भारत में एक ऐसी जगह है जो देखने में मंगल ग्रह (Mars) जैसी लगती है लेकिन यहां पानी बहता है,और वो भी एक प्राचीन भूलभुलैया (labyrinth) के अंदर। जी हां, हम बात कर रहे हैं मेघालय के साउथ गारो हिल्स (South Garo Hills of Meghalaya) में बसे सिजू गुफा (Siju Caves) की। ये वही गुफा है जिसे एक ज़माने में भारत की सबसे लंबी गुफा होने का गौरव मिला हुआ था।
शिलांग से सिजू तक: एक ख़ूबसूरत सफ़र
मेघालय की राजधानी शिलांग (Shillong, the capital of Meghalaya) जहां ठंडी हवाएं, कोहरे से लिपटी पहाड़ियां और शहर की रौनक है।यहां से सिजू गुफा तक का रास्ता करीब 250 किलोमीटर दूर है।जब आप शिलांग से सिजू तक का सफर करेंगे तब आपके रास्ते में हरी-भरी पहाड़ियां,घने जंगल और छोटे-छोटे गांव देखने को मिलेंगे।बीच-बीच में झरने चांदी के धागों की तरह चमकते हुए दिखाई देखें।

एक ऐसा दरवाज़ा जो दूसरी दुनिया में ले जाता है
गुफा का मेन गेट देखते ही आप हैरान रह जाएंगे। ऊंचा पत्थर का मेहराब, जिस पर लताएं और काई (moss) चढ़ी हुई नज़र आती हैं। ऐसा लगता है जैसे कोई प्राचीन दरवाज़ा खुलने वाला हो। पानी की बूंदों से चमकता ये दरवाज़ा आपको अंदर बुलाता है।
गुफा के अंदर का जहां: रोशनी और अंधेरे का संगम
गुफा के अंदर कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप धरती के दिल (earth’s heart) में उतर गए हों। हवा ठंडी और बाहर की रोशनी गायब हो जाती है। आप सिर्फ़ अपने हेडलैम्प की हल्की रोशनी में आगे बढ़ते हैं। स्टैलेक्टाइट्स (stalactites) झूमरों की तरह लटकते नज़र आएंगे। स्टैलेग्माइट्स (stalagmites) ज़मीन से उठे हुए ये सब सदियों की बूंद-बूंद का नतीजा है। पानी के बहने की आवाज़ और चमगादड़ों (bats) के पंखों की फड़फड़ाहट गुफा को एक अलौकिक (otherworldly) एहसास देती है।

गुफा के अंदर छिपे हुए तालाब, छोटे झरने, और अनोखी पत्थर की आकृतियां नज़र आती हैं। गुफा में लगभग 100 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें एक दुर्लभ गुफा-निवासी झींगा (cave-dwelling shrimp) और एक ख़ास तरह का घोंघा (snail) शामिल है, जो हाल ही में खोजा गया है।
चमगादड़ों का शहर: जहां हज़ारों आंखें चमकती हैं
सिजू गुफा को ‘Bat Cave’ (चमगादड़ों की गुफा) भी कहा जाता है। हिप्पोसाइडरोस लार्वेटस (Hipposideros larvatus) नाम की प्रजाति यहां आम है। यहांं अचानक से गूंजती हुई आवाज़ और एक तीखी गंध पूरी गुफा को भर देती है। जिसे रोमांच अलग ही लेवल पर होता है।
विज्ञान की नज़र से: करोड़ों सालों की कहानी
क्या आप जानते हैं कि सिजू गुफा का इतिहास इओसीन काल (Eocene period) से जुड़ा है? उस वक्त गारो हिल्स समुद्र के अंदर डूबा हुआ था। लाखों सालों में, पानी ने चूना-पत्थर (limestone) को काटकर यह सुरंगें बनाईं।

1981 तक सिजू गुफा भारत की सबसे लंबी गुफा थी, जिसकी लंबाई 1,200 मीटर थी। बाद में खोजों ने इसे 4,772 मीटर (15,656 फीट) तक मापा, और आज ये भारत की 14वीं सबसे लंबी गुफा है। वैज्ञानिक आज भी यहां चमगादड़ों, फंगस (fungi) और कीड़ों की स्टडी करते हैं। मॉडर्न साइंस की तमाम तरक्की के बावजूद, इस गुफा के कई राज आज तक अनसुलझे हैं। ये एक जीवित प्रयोगशाला (Living Laboratory) है।
गुफा के आस-पास और भी ख़ूबसूरती
गुफा से बाहर डाबट वारी (Dabat Wari) है जो सिमसंग नदी (Simsang River) का एक शांत और खूबसूरत किनारा है। यहां बैठकर नदी की कल-कल सुनना और हरी-भरी वादियों को देखना मानों जन्नत (paradise) का एहसास दिलाता है।
ऐसा अनुभव जो दिल में बस जाता है
सिजू गुफा सिर्फ़ एक पर्यटन स्थल नहीं है, ये धरती का रहस्यमयी दस्तावेज़ है, वक्त की अनमोल निशानी है, और प्रकृति की करामात (Magic) है। हज़ारों चमगादड़ों से लेकर अनगिनत स्टैलेक्टाइट्स तक, यहां हर चीज़ कुछ न कुछ कहती है।
सिजू गुफा जहां अंधेरा रोशनी बन जाता है, और पत्थर ज़िंदा लगते हैं।
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