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पंजाब बाढ़ (Punjab Flood) पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए पछवादून के मदरसे

पंजाब (Punjab Flood) इन दिनों भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार बारिश और उफनती नदियों ने हज़ारों घर तबाह कर दिए हैं। खेत पानी में डूब गए हैं, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और अब तक कई लोगों की जान भी जा चुकी है। एक तरफ़ लोग बेघर हो गए हैं, तो दूसरी तरफ़ रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भी परेशान हैं। ऐसे मुश्किल वक़्त में हर कोई अपने-अपने स्तर पर मदद के लिए आगे आ रहा है। इन्हीं में से एक मिसाल पेश की है देहरादून के पछवादून इलाक़े के मदरसों ने।

थाना सहसपुर, खुशहालपुर का मदरसा सिरातुल हक़ और यहां के दूसरे मदरसों ने राहत कार्य की बड़ी मुहिम शुरू की है। इन मदरसों में शिक्षकों और स्टूडेंट्स ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पंजाब बाढ़ (Punjab Flood) पीड़ितों के लिए मदद जुटाई है। किसी ने पैसे दिए, किसी ने खाने-पीने का सामान दिया, तो किसी ने कपड़े और ज़रूरी चीजें दान कीं। सबके सहयोग से यहां तकरीबन पांच लाख रुपये की राहत सामग्री और नक़द रूपये इकट्ठा किए गए।

राहत सामग्री को ट्रकों के ज़रिए पंजाब भेजा जा रहा है। सभी का मक़सद एक ही है – पीड़ित परिवारों तक उम्मीद और राहत पहुंचाना। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम बताते हैं, “हम सबने मिलकर ये राहत सामग्री तैयार की है। हमारी कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द Punjab के उन इलाकों तक पहुंचाया जाए, जहां लोग सबसे ज़्यादा परेशान हैं। हम दुआ करते हैं कि ऐसे हालात कभी किसी के सामने न आएं, लेकिन अगर कभी आएं, तो हम हमेशा मदद के लिए तैयार रहेंगे।”

Punjab में हालात बहुत गंभीर हैं। अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोग लापता हैं। लगभग 2,064 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत और बचाव कार्य में सेना, NDRF, SDRF और आपदा मित्र की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। अब तक 23 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है, लेकिन अभी भी लाखों लोग प्रभावित हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 1 लाख 84 हज़ार हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है।

ऐसे समय में जब लोग उम्मीद खोने लगते हैं, पछवादून के मदरसों ने ये साबित कर दिया कि इंसानियत सबसे बड़ी ताक़त है। ये मदद सिर्फ़ राहत सामग्री नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक संदेश है कि वो अकेले नहीं हैं। देश के कोने-कोने से लोग उनके साथ खड़े हैं। पंजाब की इस तबाही के बीच ये पहल हमें याद दिलाती है कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बनना ही इंसानियत की असली पहचान है।

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