जालंधर ज़िले का तलहण गांव आज किसी तआरुफ़ का मोहताज नहीं है। इस तारीख़ी गांव में मौजूद धन-धन शहीद बाबा निहाल सिंह जी का पावन गुरुद्वारा साहिब, जिसे गुरुद्वारा तलहण साहिब के नाम से भी जाना जाता है, आज मुल्क और विदेशों से आने वाली संगत के लिए एक बड़ा रूहानी मरकज़ बन चुका है। यहां हर रोज़ हज़ारों की तादाद में श्रद्धालु माथा टेकने, अरदास करने और गुरु घर की बरकतें हासिल करने के लिए पहुंचते हैं।
हवाई जहाज़ चढ़ाने की रिवायत
इस गुरुद्वारा तलहण साहिब से एक बेहद ख़ास और अनोखी मान्यता जुड़ी हुई है। संगत का अटूट यक़ीन है कि जिन नौजवानों या श्रद्धालुओं का विदेश जाने का वीज़ा नहीं लग पाता, अगर वो यहां आकर सच्चे दिल से अरदास करते हैं और गुरु घर में खिलौना हवाई जहाज़ चढ़ाते हैं, तो उनकी विदेश जाने की मुराद पूरी हो जाती है। यही वजह है कि गुरुद्वारा तलहण साहिब ख़ासतौर पर विदेश जाने का ख़्वाब देखने वाले नौजवानों के बीच बेहद मशहूर है।

अखंड पाठ का सिलसिला और सालाना जोड़ मेला
गुरुद्वारा साहिब की रूहानी अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 47 अखंड पाठ साहिब का सिलसिला लगातार चलता रहता है। इसके अलावा, हर साल जेठ महीने के पहले इतवार को बाबा निहाल सिंह जी की याद में एक बड़ा सालाना जोड़ मेला आयोजित किया जाता है। इस मौके पर मुल्क के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से लाखों की तादाद में संगत पहुंचती है, माथा टेकती है और गुरु चरणों में अपनी हाज़िरी लगाकर आशीर्वाद हासिल करती है।
तपस्या और पवित्र ज्योत
शहीदी की अमर दास्तान को अपने सीने में समेटे ये गुरुद्वारा भक्ति और ताक़त की मिसाल माना जाता है। मान्यता है कि यहां बाबा हरनाम सिंह जी और बाबा निहाल सिंह जी ने लंबे समय तक कठिन तपस्या और प्रभु की इबादत की थी। गुरुद्वारा तलहण साहिब में जल रही पवित्र ज्योत को संगत अपने अटूट यक़ीन और आस्था की निशानी मानती है। संगत का मानना है कि इस ज्योत के सामने सच्चे दिल से की गई अरदास गुरु साहिब तक ज़रूर पहुंचती है और उनकी मेहर से मुरादें पूरी होती हैं।

संगत का तजुर्बा और अकीदत
गुरु घर आने वाले पुराने श्रद्धालु बताते हैं कि उन्होंने बचपन से इस पवित्र जगह को बहुत करीब से देखा है। उनका कहना है कि एक वक्त ऐसा भी था, जब ये गुरुद्वारा काफी छोटा हुआ करता था। लेकिन बाबा जी की मेहर और संगत की अकीदत की बदौलत आज ये जगह एक भव्य धार्मिक स्थल बन चुकी है। यही वजह है कि हर इतवार और दूसरे ख़ास मौकों पर यहां हज़ारों की तादाद में श्रद्धालु माथा टेकने और अरदास करने के लिए पहुंचते हैं।
ख़ास दिनों पर संगत की हाज़िरी
रविवार के अलावा हफ्ते के दो और दिन बुधवार और शुक्रवार, भी गुरुद्वारा साहिब में ख़ास रौनक रहती है। इन दिनों चल रहे अखंड पाठ साहिब का भोग डाला जाता है। हालांकि इतवार के मुकाबले इन दिनों संगत कुछ कम होती है, लेकिन श्रद्धालुओं की आमद लगातार बनी रहती है और बड़ी तादाद में लोग माथा टेकने और अरदास करने पहुंचते हैं।

गुरुद्वारा शहीद बाबा निहाल सिंह जी तलहण साहिब सिर्फ़ एक धार्मिक मुकाम नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीद, अकीदत और यक़ीन का मरकज़ है। संगत का मानना है कि यहां सच्चे दिल से की गई अरदास कभी खाली नहीं जाती। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पावन दरबार में हाज़िरी लगाकर अपनी मुरादों की दुआ मांगने आते हैं।
स्टोरी– गुरप्रीत सिंह
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