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नौवारी साड़ी: योद्धा रानियों का वेश,मॉडर्न मराठी दुल्हन की पहचान

आपने कभी महाराष्ट्रीयन शादी देखी होगी… या गणेश चतुर्थी का उत्सव… या फिर किसी दुल्हन को बेपनाह भरोसे के साथ कदम बढ़ाते देखा होगा। नौवारी साड़ी बस दिखने में ही नहीं, बल्कि एहसास में भी बिल्कुल अलग है। यह नौ गज़ का कपड़ा सिर्फ एक परिधान नहीं बल्कि एक पहचान है। एक ऐसी विरासत जो सदियों से मराठी नारी की ताकत, साहस और गरिमा को बयान करती है।

Image- pexels.com

नौवारी क्या है? जानिए इसका मतलब

‘नौवारी’ शब्द दो मराठी शब्दों से बना है। नौ यानी नौ और वारी मतलब गज़। यानी नौ गज़ की साड़ी। जहां आम साड़ी छह गज़ की होती है, वहीं नौवारी में तीन गज़ ज्यादा। यह एक्स्ट्रा लंबाई इसे एक धोती-शैली का रूप देती है, जो न केवल भव्य है बल्कि अत्यंत कार्यात्मक भी।

योद्धाओं की साड़ी: इतिहास के पन्नों से

यह साड़ी महज़ एक फैशन नहीं, बल्कि मराठा साम्राज्य की गौरवगाथा है। कहा जाता है कि मराठा योद्धा रानियां और महिलाएं घोड़े पर सवार होकर युद्ध करती थीं। आम साड़ी में यह नामुमकिन था। वो लड़खड़ा जाती। तब उन्होंने यह अनोखा अंदाज़ ईजाद किया जो पैंट की तरह है, पर साड़ी की शान बरकरार रखता है।

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इतिहास की किताबों में मराठा महिला योद्धाओं की तस्वीरें हैं। हाथ में तलवार, सिर पर बुन, और नौवारी साड़ी में घोड़े पर सवार। यह उस ज़माने की औरतों की बेखौफ़ी और आत्मनिर्भरता की दास्तान है।

अनोखा अंदाज़: कैसे पहनी जाती है नौवारी?

सबसे खास बात इसे पेटीकोट के बिना पहना जाता है। आम साड़ी की तरह सामने पल्लू नहीं गिरता, बल्कि कपड़े को पैरों के बीच से ले जाकर पीछे की तरफ़ प्लीट्स किए जाते हैं। बिल्कुल धोती की तरह। इसे ‘कष्टा’ स्टाइल कहते हैं।

यह ड्रेप आपको फ्री कर देता है:

  • बिना अटके चल सकती हैं
  • साइकिल या बाइक चला सकती हैं
  • नाच-गाना कर सकती हैं
  • यहां तक कि दौड़ भी सकती हैं 

अलग-अलग अंदाज़, अलग मकसद

 ब्राह्मणी स्टाइल

शादियों और धार्मिक रस्मों में सबसे मशहूर। पल्लू को खूबसूरती से कंधे पर सजाया जाता है।

मराठा योद्धा स्टाइल

ज़्यादा ताकतवर और रौबीला। पल्लू को पीछे की तरफ़ टक किया जाता है ताकि चल-फिर आसान हो।

मॉडर्न रेडीमेड स्टाइल

आजकल की व्यस्त औरतों के लिए पहले से सिली हुई नौवारी मिलती है। बस पैर डालें और पल्लू संभालें। फ़ौरी और फैशनेबल।

Image-Social Media

कपड़ा: किस मौसम के लिए क्या?

  • पैठणी रेशम :– शादियों और खास मौकों के लिए
  • सूती नौवारी :– रोज़मर्रा और रस्मों के लिए (बहुत आरामदायक)
  • सिल्क ब्लेंड :– त्योहारों की रौनक के लिए
  • ब्रोकेड :– दुल्हनों के लिए शाही लुक

कब पहनी जाती है नौवारी?

  • महाराष्ट्रीयन शादियों में जो दुल्हन के लिए पहली पसंद होती है
  • हल्दी समारोह में पीली रंगत और नौवारी का जादू होता है
  • गणेश चतुर्थी के मौके पर सड़कों पर रौनक लग जाती है
  • गुढी पाडवा पर ये महाराष्ट्रीयन नववर्ष है 
  • लावणी नृत्य के वक्त जो ऊर्जावान स्टेप्स के लिए परफेक्ट ड्रेप है
  • गर्भवती महिलाओं के लिए आरामदायक और ढीला फिट है

क्या नौवारी पहनना मुश्किल है?

हां, अगर पहली बार ड्रैप करें तो थोड़ा मुश्किल लगता है। प्लीट्स सही करना और कसकर बांधना सीखना पड़ता है। लेकिन अब रेडीमेड नौवारी मिलती हैं। पैंट की तरह स्टिच्ड, आपको बस कमर पर बांधना है और पल्लू सेट करना है। ज़रा सी प्रैक्टिस और आप भी उस्ताद। 

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क्यों आज भी मायने रखती है नौवारी?

फैशन हर मौसम बदलता है, पर नौवारी ने अपनी पकड़ कभी नहीं छोड़ी। क्योंकि यह सिर्फ कपड़ा नहीं, यह विरासत है। posture सुधारती है। महिलाओं को ताकत का एहसास देती है। ये श्रद्धा और गर्व दोनों का प्रतीक है। आज की नई पीढ़ी इसे आधुनिक अंदाज़ में पहनकर अपनी जड़ों से जुड़ रही है। और यही इसकी ख़ासियत है।

नौवारी साड़ी महज़ नौ गज़ का कपड़ा नहीं। यह इतिहास, संस्कृति, सम्मान और नारीशक्ति का प्रतीक है।  

ये भी पढ़ें-  बिहार की सुजनी कढ़ाई: कपड़े पर बुनती कहानियां, ख़्वाब और पहचान

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