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सुरों की इबादत: Aslam Bharti की रूहानी आवाज़ और भपंग (Bhapang) की विरासत

72 साल की उम्र में भी Aslam Bharti जब गाते हैं तो उनकी आवाज़ सीधा दिल को छूती है। उनके सुरों में वो जादू है जो सुनने वाले की रूह में समा जाती है चाहे भपंग वाद्य (Bhapang) की महफ़िल हो या क़व्वाली की शाम, Aslam Bharti अपनी ख़ूबसूरत आवाज़ से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

बिजनौर से अलवर तक का सफ़र

Aslam Bharti उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के नजीबाबाद के रहने वाले हैं। वो बताते हैं, “करीब 30 साल से राजस्थान के अलवर में हूं।” यहीं से उनकी कला को एक नया रंग मिला। उन्हे संगीत से लगाव कब शुरू हुआ इसके बारे में वो बताते हैं कि, “हमारे गांव के पास क़व्वाल रहते थे। मैं उनके पास आता-जाता था और थोड़ा बहुत गुनगुना लेता था। गाने का शौक़ बचपन से ही था। फिर एक दिन वो मुझे कलियर शरीफ़ ले गए, जहां मैंने पहली बार अपनी ग़ज़ल सुनाई। वहीं से मुझे असली शौक़ लग गया।”

Aslam Bharti ने 25 साल की उम्र में पेशेवर तौर पर गाना शुरू किया। वो कहते हैं, “अब मेरी उम्र 72 साल है, और मैं आज भी अल्लाह के करम से प्रोग्राम कर रहा हूं।” राजस्थान के लोक संगीत और क़व्वाली के मंचों पर वो लगातार परफॉर्म करते हैं और नई पीढ़ी को भी प्रेरित कर रहे हैं।

भपंग (Bhapang): एक वाद्य, एक विरासत

राजस्थान के संगीत की आत्मा कहे जाने वाले भपंग वाद्य (Bhapang) का Aslam Bharti से गहरा रिश्ता है। इसे भपंग वादक ज़हूर ख़ान बजाते थे। फिर उनके बेटे उमर फ़ारुक ने बजाया जिसके बाद से भपंग वाद्य (Bhapang) को बजाने का सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा। आज उनकी 21 वीं पीढ़ी भपंग बजा रही है। इन्ही पीढ़ी के साथ Aslam Bharti भी जुड़े, जो पिछले तीन दशकों से उनके साथ जुड़कर इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वो कहते हैं, “अब मैं इनके साथ ही रहता हूं और प्रोग्राम में कलाम गाता हूं-जैसे अमीर खुसरो साहब, नुसरत फ़तेह अली ख़ान और दूसरे शायरों के कलाम।”

राजस्थान की मिट्टी में बसते सुर

Aslam Bharti मानते हैं कि वक़्त के साथ संगीत में बहुत बदलाव आया है। “पहले सिर्फ़ ढोलक और बाजा हुआ करता था, तबला पहले कम इस्तेमाल होता था लेकिन अब ज़्यादा होता है, दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स ने जगह ले ली है। राजस्थान का संगीत हमेशा से देश-विदेश में मशहूर रहा है, और Aslam Bharti जैसे कलाकारों ने इसे नई पहचान दी है। वो मानते हैं कि “बेशक, पहले भी लोग जानते थे, लेकिन अब हमारे संगीत की शोहरत और बढ़ गई है,” वो मुस्कुराते हुए कहते हैं। Aslam Bharti की गायकी सिर्फ़ एक कला नहीं, बल्कि इबादत है। उनके सुरों में सादगी, सच्चाई और रूह की गहराई महसूस होती है।

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