साफ़-सुथरी सड़कें, खुला और हवादार माहौल और चारों तरफ़ हरियाली हर इंसान की पसंद होती है। लेकिन इसे बनाए रखने के लिए बहुत कम लोग ख़ुद आगे आकर सफ़ाई की ज़िम्मेदारी लेते हैं। ज़्यादातर लोग समस्याओं पर बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए ज़मीन पर काम करने वाले लोग कम ही होते हैं।
ऐसी ही एक अलग और प्रेरणादायक मिसाल पटियाला के रहने वाले हरिंदर पाल सिंह लांबा ने पेश की है। शहर को फिर से ख़ूबसूरत और प्रदूषण से पाक बनाने के मक़सद से उन्होंने लोगों की भागीदारी वाली एक सफ़ाई मुहिम शुरू की है। इस मुहिम का नाम है ‘मेरा पटियाला मैं ही संवारूं’। इस मुहिम के ज़रिए लोगों को अपने शहर की सफ़ाई और ख़ूबसूरती की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
शहरवासियों की पहल
शहर को नई शक्ल देने के लिए शुरू की गई ये मुहिम अब एक लोक लहर बनती जा रही है। इस अभियान में शहर के हर तबके के लोग अपनी मर्ज़ी से शामिल हो रहे हैं। इस मुहिम के बारे में हरिंदर पाल सिंह लांबा ने बताया कि ये शहर के नागरिकों की ओर से शुरू की गई एक ख़ास पहल है। शहर के सम्मानित नागरिक, जैसे फौजी, शिक्षक, कारोबारी, वकील, डॉक्टर और स्टूडेंट्स इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।

हर शनिवार और रविवार सुबह 7 से 8 बजे तक सभी लोग मिलकर शहर की किसी एक जगह को साफ़ करने के लिए चुनते हैं। टीम के सदस्य सिर्फ़ उस जगह की सफ़ाई ही नहीं करते, बल्कि उसे ख़ूबसूरत भी बनाते हैं। नगर निगम के सहयोग से वहां से प्लास्टिक और दूसरे तरह का कूड़ा भी हटाया जाता है।
फौजियों का अटूट जज़्बा
देश की सरहदों की हिफाज़त कर चुके रिटायर्ड फौजी अफ़सर भी इस मुहिम में अहम किरदार निभा रहे हैं। समाज की खिदमत करने का जज़्बा उनमें आज भी बरकरार है। भारतीय फौज के रिटायर्ड अफ़सर कैप्टन सुखजीत भी लगातार इस टीम से जुड़े हुए हैं और सफ़ाई के काम में अपना योगदान दे रहे हैं। अपने तजुर्बे के बारे में बताते हुए कैप्टन सुखजीत ने कहा कि वो पटियाला के ही रहने वाले हैं।
उन्हें सितंबर महीने में अपने दोस्त कर्नल सलवान के ज़रिए ‘मेरा पटियाला मैं ही संवारूं’ मुहिम के बारे में पता चला। सितंबर से अब तक वो हर शनिवार और रविवार शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर इस सफ़ाई मुहिम में हिस्सा ले रहे हैं।

300 से ज़्यादा लोगों का काफ़िला
कोई भी बड़ा बदलाव एक छोटे से ख़्याल से शुरू होता है। शहर को साफ़-सुथरा देखने की चाह सोशल मीडिया के ज़रिए एक मुहिम में बदल गई। इस मुहिम की शुरुआत के बारे में बात करते हुए सरदार हरिंदर पाल सिंह लांबा ने बताया कि शहर की सफाई का ख़्याल उनके मन में काफी समय से था। पिछले साल 13 सितंबर के आसपास फेसबुक और इंस्टाग्राम के ज़रिए शहरवासियों को सफ़ाई के लिए एक साथ आने की अपील की गई।
20 सितंबर 2025 को पोलो ग्राउंड से शुरू हुई पहली सफ़ाई ड्राइव में करीब 25 लोगों ने हिस्सा लिया था। लेकिन आज इस मुहिम से 300 से ज़्यादा वॉलंटियर्स जुड़ चुके हैं। उनका मानना है कि इस मुहिम से जुड़े दूसरे नागरिकों का जज़्बा और उत्साह उनसे भी कहीं ज़्यादा है।
उम्र नहीं, जज़्बा ज़रूरी
इस सफ़ाई मुहिम में उम्र की कोई पाबंदी नहीं है। बड़ी उम्र के बुज़ुर्ग भी पूरे जज़्बे के साथ सड़कों पर उतरकर सफ़ाई करते हैं। उनका ये जज़्बा नौजवानों के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। इस बारे में एक बुज़ुर्ग वॉलंटियर ने बताया कि उनकी उम्र 78 साल से भी ज़्यादा है। एक दिन उनके परिवार के लोगों ने उन्हें इस मुहिम में शामिल होने के लिए कहा था।
