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जम्मू-कश्मीर की संस्कृति में कौमी एकता का दीदार

जम्मू-कश्मीर दुनियाभर में अपनी ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां बर्फ से ढके पहाड़, कल-कल करती नदियां, ख़ूबसूरत झरने, मेवों के बाग और घास के दूर-दूर तक फैले मैदान मशहूर हैं। कश्मीर की ख़ूबसूरती में चार चांद लगाने में मुग़ल बादशाहों ने भी अहम भूमिका निभाई है।

गर्मियों में जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर का शालीमार बाग़ अपनी बेमिसाल ख़ूबसूरती के लिए मशहूर है। ये श्रीनगर रूपी ताज में कोहिनूर की मानिन्द है. इसे मुग़ल बादशाह जहांगीर ने अपनी प्रिय बेगम मेहरुन्निसा यानी नूरजहां के लिए 1619 में डल झील के क़रीब बनवाया था। 

कश्मीर में कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें अमरनाथ गुफ़ा, कटरा का वैष्णो देवी मन्दिर, श्रीनगर का छठी पातशाही गुरुद्वारा, हज़रत बल दरगाह और चरार शरीफ़ शामिल है। श्रीनगर में डल झील के किनारे स्थित इस दरगाह को हज़रत बल मस्जिद, अस्सार-ए-शरीफ़ और मादिनात-ऊस-सेनी आदि नामों से जाना जाता है।

यहां अमूमन सभी मज़हबों के लोग रहते हैं, इसलिए यहां सभी तीज-त्यौहार बड़े हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। इसके अलावा शिकारा महोत्सव, केसर महोत्सव और ट्यूलिप महोत्सव आदि आयोजन भी धूमधाम से होते हैं। सभी आयोजनों में कश्मीरी संस्कृति की झलक दिखाई देती है। ये महोत्सव कश्मीरी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के संवाहक भी हैं।

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