनाडु आइडल विंग-सीआईडी (Tamil Nadu Idol Wing-CID) ने मूर्ति चोरी के मामले की जांच शुरू की। ADSP बालमुरुगन और उनकी टीम ने इंटरनेट पर खोजबीन करके इन मूर्तियों को ऑस्ट्रेलिया के नेशनल गैलरी, कैनबरा (National Gallery of Australia, Canberra) में पहचाना। इसके बाद टीम ने मूल मंदिरों की पहचान की और कुंभकोणम कोर्ट से समन लिया।ये समन विदेश मंत्रालय के ज़रीये से ऑस्ट्रेलियाई सरकार को भेजा गया। लंबी कानूनी प्रोसेस के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इन मूर्तियों को वापस करने पर सहमति जताई।

ये वापसी Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) के तहत की जा रही है, जो दोनों देशों के बीच कानूनी सहायता का एक मज़बूत ज़रीया है। प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई, जिससे ये आयोजन और भी ख़ास हो गया।

(Image-x.com/narendramodi)

क्यों है ये वापसी ऐतिहासिक?

ये सिर्फ तीन मूर्तियों की वापसी नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती ग्लौबल साख और अपनी विरासत के प्रति गंभीरता का प्रमाण है। पिछले कुछ सालों में भारत ने दुनिया भर से अपनी 650 से ज़्यादा चोरी हुई कलाकृतियां वापस हासिल की हैं। 2014 से पहले ये नंबर सिर्फ 13 थे, जो दिखाता है कि सरकार की कोशिशें कितनी कारगर रही हैं।

आइडल विंग-सीआईडी की अतिरिक्त महानिदेशक डी. कल्पना नायक, IG अनिल कुमार गिरी और SP एम. चंद्रशेखरन ने इस ऑपरेशन में शामिल टीम की सराहना की है। पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल ने भी अधिकारियों के प्रयासों की प्रशंसा की है।

जब ये मूर्तियां भारत लौटेंगी, तो कानूनी औपचारिकताओं के बाद इन्हें संबंधित मंदिरों में स्थापित कर दिया जाएगा। ये न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था से जुड़ी हुई एक भावनात्मक जीत भी है। ये साबित करता है कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर के लिए भारत की लड़ाई अब और मजबूत हो गई है, और इस दिशा में कूटनीति एक अहम हथियार बनकर उभरी है।

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