जम्मू-कश्मीर का बांदीपुरा, जहां हरमुख पर्वत की बुलंद चोटियां आसमान से बातें करती हैं और वादियों में कुदरत अपनी पूरी शान के साथ बिखरी नज़र आती है। हरे-भरे चरागाह, घने जंगल और ऐसे अनदेखे रास्ते, जो सालों तक दुनिया की नज़रों से दूर रहे। ये इलाका हमेशा से अपनी ख़ामोश ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब इसकी पहचान बदल रही है। इस बदलाव के पीछे का एक नाम है शबनम बशीर (Shabnam Bashir)। बांदीपुरा की इस ट्राइबल ट्रैकर ने अपने जुनून और मेहनत से उन छुपे हुए रास्तों को दुनिया से मिलाया है और कश्मीर के टूरिज़्म को एक नई दिशा दी।
ट्राइबल कम्युनिटी से निकलकर मिसाल बनी शबनम बशीर
शबनम बशीर (Shabnam Bashir) का ताल्लुक़ एक ट्राइबल कम्युनिटी से है, जहां आज भी कई इलाकों में लड़कियों के लिए घर से बाहर निकलना आसान नहीं होता। ऐसे माहौल में पहाड़ों, जंगलों और अनजान रास्तों पर अकेले निकलकर ट्रेकिंग करना अपने आप में एक बड़ी बात है। लेकिन शबनम बशीर (Shabnam Bashir) ने इन बंदिशों को अपने हौसले के आगे कभी आने नहीं दिया। वो कहती हैं कि ‘ये सफ़र आसान नहीं था, लेकिन उनके ख़्वाब उनसे बड़े थे।’ आज शबनम उन लड़कियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं, जो अपने सपनों को सच करना चाहती हैं।

बचपन का सपना और टूरिज़्म की पढ़ाई
शबनम बशीर (Shabnam Bashir) बताती हैं कि टूरिज़्म रिसर्च का ये सफ़र उनका बचपन का ख़्वाब रहा है। उन्हें शुरू से ही ट्रैवलिंग करना और नई जगहों को सर्च करना पसंद था। पहाड़, जंगल, चरागाह और वादियां उन्हें हमेशा अपनी ओर खींचती रहीं। उनके दिल में ये ख़्वाहिश थी कि वो सिर्फ़ घूमने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी कम्युनिटी के लिए कुछ बेहतर करें। इसी सोच के साथ उन्होंने टूरिज़्म की पढ़ाई की और अपने सपने को एक मक़सद में बदल दिया। यहीं से उनकी असली जर्नी शुरू हुई।
‘Unexplored Kashmir’: अनदेखे कश्मीर की दस्तावेज़ी कहानी
अपने काम को सही दिशा देने के लिए शबनम बशीर (Shabnam Bashir) ने ‘Unexplored Kashmir’ नाम से एक किताब लिखी। इस किताब का मक़सद उन अनएक्सप्लोर डेस्टिनेशन को सामने लाना था, जिनके बारे में न आम लोग जानते थे और न ही एडमिनिस्ट्रेशन। किताब के ज़रिए शबनम बशीर (Shabnam Bashir) ने उन हिडन जगहों को दस्तावेज़ किया, जो सालों से गुमनामी में थीं। अच्छी बात ये है कि जिन डेस्टिनेशंस को उन्होंने खोजा, वहां आज टूरिस्ट पहुंच रहे हैं और टूरिज़्म धीरे-धीरे रोशन हो रहा है।
‘Unexplored Kashmir’ सिर्फ़ एक ट्रैवल बुक नहीं है, बल्कि एक पूरा गाइड है। इसमें हर डेस्टिनेशन की लोकेशन, हेड क्वाटर से दूरी, वहां कैसे पहुंचा जाए और रुकने की क्या सुविधाएं हैं सब कुछ आसान भाषा में लिखा गया है। किताब का मक़सद यही है कि एक ही जगह पर पूरा डाटा मौजूद हो और एडमिनिस्ट्रेशन भी इन अनदेखी जगहों की तरफ ध्यान दे।

