Thursday, February 26, 2026
29.6 C
Delhi

कैसा था सम्पूर्ण सिंह कालरा से गुलज़ार बनने तक का सफ़र ?

मशहूर कवि, लेखक, गीतकार और स्क्रीन राइटर गुलज़ार साहब किसी पहचान के मोहताज़ नहीं है। तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिक़वा तो नहीं जैसे सुपरहिट गाने लिखने वाले गुलज़ार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 पंजाब (पाकिस्तान) के दीना गांव में हुआ। गुलज़ार ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें किस्मत मुंबई ले आएंगी। सफ़र में कई पड़ाव आए लेकिन जो हासिल किया वो लाजवाब रहा। गुलज़ार साहब ने गीत लिखने के साथ ‘आंधी’, ‘किरदार’, ‘मौसम’, ‘नमकीन’, ‘लिबास’ जैसी कई फिल्मों का डायरेक्शन भी किया। 

गुलज़ार साहब के हर गाने में रूमानी अहसास होता है। उन्हें अल्फ़ाज़ों का जादूगर कहा जाता है, उनके लिखे गाने कब दिल की गहराइयों में उतर जाते हैं पता ही नहीं चलता। 1947 में बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया। संपूर्ण सिंह कालरा से गुलज़ार बनने तक का सफ़र संघर्ष भरा था। उन्हें बचपन से ही लिखने पढ़ने का शौक था और मां के इंतकाल के बाद उन्होंने अपने खालीपन को शब्दों से भरना शुरू कर दिया था। 

एक वक्त आया जब गुलज़ार ने अपने सपनों की नगरी मुंबई का रुख किया और यहीं के होकर रह गए। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत 1961 में विमल रॉय के असिस्टेंट के रूप में हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुलज़ार के मुंबई में आने और संघर्षों का ज़िक्र है। कहा जाता है मुंबई आने के बाद गुलज़ार साहब गैराज में काम करते थे और खाली समय में कविताएं लिखने में जुट जाते थे।

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: Green Man of U.P: प्रदीप डाहलिया मुफ़्त में देते हैं पौधे, लेकिन पूरी करनी होती है ये शर्त

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib: जहां हर तकलीफ़ का हल और दिल को सुकून मिलता है

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib सिर्फ़ एक इबादतगाह नहीं,...

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

Topics

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

पढ़ाई का ऐसा माहौल कि 18 किमी दूर से आते हैं स्टूडेंट्स: जानिए कश्मीर की Iqbal Library की कहानी

हर सुबह, समीना बीबी इकबाल लाइब्रेरी-कम-स्टडी सेंटर (Iqbal Library)...

हुनर की मिसाल बने बबलू कुमार, PM Vishwakarma मंच पर बढ़ाया बिहार का गौरव

बिहार के गया ज़िले के रहने वाले बबलू कुमार...

Related Articles

Popular Categories