Sunday, October 4, 2026
25.3 C
Delhi

बिहार की सुजनी कढ़ाई: कपड़े पर बुनती कहानियां, ख़्वाब और पहचान

बिहार के गांवों में जब कोई नन्हा मेहमान आता था, तो मां-बहनें पुरानी साड़ियों और धोतियों को सी-सीकर एक गद्देदार चादर तैयार करतीं। यह कोई साधारण चादर नहीं, बल्कि सुजनी थी (Bihar’s Sujani Embroidery) जो बच्चे को गर्मी और आशीर्वाद दोनों देती थी। संस्कृत के ‘सु’ (अच्छाई) और ‘जनि’ (जन्म) से बना यह नाम ही बताता है कि यह कढ़ाई मां और बच्चे के रिश्ते से जन्मी है। वक्त के साथ यह कढ़ाई महज़ कपड़े से आगे बढ़कर बिहार की रूह बन गई।

(Image-pexels.com)

जन्म से GI टैग तक: सुजनी का सफ़र

18वीं सदी में भसुरा गांव (भोजपुर) से शुरू हुई इस कला ने धीरे-धीरे मधुबनी, सीतामढ़ी और समस्तीपुर तक अपनी जड़ें फैलाईं। पुराने कपड़ों की परतें, रजाई की टांके, और फिर उन पर उभरते सूरज, बादल, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और ज्यामितीय डिजाइन। यही थी सुजनी (Sujani Embroidery) की पहचान। लाल और पीले धागे ख़ास होते थे, लाल उर्जा का प्रतीक, तो पीला सूर्य-तेज। देवी-देवताओं की आकृतियां बुरी नज़र से बचाने के लिए बनाई जाती थीं।

साल 2006 में इस कला को Geographical Indication (GI) टैग मिला यानी अब ‘सुजनी’ नाम किसी और राज्य का नहीं, सिर्फ बिहार का है। यह कदम इस विरासत को कानूनी संरक्षण देने के साथ-साथ इसे ग्लोबल पहचान दिलाने का पुल बना।

कैसे बनती है सुजनी? सुई के हर टांके में है मेहनत


सबसे पहले सबजेक्ट (जैसे- त्योहार, कृषि, पारिवारिक जीवन) तय किया जाता है। फिर कपड़े पर सीधे हाथ से डिज़ाइन बनाए जाते हैं या स्टेंसिल का यूज़ होता है। तीन-चार परतों को रखकर उन्हें रनिंग टांके से जोड़ा जाता है, फिर चेन स्टिच और बैक स्टिच से डिजाइन, फूल-पत्ते और किनारे उकेरे जाते हैं। अनुभवी कारीगर सतह पर उतार-चढ़ाव (texture) बनाते हैं, जिससे कढ़ाई जीवंत हो उठती है। लास्ट में ढीले धागे काटे जाते हैं और किनारों को संवारा जाता है।

यह काम कभी चूल्हे-चौके के बीच होता था, लेकिन अब Organized group बनाकर किया जाता है।

(Image-pexels.com)

सुजनी सिर्फ कढ़ाई नहीं, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज़

सुजनी की ख़ासियत यह है कि यह औरतों की ज़ुबान है। सूखा, बाढ़, प्यार, बिछड़न, पशु-पक्षियों का प्रेम, प्रकृति का कोप हर भाव इस पर उकेरा जाता है। कुछ टुकड़ों में महिलाओं ने पंचायत चुनाव, शिक्षा, यहां तक कि कोरोना काल की जागरूकता को भी सुई की नोक पर उतारा है। यह कला पितृसत्ता को चुनौती भी है, क्योंकि पुरुषों के वर्चस्व वाले गांवों में यह महिलाओं की अपनी बात कहने की जगह बन गई है।

GI टैग और चुनौतियां

GI टैग ने सुजनी को ‘बिहार की पहचान’ बना दिया, लेकिन चुनौतियां खत्म नहीं हुईं 

(Image-pexels.com)

युवा पीढ़ी का शहरों की ओर पलायन

  • मशीनी कपड़ों की सस्ती कॉपीज़
  • कच्चे माल (सूती कपड़ा, रंगाई) के दाम बढ़ना
  • डिज़ाइन चोरी और कॉपीराइट का अभाव

फिर भी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart, Etsy) और सरकारी योजनाएं (जैसे एक जिला एक उत्पाद) ने इसे नई जान दी है। अब सुजनी बैग, कुशन कवर, फ़ाइल कवर, जूतियां हर जगह है।

कपड़ा नहीं, एक विरासत


सुजनी मां के आंचल की तरह है गर्म, किसी कहानी से भरा और अर्थपूर्ण। यह सिर्फ हुनर नहीं, बल्कि बिहारी नारी की संघर्ष-गाथा है। जब आप एक सुजनी वस्त्र को देखें, तो समझें कि हर टांके के पीछे कोई मां, बहन या बेटी ने अपनी रातों की नींद, सपने और मेहनत बुनी है। इसी सुई के ज़रिये से आज सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और बिहार की खुशबू पूरी दुनिया में फैला रही हैं।

(Image-pexels.com)

सुजनी पर अहम फैक्ट्स

  • सुजनी में इस्तेमाल 17 से ज़्यादा तरह के टांकों का Documentation हुआ है।
  • रेड-येलो के अलावा हरे और नीले रंग का इस्तेमाल पानी और हरियाली के लिए होता है।
  • महिलाओं ने अपनी निजी डायरी की तरह कढ़ाई की है। एक टुकड़े पर बेटी की शादी, तो दूसरे पर बाढ़ की त्रासदी।
  • 2000 के बाद एक्सपोर्ट भी शुरू हुआस जर्मनी, जापान, USA में सुजनी की मांग है।
  • रीसर्च बताती हैं कि सुजनी बनाने से Mental peace और collective empowerment बढ़ता है। यह एक तरह की आर्ट थेरेपी भी है।

ये भी पढ़ें-  कालीघाट पेंटिंग: जब ब्रश ने समाज का आईना बनकर इतिहास लिखा

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

मनीष शुक्ला: उर्दू के बहाने सलीक़ा सीखने वाला शायर

कुछ लोग ज़बान को सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं, और...

बनारस की गुलाबी मीनाकारी: चांदी पर उकेरा जाता है ज़िंदगी का रंग

काशी की गलियों में एक ऐसी कला सदियों से...

Baba Hanuman Singh की शहादत और सोहाना साहिब का इतिहास

सिख इतिहास कुर्बानियों, बहादुरी और शहादत की अनगिनत मिसालों...

पंडित हरिचंद अख़्तर: हंसी में छुपी गहरी बात कहने वाला शायर

कुछ शायर ऐसे होते हैं जिन्हें लोग एक ही...

Topics

मनीष शुक्ला: उर्दू के बहाने सलीक़ा सीखने वाला शायर

कुछ लोग ज़बान को सिर्फ़ इस्तेमाल करते हैं, और...

Baba Hanuman Singh की शहादत और सोहाना साहिब का इतिहास

सिख इतिहास कुर्बानियों, बहादुरी और शहादत की अनगिनत मिसालों...

Puneri Pagri: पुणे की सक़ाफ़त, मराठा की शान और GI टैग वाली अनोखी विरासत 

महाराष्ट्र की धरती, जहां वीरों की गाथाएं जन्म लेती...

Related Articles

Popular Categories