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पद्मनाभपुरम महल: लकड़ी का अद्भुत ख़ज़ाना, केरल के शाही विरासत की शानदार मिसाल

केरल (Kerala) के पूर्व राजाओं की ये शानदार विरासत है पद्मनाभपुरम महल (Padmanabhapuram Palace)। त्रावणकोर राजाओं का यह ऐतिहासिक महल आज भी अपनी भव्यता से सबको हैरान कर देता है। यह महल पूरी तरह से लकड़ी और पत्थर से बना है, जो केरल की पारंपरिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है।

इतिहास के पन्नों में

इस महल की नींव 1601 ईस्वी में रखी गई थी, जब इसे ‘कलकुलथु कोइक्कल’ (‘Kalkulathu Koikkal’) के नाम से जाना जाता था। राजा मार्तण्ड वर्मा (King Marthanda Varma) ने 1750 के आसपास इस महल का पुनर्निर्माण करवाया और इसे भगवान पद्मनाभ स्वामी को समर्पित किया। तभी से इसका नाम पद्मनाभपुरम महल पड़ा।

पद्मनाभपुरम महल (Image-incredibleindia.gov.in)

लकड़ी का जादू

6.5 एकड़ में फैला यह महल एशिया के सबसे बड़े लकड़ी के महलों में से एक है। यहां 15 इमारतें हैं, जिन पर बेहद बारीक नक्काशी और शिल्पकला के नमूने देखने को मिलते हैं। हर कोना, हर दीवार, हर छत कारीगरों की मेहनत की दास्तान सुनाती है।

आप क्या देखेंगे?

इस महल में राजाओं के खज़ाना कक्ष, शयनकक्ष, पूजा घर और सभी महत्वपूर्ण कमरे आज भी सुरक्षित हैं। हर चीज़ ऐसी लगती है जैसे अभी-अभी राजा यहां से उठकर गए हों। 1795 तक त्रावणकोर राज्य की राजधानी यहीं थी, बाद में इसे तिरुवनंतपुरम शिफ्ट कर दिया गया।

एक नई शुरुआत

1935 में त्रावणकोर के आख़िरी राजा श्री चित्रा तिरुनाल बलराम वर्मा (Sree Chitra Thirunal Balarama Varma) ने पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर इस महल को संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया। आज यहां आकर आप इतिहास को महसूस कर सकते हैं।

पद्मनाभपुरम महल (Image-incredibleindia.gov.in)

 थक्कले रबर एस्टेट 

 थक्कले रबर एस्टेट और उदयगिरि किला भी आपकी केरल की  यात्रा को यादगार बना देंगे।

 भारतीय वास्तुकला का जीता-जागता सबूत

पद्मनाभपुरम महल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि केरल की शान, त्रावणकोर की गाथा और भारतीय वास्तुकला का जीता-जागता सबूत है। अगर आप इतिहास के दीवाने हैं, तो इस जगह को अपनी लिस्ट में ज़रूर शामिल करें। यहां की लकड़ी की नक्काशी, शांत वातावरण और ऐतिहासिक धरोहर आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। यह उन विरासतों में से है जो हर भारतीय को एक बार ज़रूर देखनी चाहिए।

ये भी पढ़ें- चौमहल्ला पैलेस: हैदराबाद की शान, निज़ामों की विरासत

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