Friday, October 9, 2026
32 C
Delhi

पंडित नैनसिंह रावत और तिब्बत का नक्शा

उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के सुदूर सीमान्त कस्बे मुनस्यारी से शुरू होने वाली जोहार घाटी के कोई दर्ज़नभर गांवों में रहने वाले अर्द्ध-घुमन्तू, पशुचारक, व्यापारी शौका समुदाय के लोग शताब्दियों से तिब्बत के साथ व्यापार करते रहे थे। इसी जोहार घाटी के आख़िरी गांव मिलम में 1830 में जन्मे नैनसिंह रावत लड़कपन से ही अपने परिवार के बड़े-बूढ़ों के साथ व्यापार के सिलसिले में कई बार तिब्बत जा चुके थे।

1855 में जर्मनी के विश्वविख्यात भूगोलशास्त्री बैरन हम्बोल्ट ने अडोल्फ़ और रॉबर्ट श्लागिनवाईट नामक दो प्रतिभाशाली भाइयों को भारत भेजा था ताकि वे सर्वे ऑफ़ इण्डिया की सहायता से तिब्बत का भौगोलिक सर्वेक्षण कर सकने का कोई रास्ता निकाल सकें। उस समय तक तिब्बत सारे संसार के लिए अदेखी-अनजानी पहेली जैसा था। अनेक संयोगों के चलते श्लागिनवाईट भाइयों ने अपने शुरुआती शोधकार्य के लिए नैनसिंह और उनके दो चचेरे भाइयों, किशन सिंह और मान सिंह, की सेवाएं लीं. दुर्गम हिमालय की वैज्ञानिक मैपिंग करने का यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट था।

शोध की समाप्ति के बाद 1863 तक नैनसिंह रावत मिलम गाँव के वर्नाक्युलर स्कूल में हैडमास्टर नियुक्त किये गए। उनके जीवन में अगला बड़ा मोड़ उसी वर्ष आया जब उनके पिछले कार्य से प्रभावित होकर देहरादून के ग्रेट ट्रिगोनोमैट्रिकल सर्वे दफ्तर से उन्हें और उनके चचेरे भाई मानी सिंह को दो साल की ट्रेनिंग के लिए बुलावा आया। इन वर्षों में उन्हें तमाम वैज्ञानिक उपकरणों से परिचित करवाने के साथ साथ अजनबी जगहों में भौगोलिक शोध करने में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी बतलाया गया।

अति प्रतिभाशाली नैनसिंह ने सब कुछ जल्दी-जल्दी सीख लिया। इसके अलावा अपने गांव-इलाके में बिताये चरवाहा-जीवन के लम्बे अनुभव से वे सभी प्रमुख नक्षत्रों और तारामंडलों और उनकी गति को अच्छी तरह समझते-जानते थे। देहरादून में उनके प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तिब्बती लामाओं द्वारा मंत्रोच्चार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली माला को दूरी नापने के उपकरण के रूप में काम लाने का तरीका सिखाया गया। पारम्परिक माला में 108 मनके होते हैं. इन दो भाइयों के लिए बनाई गयी माला में 100 मनके डाले गए। सौ कदम गिनने के बाद अगले मनके पर उंगलियां फेरी जानी होती थीं। सो माला का एक चक्र पूरा होने का मतलब होता था दस हज़ार कदम की दूरी। साढ़े इकतीस इंच का एक कदम माना जाता था और इस लिहाज़ से एक मील करीब 2000 कदमों का होता था।

इस ट्रेनिंग के बाद दोनों भाई तिब्बत के सर्वेक्षण के लिए निकले जहाँ उन्होंने कभी व्यापारी का तो कभी भिक्षुक का भेस धरा। 1865-66 में नैनसिंह ने काठमांडू से ल्हासा तक की 1200 किलोमीटर की यात्रा की और वहां से मानसरोवर होते हुए वापस भारत पहुंचे। यह उनके बेहद अर्थवान जीवन की अनीक महत्वपूर्ण यात्राओं की शुरुआत थी।

तिब्बत के सुदूरतम इलाकों की वैज्ञानिक मैपिंग का यह पहला कार्य था। उसके बाद के कोई डेढ़ दशक की उनकी यात्राओं के विवरण पढ़े जाएं तो पता चलता है वे अनेक महत्वपूर्ण भौगोलिक मिशनों का हिस्सा बनकर सतलुज और सिंध नदी के उद्गम स्थलों से लेकर लेह, लदाख, असम, बंगाल और भूटान जैसी जगहों तक पहुंचे। इस दौरान उन्हें एक बार अठारह दिन जेल में बंद भी कर दिया गया। ल्हासा और मानसरोवर का पहला आधिकारिक नक्शा भी उन्होंने ही तैयार किया था।

