Sunday, July 19, 2026
34.6 C
Delhi

बासिर सुल्तान काज़मी: लफ़्ज़ों की नफ़ासत, ग़ज़लों की ख़ुशबू और उर्दू अदब की शानदार विरासत

बासिर सुल्तान काज़मी की पैदाइश 1953 में पाकिस्तान में हुयी। उन्होंने लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से अंग्रेज़ी की तालीम हासिल की और वहीं अंग्रेज़ी पढ़ाई भी। 1974 में कॉलेज के मशहूर अदबी रिसाले ‘रावी’ के एडिटर भी रहे।

साल 1990 में वह ब्रिटेन चले गए, जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से M.Ed और M.Phil की डिग्रियां हासिल की। इसी दौरान वह BBC Asian Programme में न्यूज़ एडिटर और न्यूज़ रीडर रहे। बाद में North West Arts Board में साहित्यिक सलाहकार के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने ब्रिटेन के कई स्कूलों, कॉलेजों और ब्रैडफोर्ड और चेस्टर यूनिवर्सिटी में अध्यापन किया।

बासिर सुल्तान काज़मी की शायरी और ड्रामों को अदबी हलकों में ख़ास मकाम हासिल है। उनका मजमूआ “शजर होने तक” (2015) काफी मकबूल हुआ, जिसमें उनकी चार शायरी की किताबें—”मौज-ए-ख़याल”, “चमन कोई भी हो”, “हवा-ए-तरब” और “चौंसठ खाने चौंसठ नज़्में” शामिल हैं। इसके अलावा उनका मशहूर ड्रामा “बिसात” और कई दूसरे ड्रामे भी शाया हो चुके हैं। उनकी कई किताबों और अशआर का अंग्रेज़ी में भी तर्जुमा हुआ है।

मिल उन से कभी जागते हैं जिन के मुक़द्दर,
तेरी तरह हर वक़्त वो सोए नहीं होते।

बासिर सुल्तान काज़मी, मशहूर उर्दू शायर नासिर काज़मी के बेटे हैं। उन्होंने अपने वालिद की ज़िंदगी और शायरी पर भी अहम तहरीरें लिखीं, जो उर्दू अदब के लिए क़ीमती दस्तावेज़ मानी जाती हैं।

रुक गया हाथ तिरा क्यों ‘बासिर’,
कोई कांटा तो न था फूलों में।

मशहूर शायरा देबजानी चटर्जी MBE के मुताबिक, “बासिर सुल्तान काज़मी की शायरी अपनी नफ़ासत, खूबसूरत तर्ज़-ए-बयान और दिलकश तसव्वुरात की वजह से अलग पहचान रखती है। उनकी शायरी उर्दू रिवायत से जुड़ी हुई है, लेकिन दुनिया के अदब से भी गहरा रिश्ता रखती है।”

   
गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी
वो बात अपनी जगह है, ये बात अपनी जगह।

बासिर सुल्तान काज़मी की शायरी सादगी, मोहब्बत, एहसास और ज़िंदगी के नर्म जज़्बात की तरजुमान है। उनके अशआर आसान अल्फ़ाज़ में दिल की गहराइयों को बयान करते हैं, यही वजह है कि आज भी दुनिया भर के उर्दू अदब के चाहने वाले उन्हें बड़ी मोहब्बत से पढ़ते हैं।

ये भी पढ़ें: क़मर जलालाबादी: जिनकी क़लम से निकले सदाबहार नग़मे 

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

पसमांदा प्रतिनिधित्व का उदय: भारतीय मुस्लिम राजनीति का एक नया अध्याय

इतिहास स्वयं अपनी घोषणा नहीं करता। वह धीरे-धीरे आकार...

इमदाद इमाम असर: उर्दू अदब के आलिम, नाक़िद और दानिशवर शख़्सियत

उर्दू अदब की तारीख़ में इमदाद इमाम असर का...

Topics

पसमांदा प्रतिनिधित्व का उदय: भारतीय मुस्लिम राजनीति का एक नया अध्याय

इतिहास स्वयं अपनी घोषणा नहीं करता। वह धीरे-धीरे आकार...

इमदाद इमाम असर: उर्दू अदब के आलिम, नाक़िद और दानिशवर शख़्सियत

उर्दू अदब की तारीख़ में इमदाद इमाम असर का...

ज़िया फ़तेहाबादी: सादगी, मोहब्बत और उर्दू अदब का एक दरख़्शां सितारा 

उर्दू अदब की दुनिया में ज़िया फ़तेहाबादी का नाम...

अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा से वैश्विक रणनीति को आकार

अमेरिका की विशिष्ट सैन्य शिक्षा प्रणाली के भीतर, अधिकारी...

Related Articles

Popular Categories