Friday, October 16, 2026
21.2 C
Delhi

रेड कॉरिडोर से वापसी का रास्ता

सालों तक, दक्षिण बस्तर के जंगलों में रहने वाले लोग उसका नाम लेने से भी बचते थे। माओवादी आंदोलन के गढ़ में, पापा राव उनकी ताकत का प्रतीक था। किसी गांव में उसकी मौजूदगी से ये तय होता था कि किससे पूछताछ होगी, किसे सज़ा मिलेगी और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, कौन हमेशा पुलिस मुखबिर होने के शक के साये में रहेगा। डर ही उसका सबसे बड़ा हथियार था। लेकिन आज, वह डर दूसरी तरफ़ चला गया है।

पापा राव को अब सुरक्षा बलों के पीछा करने का डर नहीं है। इसके उलट, जो लोग उसकी सुरक्षा कर रहे हैं, वे वही पुलिस और पैरामिलिट्री फ़ोर्स हैं जिनसे उसने सालों तक लड़ाई लड़ी थी।

ये बदलाव इसलिए नहीं आया है कि अतीत को भुला दिया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस अतीत के नतीजों से बचा नहीं जा सकता।

जो ग्रामीण कभी माओवादी प्रभाव में रहते थे, उन्होंने उसे माफ़ नहीं किया है। पंचायत के सदस्य भूमिगत आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर उसके प्रति गहरी नाराज़गी रखते हैं। सुरक्षा अधिकारी मानते हैं कि सुरक्षा के बिना, उसकी जान को खतरा पुलिस से नहीं, बल्कि उन लोगों से होगा जो मानते हैं कि उन्हें कभी न्याय नहीं मिला। उनका कहना है कि कई पीड़ित आम ग्रामीण थे जिन पर पुलिस मुखबिर होने का झूठा आरोप लगाया गया था। कुछ तो किशोर थे। ऐसे आरोप दुनिया भर में विद्रोहों का एक काला पहलू रहे हैं, जहाँ शक अक्सर हिंसा को बढ़ावा देता है।

इसके जवाब में, प्रशासन ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। अधिकारियों ने गांव के नेताओं से बात की है और उनसे बदला न लेने की अपील की है। उनका संदेश साफ़ है: जब कोई विद्रोही औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करता है, तो उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार की हो जाती है। कोई इस नीति से सहमत हो या न हो, यह पुनर्वास के एक अहम सिद्धांत को दिखाता है कि हथियार डालने वालों से किए गए वादों को पूरा किया जाना चाहिए, ताकि दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

पूर्व सीनियर माओवादी कमांडर पापा राव ‘रेड कॉरिडोर’ छोड़ने के बाद तस्वीर खिंचवाते हुए; यह उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

माओवादी संगठन में पापा राव का आगे बढ़ना लगातार तरक्की वाला रहा। उसने अपने करियर की शुरुआत एरिया कमेटी के सदस्य के तौर पर की और बाद में 2025 में साउथ सब-ज़ोनल कमांडर के पद तक पहुँचा। सुरक्षा एजेंसियाँ सालों से कानून लागू करने वाली एजेंसियों, जैसे सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) और बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF) पर हुए कई हमलों में उसकी अहम भूमिका मानती हैं। इन ऑपरेशनों में कुल मिलाकर सौ से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए।

हालांकि, 2026 की शुरुआत तक, जिस संगठन के लिए उसने अपनी ज़िंदगी समर्पित कर दी थी, वह अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहा था। लगातार कई महीनों तक चले उग्रवाद-विरोधी अभियानों ने माओवादी गुटों के लिए काम करने की जगह को काफी कम कर दिया था। हत्या, गिरफ्तारी और सरेंडर जैसे तरीकों से उनके सीनियर नेताओं को खत्म किया जा रहा था। अलग-अलग यूनिट्स के बीच बातचीत करना मुश्किल हो गया था और संगठन के लोगों में अनिश्चितता फैल गई थी। जिस भरोसे ने कभी इस आंदोलन को बनाए रखा था, उसकी जगह अब इसके लंबे समय तक चलने को लेकर शक ने ले ली थी।

