रांची के फेडरेशन कप में शनिवार की शाम सिर्फ़ एक रेस नहीं हो रही थी, बल्कि भारतीय athletics का एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। स्टेडियम में मौजूद हर शख़्स की निगाह 100 मीटर की उस रेस पर टिकी थी, जहां दो युवा sprinters Gurindervir Singh और अनीमेष कुजूर लगातार एक-दूसरे को चुनौती दे रहे थे। पिछले 24 घंटों में नेशनल रिकॉर्ड दो बार टूट चुका था। पहले Gurindervir Singh ने 10.17 सेकंड दौड़कर नया रिकॉर्ड बनाया, फिर अनीमेष ने 10.15 सेकंड के साथ उसे पीछे छोड़ दिया। लेकिन फाइनल में जो हुआ, उसने तस्वीर ही बदल दी।
जैसे ही रेस शुरू हुई, Gurindervir Singh की रफ़्तार बाकी रनर्स से अलग दिखाई दे रही थी। कुछ ही सेकंड बाद घड़ी पर 10.09 सेकंड हुए और पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। भारत को उसका सबसे तेज़ धावक मिल चुका था। Gurindervir Singh अब 10.10 सेकंड से कम समय में 100 मीटर दौड़ने वाले पहले भारतीय एथलीट बन चुके थे। लेकिन इस जीत की कहानी सिर्फ़ ट्रेक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सालों की मेहनत, संघर्ष और एक पिता की अनगिनत कुर्बानियां छुपी हुई हैं।
एक पिता, जिसने बेटे के सपने को अपना सपना बना लिया
पंजाब के पटियाल गांव में रहने वाले कमलजीत सिंह के लिए ये पल किसी सपने से कम नहीं था। रिटायर्ड ASI और पूर्व volleyball खिलाड़ी रहे कमलजीत सिंह ने अपने बेटे की रफ़्तार को बचपन में ही पहचान लिया था। उन्हें आज भी वो दिन याद है जब उन्होंने छोटे Gurindervir Singh को पहली बार मैदान में दौड़ते देखा था। उन्होंने तभी तय कर लिया था कि बेटे के सपने को पूरा करने के लिए चाहे जितनी मुश्किलें आएं, वो पीछे नहीं हटेंगे।

Gurindervir Singh का सफ़र आसान नहीं था। रोज़ घंटों बस में सफ़र करके प्रैक्टिस के लिए जाना और शाम को थककर लौटना उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका था। एक दिन उनके पिता ने 5 हज़ार रुपये की पुरानी स्कूटी खरीद कर दी थी। वो स्कूटी भले पुरानी थी, लेकिन उसमें एक पिता का भरोसा और बेटे के सपनों की ताक़त छुपी थी। बेहतर ट्रेनिंग और सुविधाओं के लिए परिवार ने गांव छोड़कर जालंधर शिफ्ट होने का फैसला किया। वहां भी पिता ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि बेटे को किसी तरह की तकलीफ़ न हो।
भारतीय तेज़ रफ़्तार दौड़ का बदलता चेहरा
एक समय था जब भारतीय sprinters 10.30 सेकंड के आसपास दौड़ते थे। 10.40 या 10.50 सेकंड का समय भी नेशनल लेवल पर मेडल दिलाने के लिए काफी माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 2022 में Amlan Borgohain ने पहली बार 10.25 सेकंड से नीचे दौड़कर भारतीय sprinting को नई दिशा दी। इसके बाद Manikanta Hoblidhar, Animesh Kujur और Gurindervir Singh जैसे युवा खिलाड़ी सामने आए, जिन्होंने रिकॉर्ड तोड़ने को जैसे आदत बना लिया।

Reliance Foundation के sprint programme के head coach जेम्स हिलियर मानते हैं कि Gurindervir Singh और अनीमेष की rivalry भारतीय sprinting की सबसे बड़ी ताक़त बन गई है। उनके मुताबिक,“Track पर दोनों एक-दूसरे को हराने के लिए पूरी जान लगा देते हैं, लेकिन बाहर दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं।”
हिलियर का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों में हुनर हमेशा से था, बस उन्हें सही ट्रेनिंग, डिसिप्लिन और आत्मविश्वास की ज़रूरत थी। अब जब 10.10 सेकंड का बैरियर टूट चुका है, तो आने वाले सालों में और बड़े रिकॉर्ड बनने की उम्मीद बढ़ गई है।
Gurindervir Singh की कहानी बताती है कि बड़े सपने सिर्फ़ टैलेंट से पूरे नहीं होते। उनके पीछे परिवार का भरोसा, कोच की मेहनत और रोज़ाना की छोटी-छोटी कुर्बानियां होती हैं। और शायद यही वजह है कि 10.09 सेकंड की ये दौड़ सिर्फ़ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय athletics के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
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