उस दिन के बाद से वो इस काम से खुद को अलग नहीं कर पाए। शारीरिक परेशानियों और पीठ के दर्द के बावजूद उन्होंने एक भी दिन इस मुहिम को नहीं छोड़ा। उनके दिल में अपने शहर के लिए कुछ करने की इतनी चाहत और जज़्बा है कि वो लगातार इस काम में जुटे हुए हैं।
आदतें बदलने की पहल
समाज में हर परेशानी के लिए अक्सर प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन इस टीम का मानना है कि शहर को साफ़ रखना सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आम लोगों को भी अपनी आदतें बदलनी होंगी और कूड़ा सही जगह पर डालना होगा।
लोगों की सोच और आदतों के बारे में बात करते हुए हरिंदर पाल ने कहा कि सारा काम सिर्फ़ नगर निगम या प्रशासन पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि उनके पास पहले से ही कई दूसरी ज़िम्मेदारियां होती हैं। उनके मुताबिक, बाज़ारों और कारोबारी इलाकों में लोगों के अंदर डस्टबिन इस्तेमाल करने की आदत अभी पूरी तरह नहीं बनी है। वहीं, घरों में भी गीले और सूखे कूड़े को अलग नहीं किया जाता। इससे लैंडफिल साइटों पर कूड़े का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दुकानदारों और आम लोगों को कूड़ा डस्टबिन में डालने और उसे अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करना ज़रूरी है। जैसे इंदौर और सिंगापुर जैसी जगहों पर लोग जुर्माने के डर से सड़क पर कूड़ा डालने से बचते हैं, उसी तरह यहां भी लोगों में जागरूकता पैदा करने की ज़रूरत है।
उन्होंने आगे बताया कि जापान जैसे देशों में बच्चों को स्कूल के पहले दिन से ही अपनी डेस्क और क्लासरूम साफ़ करने की आदत सिखाई जाती है। इसी सोच के साथ इस टीम का मक़सद कूड़ा फेंकने वाली जगहों को इतना ख़ूबसूरत बनाना है कि कोई भी वहां दोबारा कूड़ा डालने से पहले सोचे।
नागरिकों फ़र्ज़ और अपील
शहर की सफ़ाई एक लगातार चलने वाला काम है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जिन जगहों को वॉलंटियर्स एक दिन साफ़ करते हैं, वहां अगले ही दिन लोग दोबारा कूड़ा डाल देते हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए आम लोगों के एकजुट होने की ज़रूरत है।
आम लोगों से अपील करते हुए कैप्टन सुखजीत ने कहा कि सभी को सड़कों पर कूड़ा फेंकने के बजाय उसे घर के डस्टबिन में डालने की आदत बनानी चाहिए। साथ ही, ये आदत अपने बच्चों को भी सिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार जिन सड़कों को सुबह साफ़ किया जाता है, वहां अगले दिन फिर से कूड़े के लिफाफे दिखाई देते हैं। इसे रोकने के लिए हम सभी को मिलकर अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी और एक ज़िम्मेदार नागरिक का फ़र्ज़ निभाना होगा।
उज्ज्वल भविष्य की तरफ़ कदम
‘मेरा पटियाला मैं ही संवारूं’ टीम की ये कोशिश सिर्फ़ कूड़ा हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये लोगों में अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास और शहर को बेहतर रखने की सोच पैदा करने की एक बड़ी कोशिश है। अगर शहर का हर नागरिक इन वॉलंटियर्स के जज़्बे से प्रेरणा लेकर अपने आसपास की जगह को साफ़ रखने का इरादा कर ले, तो पटियाला पूरे पंजाब में सफ़ाई की एक बेहतरीन मिसाल बन सकता है।
स्टोरी– मनमीत कौर
इस लेख को पंजाबी में पढ़ें
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