रायल ज्योग्राफिकल सोसायटी ने 1877 में उनके कार्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्हें सोसायटी का सबसे सम्मानित स्वर्ण पदक दिया जिसे पाने वाले वे पहले भारतीय थे। उनके सम्मानपत्र में लिखा गया था – ” तिब्बत और ऊपरी ब्रह्मपुत्र के प्रदेशों में संपन्न उनकी असाधारण यात्राओं और सर्वेक्षणों के लिए, जिनके परिणामस्वरूप ल्हासा की भौगोलिक स्थिति का सटीक निर्धारण हुआ और एशिया के भूगोल तथा मानचित्रण संबंधी ज्ञान में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ।”

पेरिस ज्योग्राफिकल सोसायटी ने भी उनका सम्मान किया। उनके ज्ञान और अनुभव की विषदता ने उन्हें पंडित की उपाधि भी दिलाई। यह नैनसिंह रावत थे जिन्होंने पहली बार ल्हासा की समुद्र तल से ऊंचाई और अक्षांश-देशांतर जैसे विवरण नापे। अपनी अंतिम आधिकारिक यात्रा में में वे 1874-75 में लद्दाख से ल्हासा और वहां से असम तक गए। इस दौरान उन्होंने कई ऐसे इलाके भी पार किये जहां तब तक कोई मनुष्य नहीं पहुंचा था। एक अतीव दुर्गम गांव में पैदा हुए इस असाधारण व्यक्ति ने भौगोलिक अनुसंधान और मैपिंग के क्षेत्र में जो कार्य किया उसे आज तक दुनिया भर में मील का पत्थर माना जाता है। 1 फरवरी 1895 में उनका देहांत हुआ।

पंडित नैनसिंह रावत का पैतृक गाँव मिलम आज तकरीबन उजाड़ हो चुका है। मिलम तक सड़क बनाने का सरकारी कार्य पिछले तीन-चार दशकों से चल रहा है। जेसीबी-बुलडोज़र की सहायता से टुकड़ों-टुकड़ों में किये जा रहे उस काम को पूरा होने में ठीक-ठीक कितना समय लगेगा, कहना मुश्किल है। अभी तो मुनस्यारी नगर में ही काम पूरा नहीं हुआ है।

इस महान यात्री-अन्वेषक और भूगोलशास्त्री के बारे में और पढ़ना चाहें तो अनेक किताबें उपलब्ध हैं जिन्हें इंटरनेट पर आराम से सर्च किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें- चौमहल्ला पैलेस: हैदराबाद की शान, निज़ामों की विरासत

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते है।

Ashok Pande
Ashok Pandehttp://kabaadkhaana.blogspot.com
अशोक पांडे चर्चित कवि, चित्रकार और अनुवादक हैं। उनका प्रकाशित उपन्यास ‘लपूझन्ना’ काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा है। पहला कविता संग्रह ‘देखता हूं सपने’ 1992 में प्रकाशित। जितनी मिट्टी उतना सोना, तारीख़ में औरत, बब्बन कार्बोनेट अन्य बहुचर्चित किताबें। कबाड़खाना नाम से ब्लॉग kabaadkhaana.blogspot.com। अभी हल्द्वानी, उत्तराखंड में निवास।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

मुरादाबाद: पीतल की महक, हुनर की चमक, विरासत की अनमोल दास्तान

उत्तर प्रदेश का शहर मुरादाबाद (The city of Moradabad...

Syed Waris Shah: पंजाबी शायरी का शहंशाह

पंजाबी साहित्य के इतिहास में अगर किसी एक शायर...

Sri Akal Takht Sahib! भक्ति-शक्ति, मीरी-पीरी और स्वतंत्र सिख सोच का पवित्र केंद्र

श्री अमृतसर की पाक ज़मीन पर, सचखंड श्री हरमंदिर...

मिर्ज़ा हादी रुस्वा: लखनऊ की ढलती तहज़ीब का आईना 

मिर्ज़ा मुहम्मद हादी, जो अदब में रुस्वा तख़ल्लुस से...

Topics

मुरादाबाद: पीतल की महक, हुनर की चमक, विरासत की अनमोल दास्तान

उत्तर प्रदेश का शहर मुरादाबाद (The city of Moradabad...

Syed Waris Shah: पंजाबी शायरी का शहंशाह

पंजाबी साहित्य के इतिहास में अगर किसी एक शायर...

Sri Akal Takht Sahib! भक्ति-शक्ति, मीरी-पीरी और स्वतंत्र सिख सोच का पवित्र केंद्र

श्री अमृतसर की पाक ज़मीन पर, सचखंड श्री हरमंदिर...

मिर्ज़ा हादी रुस्वा: लखनऊ की ढलती तहज़ीब का आईना 

मिर्ज़ा मुहम्मद हादी, जो अदब में रुस्वा तख़ल्लुस से...

वाजिद अली शाह: अवध के आख़िरी बादशाह और अदब के सरपरस्त

अवध के आख़िरी बादशाह वाजिद अली शाह की शख़्सियत...

पंज तख़्त: सिख इतिहास, अस्मिता और सामूहिक सत्ता के पांच ध्रुव

फ़ारसी के तख़्त का अर्थ है सिंहासन अर्थात सत्ता...

Related Articles

Popular Categories