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शगुफ्ता हनाफी: एक लड़की जिसने मुश्किलों को मात देकर बनाई नई पहचान

एक बीमार और शर्मीली लड़की जिसे ठीक से बोलना नहीं आता था, वो आज एक वक्ता, कहानीकार और बेस्ट फ्रेंड्स सोसाइटी एनजीओ की सह संस्थापक है। नाम है शगुफ्ता हनाफी जो आज समाज सेवा कर ज़रूरतमंदों की मदद कर रही हैं। शगुफ्ता हनाफी कोलकाता में शिक्षा के जरिए सशक्तिकरण पर काम कर रही है।

शगुफ्ता आज जिस मुकाम पर है वहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने आवाज़ द वॉयस को बताया कि, ‘‘हम कहते हैं कि भगवान का इशारा अलग होता है, शायद अगर कोई इंसान शुरुआती जीवन में अच्छा नहीं करता। तो शायद बाद में वह कुछ अच्छा करेगा। मैं शुरू से ही बहुत बीमार बच्ची थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत लाड़-प्यार मिलता था।”

शगुफ्ता ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए हमेशा आगे रहती है। उन्होंने केरल के एर्नाकुलम में आए चक्रवात अम्फान के दौरान टीम के साथ 400 लोगों के एक गांव में भोजन उपलब्ध कराने में मदद की थी।

अक्टूबर 2020 में, फोन-ए-फ्रेंड अभियान ने उनकी ज़िदगी को कई लोगों के लिए खोल दिया था। शगुफ्ता लोगों की फोन पर बातें सुनती और उन्हे सलाह देती थीं। उन्हे रोज़ रात, 65 या 70 साल के वरिष्ठ नागरिकों, युवा लड़कियों और युवा लड़कों के कॉल आते थे।

2020 से पिछले पांच सालों में, उन्होंने हर जगह छोटे-छोटे केंद्र खोले हैं। हर केंद्र में लगभग 20 या उससे ज्यादा लोगों के साथ काम किया है। 23 अनाथ बच्चों को गोद लिया है और वरिष्ठ नागरिकों, शिक्षकों और दिहाड़ी मजदूरों को गोद लिया। जिनकी संख्या 70 से ज़्यादा है। हर महीने उन्हें जरूरतमंद सामान भेजते हैं। शगुफ्ता का सपना है कि वो पश्चिम बंगाल के नक्शे को कवर करें।

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