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IUST: तालीम से तरक़्क़ी तक- Prof. Shakil Ahmad Romshoo की अगुवाई में रिसर्च, रोज़गार और समाज से जुड़ी नई सोच

इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IUST) आज सिर्फ़ एक पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि तालीम, रिसर्च और समाज से जुड़ी सोच का एक अहम सेंटर बन चुकी है। DNN24 से ख़ास बातचीत में IUST के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर शकील अहमद रमशू ने यूनिवर्सिटी के सफ़र, उसकी तरक़्क़ी और आने वाले वक़्त की योजनाओं पर खुलकर बात की।

उन्होंने बताया कि कैसे साल 2005 में शुरू हुई ये यूनिवर्सिटी आज स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए एक भरोसेमंद और पसंदीदा इदारा बन रही है। प्रोफ़ेसर रमशू के मुताबिक IUST का मक़सद सिर्फ़ डिग्री देना नहीं है, बल्कि स्टूडेंट्स को हुनरमंद बनाना, रोज़गार के लिए तैयार करना और उन्हें मानसिक, सामाजिक और वर्ल्ड लेवल पर मज़बूत बनाना है। इस बातचीत में रिसर्च, प्लेसमेंट, स्किल डेवलपमेंट, मेंटल हेल्थ, जेंडर इक्वालिटी और इंटरनेशनल मौक़ों जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत की, जो IUST की सोच और विज़न को साफ़ तौर पर दिखाते हैं।

2005 से शुरू हुआ तालीम का सफ़र

प्रोफ़ेसर शकील अहमद रमशू ने बताया कि IUST की स्थापना साल 2005 में हुई थी। उस समय मक़सद सिर्फ़ एक यूनिवर्सिटी खड़ी करना नहीं था, बल्कि जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट्स को ऐसी तालीम देना था, जो उन्हें देश और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के क़ाबिल बना सके। शुरुआती दौर में संसाधन सीमित थे, लेकिन इरादे मज़बूत थे। उन्होंने कहा कि हर संस्थान की तरह IUST का सफ़र भी आसान नहीं रहा। कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन धीरे-धीरे यूनिवर्सिटी ने अपनी पहचान बनाई। आज IUST सिर्फ़ एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट नहीं, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां तालीम, रिसर्च और समाज से जुड़ी सोच को बराबर अहमियत दी जाती है।

Source: https://iust.ac.in/

क्यों बन रहा है IUST स्टूडेंट्स की पहली पसंद

बातचीत के दौरान प्रोफ़ेसर रमशू ने बताया कि आज IUST स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स की पसंद बनता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां की पढ़ाई का लेवल, रिसर्च का माहौल और स्टूडेंट्स के लिए मिलने वाले मौक़े। लगातार नए-नए कोर्सेस शुरू किए गए हैं। IUST का सबसे बड़ा स्कूल School Of Engineering & Technology है। IUST का ख़ास फ़ोकस साइंस, टेक्नोलॉजी और उद्यमिता (entrepreneur) पर फ़ोकस है।

यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि स्टूडेंट्स को सोचने, सवाल करने और नए आइडियाज़ पर काम करने के लिए मोटिवेट किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज का स्टूडेंट सिर्फ़ डिग्री नहीं चाहता, वो चाहता है स्किल, एक्सपोज़र और सही रहनुमाई। IUST इन तीनों चीज़ों पर बराबर ध्यान देता है। यहां के कोर्सेज़ ऐसे डिज़ाइन किए गए हैं, जो स्टूडेंट्स को ऐकडेमिक तौर पर मज़बूत बनाने के साथ-साथ प्रोफ़ेशनल दुनिया के लिए भी तैयार करते हैं।

Source: IUST Instagram

रिसर्च जो समाज से जुड़ी हो

इस बातचीत का एक अहम हिस्सा IUST के रिसर्च फोकस को लेकर रहा। पहले रिसर्च का बजट करीब 2 करोड़ रुपये था और पिछले तीन सालों में करीब 65 करोड़ रुपये बढ़ा है। प्रोफ़ेसर रमशू ने साफ़ कहा कि रिसर्च तभी मायने रखती है, जब वो समाज के काम आए। IUST में रिसर्च का फोकस सामाजिक मुद्दों, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी और आज के समय की ज़रूरतों पर है।

उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में ऐसे कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो आम लोगों की ज़िंदगी से जुड़े सवालों को समझने और उनके हल तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। चाहे वो पर्यावरण की सुरक्षा हो, पानी की समस्या हो या सामाजिक बदलाव, IUST का रिसर्च ज़मीन से जुड़ा हुआ है।

पर्यावरण और समकालीन मुद्दों पर ख़ास ध्यान

प्रोफ़ेसर रमशू की पर्यावरण फ़ील्ड के जानकार हैं, इसलिए IUST में पर्यावरण से जुड़े रिसर्च को ख़ास अहमियत दी जाती है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट से जूझ रही है। ऐसे में यूनिवर्सिटीज़ की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है। IUST में स्टूडेंट्स को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाता है और उन्हें ऐसे रिसर्च के लिए मोटिवेट किया जाता है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए फ़ायदेमंद हो। उनका मानना है कि तालीम का मक़सद सिर्फ़ नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज के लिए ज़िम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।

Source: IUST Instagram

पढ़ाई और रोज़गार के बीच की दूरी

बातचीत में प्रोफ़ेसर रमशू ने एक अहम मुद्दे पर बात की पढ़ाई और रोज़गार के बीच का फासला। 2021 में प्लेसमेंट रेट 28 फीसदी था, जो बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने माना कि आज कई स्टूडेंट्स डिग्री तो ले लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए ज़रूरी स्किल्स की कमी रह जाती है। IUST इस गैप को कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है। यूनिवर्सिटी में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, वर्कशॉप और इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग करवाई जाती है। स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल नॉलेज दी जाती है, ताकि वो जॉब मार्केट की मांग को समझ सकें। प्रोफ़ेसर रमशू ने कहा कि हमारा मक़सद है कि स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी से निकलते ही आत्मनिर्भर बन सकें।

प्लेसमेंट और इंडस्ट्री कनेक्शन

IUST में प्लेसमेंट सिस्टम को भी मज़बूत किया जा रहा है। प्रोफ़ेसर रमशू ने बताया कि यूनिवर्सिटी अलग-अलग कंपनियों और संस्थानों के साथ क़ॉन्टेक्ट बढ़ा रही है, ताकि स्टूडेंट्स को अच्छे प्लेसमेंट के मौक़े मिल सकें। इसके अलावा, स्टार्टअप और उद्यमिता (Entrepreneurship) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर स्टूडेंट्स की राह अलग होती है। कोई जॉब करना चाहता है, कोई अपना काम शुरू करना चाहता है और कोई रिसर्च या टीचिंग फ़ील्ड में जाना चाहता है। IUST स्टूडेंट्स को हर रास्ते के लिए तैयार करने की कोशिश करता है।

Source: IUST Instagram

करियर गाइडेंस और सही रहनुमाई

इस बातचीत में करियर गाइडेंस पर भी ख़ास ज़ोर दिया गया। प्रोफ़ेसर रमशू ने कहा कि आज के दौर में स्टूडेंट्स के सामने मौक़े तो बहुत हैं, लेकिन सही दिशा मिलनी ज़रूरी है। IUST में करियर काउंसलिंग सेशन्स, एक्सपर्ट टॉक्स और मेंटरशिप प्रोग्राम्स के ज़रिए स्टूडेंट्स की रहनुमाई की जाती है। स्टूडेंट्स को ये समझाया जाता है कि उनकी रुचि और क्षमता के हिसाब से कौन-सा करियर सही रहेगा। इससे न सिर्फ़ उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वे अपने भविष्य को लेकर बेहतर फैसले भी ले पाते हैं।

ग्लोबल फेलोशिप और इंटरनेशनल मौक़े

ॉप्रोफ़ेसर रमशू ने बताया कि IUST स्टूडेंट्स को सिर्फ़ देश तक सीमित नहीं रखता। यूनिवर्सिटी उन्हें ग्लोबल लेवल पर मौक़े देने की कोशिश करती है। इसके लिए इंटरनेशनल फेलोशिप, एक्सचेंज प्रोग्राम्स और विदेशी यूनिवर्सिटीज़ के साथ सहयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब स्टूडेंट्स इंटरनेशनल लेवल पर जाते हैं, तो उनका नज़रिया और भी व्यापक होता है। वो नई संस्कृतियों, नई टेक्नोलॉजी और नई सोच से रूबरू होते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को और निखारती है।