ऐसे मुश्किल हालात में, 24 मार्च 2026 को पापा राव और 18 अन्य माओवादियों ने सरेंडर कर दिया। सुरक्षा अधिकारियों की नज़र में यह घटना हाल के सालों में उग्रवाद के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक है। इसके तुरंत असर के अलावा, इसने माओवादी कैडर्स को यह संदेश भी दिया कि अनुभवी कमांडरों को भी अब यह भरोसा नहीं रहा कि आंदोलन लंबे समय तक चल पाएगा। बाद के महीनों में, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग ज़िलों में और भी कैडर्स ने सरेंडर किया।

पुनर्वास प्रक्रिया के तहत, सरकार पापा राव पर कड़ी नज़र रख रही है। हालांकि वह अपने ऊपर घोषित ₹25 लाख का इनाम और अपनी AK-47 राइफल सरेंडर करने के लिए ₹3 लाख पाने के हकदार हैं, लेकिन ये फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह पुनर्वास के नियमों का लगातार पालन करते रहें। अधिकारी उन्हें पूरी तरह से पुनर्वासित मानने से पहले उनके व्यवहार पर नज़र रखना चाहते हैं।

यह बात ज़ोर देकर कहना ज़रूरी है कि उनके सरेंडर को अपराधों से मुक्ति या माफ़ी नहीं समझा जाना चाहिए। सरेंडर करने से पीड़ितों की तकलीफ़ या अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों का दुख खत्म नहीं हो जाता। इसके अलावा, इससे अंडरग्राउंड रहने के दौरान की गई हिंसा के आरोप भी खत्म नहीं होते। वे यादें उन गांवों में गहराई से बसी हुई हैं जहां संघर्ष हुआ था।

हालांकि, उनके सरेंडर का महत्व किसी एक कमांडर के भविष्य से कहीं ज़्यादा है। यह एक ऐसे संघर्ष को दिखाता है जो एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है,एक ऐसा चरण जहां डर के दम पर चलने वाला दबदबा कम हो रहा है, जहां कभी अपनी शर्तें मनवाने वाले कमांडर अब सशस्त्र संघर्ष के बजाय बातचीत का रास्ता चुन रहे हैं, और जहां सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ़ उग्रवाद को हराना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना भी है कि जो लोग इसे छोड़ रहे हैं, उन्हें कभी वापस लौटने के लिए मजबूर न होना पड़े।

फिलहाल, पापा राव की ज़िंदगी एक ऐसी सच्चाई से गुज़र रही है जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। जो व्यक्ति कभी दूसरों में डर पैदा करता था, वह अब इसलिए ज़िंदा है क्योंकि दूसरे लोग उसे डर से बचा रहे हैं।

ये भी पढ़ें:  जब Famous Italian shoemaker ने बनाए महारानी के लिए हीरे-पन्ना से जड़े जूते,इंदिरा देवी का फैशन आज भी बेनज़ीर

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

Bhaavna Arora
Bhaavna Arora
भावना अरोड़ा एक बेस्टसेलिंग लेखिका हैं, जो बरसों की डीप रीसर्च को प्रभावशाली मानवीय कहानियों में बदलने के लिए जानी जाती हैं। उनके काम में संघर्ष को सिर्फ़ लड़ाइयों के ज़रिए नहीं, बल्कि उन लोगों की ज़िंदगी, उनके त्याग और उनके हौसले के ज़रिए दिखाया जाता है जो इसे झेलते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

Topics

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

मुजतबा हुसैन: हंसी के पीछे छुपी सच्चाई का बेमिसाल क़लमकार

उर्दू अदब में तंज़-ओ-मज़ाह की बात हो और मुजतबा...

Balbir Singh Senior: भारतीय हॉकी को गोल्ड की राह दिखाने वाले

भारतीय हॉकी के इतिहास में जब भी बड़े खिलाड़ियों...

Related Articles

Popular Categories