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सरस्वती महल पुस्तकालय: एशिया की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में से एक तमिलनाडु की विरासत का अनमोल ख़ज़ाना

इमेजिन कीजिए, एक ऐसी जगह जहां समय रुक गया हो… जहां पांच सौ साल पुरानी ताड़पत्रियां आज भी अपनी कहानियां सुनाती हैं… जहां राजाओं के हाथों से निकली हस्तलिखित पांडुलिपियां आज भी अपनी चमक बरकरार रखती हैं… ये है सरस्वती महल पुस्तकालय (Saraswathi Mahal Library), तमिलनाडु के तंजावुर शहर (Thanjavur,Tamil Nadu) में मौजूद एशिया की सबसे प्राचीन जीवित पुस्तकालयों में से एक (One of the oldest surviving libraries in Asia)।

जब हम इस पुस्तकालय की दहलीज़ पर कदम रखते हैं, तो हमें महसूस होता है जैसे हम एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं, जहां ज्ञान की देवी सरस्वती ख़ुद अपने भक्तों का स्वागत करती हैं। ये वो पवित्र जगह है, जहां नायक राजाओं ने 1535 ईस्वी में अपनी निजी बौद्धिक संपदा के रूप में इसकी नींव रखी थी, और बाद में मराठा शासकों ने इसे और समृद्ध किया।

अतीत की झलक: एक शाही ख़्वाब

कहते हैं कि हर महान चीज़ की शुरुआत एक सपने से होती है। तंजावुर के नायक राजाओं ने जब इस पुस्तकालय की स्थापना की, तो उनका सपना था कि यहां ज्ञान की कोई कमी न हो। लेकिन असली श्रेय जाता है राजा सर्फोजी द्वितीय (1798-1832) को, जो एक विद्वान शासक थे। उन्होंने जर्मन मिशनरी क्रिश्चियन फ्रेडरिक श्वार्ट्ज (German missionary Christian Friedrich Schwartz) के संरक्षण में कई भाषाएं सीखीं। अंग्रेज़ी, फ्रेंच, इतालवी, लैटिन… वे सचमुच एक रूढ़िवादी विद्वान थे।

राजा सर्फोजी ने दूर-दूर से पंडितों को बुलवाया, उत्तर भारत के सभी प्रसिद्ध संस्कृत शिक्षण केंद्रों से पांडुलिपियां मंगवाईं, और इस पुस्तकालय को एक ऐसा खज़ाना बना दिया जिसकी बराबरी मुश्किल है।

Image Source-thanjavur.nic.in

49,000 से ज़्यादा हस्तलिखित खज़ाने

इमेजिन करें… 49,000 से अधिक पांडुलिपियां, कुछ ताड़पत्रों पर, कुछ कागज़ पर, अलग-अलग भाषाओं में लिखी हुईं-संस्कृत, तमिल, तेलुगु, मराठी, मणिप्रवालम। ये सिर्फ़ एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि भारत की भाषाई विविधता का एक जीवंत संग्रहालय है।

ख़ास तौर से, 3076 मराठी पांडुलिपियां 17वीं, 18वीं और 19वीं शताब्दी की हैं, जिनमें महाराष्ट्र के संतों का इतिहास दर्ज है। 846 तेलुगु पांडुलिपियां, 22 फ़ारसी और उर्दू पांडुलिपियाँ… और आयुर्वेद के विद्वानों के मेडिकल रिकॉर्ड, जिनमें मरीज़ों के केस स्टडीज़ और इंटरव्यू शामिल हैं।

क्या आप जानते हैं? Dr. Samuel Johnson’s Dictionary (1784) और एम्स्टर्डम में छपी पिक्टोरियल बाइबल (Pictorial Bible printed in Amsterdam-1791) जैसी दुर्लभ किताबें भी यहां मौजूद हैं। लावोज़िए की ‘केमिस्ट्री की एलीमेंट्री बुक’ और राजा सर्फोजी के पत्र-व्यवहार भी इस कोष का हिस्सा हैं।

ज्ञान का मंदिर: संग्रहालय और दुर्लभ कलाकृतियां

पुस्तकालय के साथ-साथ एक विशाल हॉल में संग्रहालय भी है,जहां देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित है। राम पट्टाभिषेकम का बड़ा चित्र, गणेश और लक्ष्मी के मनमोहक चित्र, तंजावुर मराठा राजाओं के लघु चित्र… और सबसे आकर्षक हैं राजा सर्फोजी द्वितीय (King Serfoji II) के दो विशाल पोर्ट्रेट, जो इस राजसी विरासत की गवाही देते हैं।

संग्रहालय में प्राचीन विश्व मानचित्र, तंजावुर के टाउन प्लानिंग दस्तावेज़, अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम के नक्शे,ये सब उस समय की वैज्ञानिक सोच को दर्शाते हैं, जब यूरोप में भी आधुनिक शहरी नियोजन की अवधारणा की शुरुआत थी।

Image Source- wikipedia

Modernization की राह: डिजिटल युग में क़दम

जहां ये पुस्तकालय अपनी प्राचीनता पर गर्व करता है,वहीं आधुनिक तकनीक को अपनाने में भी पीछे नहीं है। 1998 में कंप्यूटर लगाए गए,कैटलॉग डिजिटल किए जा रहे हैं, और माइक्रोफिल्म पर सभी पांडुलिपियों को सुरक्षित किया जा रहा है।

ख़ास बात ये है कि ये लाइब्रेरी आम जनता के लिए खुली है, सन 1918 से। यानी आम आदमी भी इस खज़ाने का हिस्सा बन सकता है। नेशनल मिशन फॉर मैनुस्क्रिप्ट्स ने इसे ‘मैनुस्क्रिप्ट कंज़र्वेशन सेंटर’ घोषित किया है, जो पांडुलिपियों के संरक्षण और तरक़्क़ी का काम करता है।

एक मुसाफ़िर की नज़र से

जब कोई इस लाइब्रेरी में प्रवेश करता है, तो उसे सदियों की ख़ुशबू आती है, ताड़पत्रों की सूखी महक,पुराने कागज़ों की गंध और इतिहास की वह मिठास जो किसी भी किताब में नहीं मिलती। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका ने इसे “India’s most notable library” कहा है, और सच में, ये उपाधि इसके हर पन्ने पर सजती है।

Image Source- wikipedia

विरासत की अमानत

आज जब पूरी दुनिया डिजिटल हो रही है, सरस्वती महल पुस्तकालय एक पुल का काम कर रहा है।अतीत और वर्तमान के बीच, राजाओं और आम जनता के बीच, पूर्व और पश्चिम के बीच। ये सिर्फ एक पुस्तकालय नहीं, ये एक अमानत है, हमारी सांस्कृतिक विरासत की, हमारी भाषाओं की, हमारे ऋषियों-मुनियों के ज्ञान की।

जब आप तंजावुर जाएं, तो इस पुस्तकालय को ज़रूर देखें। क्योंकि यहां हर ताड़पत्र, हर किताब, हर पेंटिंग आपसे कुछ कहना चाहती है। वो कहानी जो हमारी सभ्यता की नींव है, वो ज्ञान जो सदियों से हमें मार्गदर्शन दे रहा है।

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