इंटरनेशनल लेवल पर कॉम्पिटिशन की तैयारी

IUST का एक बड़ा मक़सद है कि यहां के स्टूडेंट्स इंटरनेशनल लेवल पर भी अपनी पहचान बना सके। प्रोफ़ेसर रमशू ने कहा कि इसके लिए यूनिवर्सिटी में क्वालिटी एजुकेशन, मज़बूत रिसर्च और स्किल बेस्ड लर्निंग पर फोकस किया जाता है। स्टूडेंट्स को कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर हिस्सा लेने के लिए मोटिवेट किया जाता है। इससे उनमें आत्मविश्वास आता है और वो दुनिया के सामने अपनी क़ाबिलियत साबित कर पाते हैं।

Source: IUST Instagram

IUST में मेंटल हेल्थ और स्टूडेंट काउंसलिंग सिस्टम

मेंटल हेल्थ सिस्टम को लेकर उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ सेहत को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता। इसके लिए यूनिवर्सिटी में सेंटर फ़ॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस स्थापित किया गया है, जहां हर स्टूडेंट्स को मेंटल हेल्थ से जुड़ी सुविधाएं मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स एक डिजिटल ऐप के ज़रिए आसानी से अपना अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, ताकि वक्त पर उन्हें काउंसलिंग और सहयोग मिल सके। इसके अलावा हॉस्टल में भी अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं, जो स्टूडेंट्स की भलाई और मेंटल हेल्थ पर नज़र रखती हैं। प्रोफ़ेसर ने कहा कि यूनिवर्सिटी लगातार इस सिस्टम को और मज़बूत व बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। यूनिवर्सिटी के एक्ट में एक स्टूडेंट काउंसलिंग है। महिलाएं और पुरुष दोनों इस काउंसलिंग के मेंबर है।

IUST में जेंडर इक्वालिटी

यूनिवर्सिटी में जेंडर इक्वालिटी यानी महिला और पुरुष को बराबर मौका देने पर पूरा ध्यान दिया जाता है। प्रोफ़ेसर बताते हैं कि जब भी यूनिवर्सिटी में नई वैकेंसी निकलती है, तो कोशिश होती है कि उसमें महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए मौक़े हों। आमतौर पर करीब 30 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए रखने की कोशिश की जाती है। अगर मान लीजिए 10 टीचर्स की भर्ती हो रही है, तो यूनिवर्सिटी चाहती है कि 4 या 5 टीचर्स महिलाएं हों। इसका असर साफ दिखता है। आज यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कुल स्टूडेंट्स में से करीब 44 प्रतिशत लड़कियां हैं।

सिर्फ़ स्टूडेंट्स ही नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी की ज़िम्मेदार पदों पर भी करीब 77 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं। इससे पता चलता है कि यहां महिलाओं को आगे बढ़ने के पूरे मौक़े दिए जाते हैं। स्पोर्ट्स में भी लड़कियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और यूनिवर्सिटी का नाम रोशन कर रही हैं। पढ़ाई के नियमों की बात करें तो सभी स्टूडेंट्स के लिए 75 प्रतिशत अटेंडेंस ज़रूरी है, लेकिन लड़कियों को 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है।

Source: IUST Instagram

भविष्य की सोच और मिशन

बातचीत के आख़िर में प्रोफ़ेसर शकील अहमद रमशू ने IUST के भविष्य की योजनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। नए कोर्सेज़, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च के नए आयाम IUST की तवज्जोह हैं। उनका कहना है कि IUST का असली मक़सद सिर्फ़ डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे नौजवान तैयार करना है, जो सोचने-समझने वाले हों, समाज के लिए ज़िम्मेदार हों और देश-दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

ये बातचीत साफ़ तौर पर दिखाती है कि IUST सिर्फ़ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि एक सोच है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जो तालीम को समाज, रोज़गार और भविष्य से जोड़ता है। प्रोफ़ेसर शकील अहमद रमशू की अगुवाई में IUST लगातार आगे बढ़ रहा है और हज़ारों स्टूडेंट्स के सपनों को नई उड़ान दे रहा है।

ये भी पढ़ें: सेब (Apple) की मिठास से दुनिया को जोड़ता कश्मीर: नज़ीर अहमद राथर की हाई डेंसिटी खेती का सफ़र

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