होमस्टे और लोकल इकॉनमी का मज़बूत रिश्ता
शबनम बशीर (Shabnam Bashir) ने सिर्फ़ बांदीपुरा ही नहीं, बल्कि उसके बाहर भी कई जगहों पर काम किया है। अगर बांदीपुरा की बात करें, तो नागमर्ग अब टूरिज़्म मैप पर आ चुका है। इन जगहों पर अब एडमिनिस्ट्रेशन का भी ध्यान जा रहा है। ये बदलाव इस बात का सबूत है कि अगर सही नीयत और मेहनत हो, तो किसी भी इलाके की तस्वीर बदली जा सकती है।
इन इलाकों में बड़े होटल नहीं हैं, इसलिए टूरिस्ट लोकल होमस्टे में रुकते हैं। वो वहीं का लोकल फूड खाते हैं और लोकल लोगों के साथ रहते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा ट्राइबल कम्युनिटी को हो रहा है। शबनम बशीर (Shabnam Bashir) ने अब तक करीब 16 डेस्टिनेशन को एक्सप्लोर कर चुकी हैं। वो मानती हैं कि हर जगह की जानकारी लोगों तक अलग-अलग पहुंचाना मुश्किल था, इसलिए किताब लिखना सबसे सही तरीका लगा।
शबनम बशीर (Shabnam Bashir) टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर होमस्टे की रजिस्ट्रेशन भी करवा रही हैं। इससे टूरिस्ट लोकल लोगों के घरों में रुकते हैं, लोकल इकॉनमी मजबूत होती है और नेचर भी सुरक्षित रहता है। उनका मानना है कि अगर टूरिज्म सही तरीके से बढ़े, तो नेचर को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाई जा सकती है।
सरकारी योजनाएं और ज़मीनी असर
शबनम बशीर (Shabnam Bashir) बताती हैं कि सरकार की हर स्कीम का मक़सद लोगों तक फायदा पहुंचाना होता है। हाल ही में आदि कर्मयोगी अभियान, जो ख़ासतौर पर ट्राइबल्स के लिए था, उसमें जम्मू-कश्मीर के चार ज़िलों को चुना गया। इनमें कश्मीर से बांदीपुरा शामिल था। इस स्कीम के तहत 31 ट्राइबल गांवों में काम किया गया। सबसे अच्छी बात ये रही कि एडमिनिस्ट्रेशन और स्थानीय लोगों के बीच का फासला कम हुआ। अधिकारी, सीनियर सिटीज़न और यूथ वालंटियर मिलकर गांव-गांव पहुंचे और लोगों से सीधे पूछा गया कि वो क्या चाहते हैं।

शबनम बशीर (Shabnam Bashir) का मानना है कि कश्मीर को अक्सर गुलमर्ग, सोनमर्ग और डल लेक तक ही सीमित समझ लिया जाता है, जबकि पूरा कश्मीर टूरिज़्म की जगहों से भरा हुआ है। ज़रूरत है इसे समझदारी से एक्सप्लोर करने की, ताकि नेचर भी बचे और लोगों की इकॉनमी भी मज़बूत हो।
सरकार, समाज और परिवार का साथ
जब भी शबनम बशीर (Shabnam Bashir) अपने आइडियाज़ लेकर सरकार के पास गईं, उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला। उन्होंने कई कैंप और इवेंट्स ऑर्गेनाइज्ड किए। शबनम बशीर (Shabnam Bashir) मानती हैं कि ख़ासकर एक लड़की के लिए फैमिली सपोर्ट बहुत ज़रूरी होता है। इस पूरे सफ़र में उन्हें अपनी फैमिली और समाज के कई लोगों का साथ मिला, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत दी। शबनम बशीर (Shabnam Bashir) की कहानी सिर्फ़ टूरिज़्म की नहीं, बल्कि हौसले, सोच और बदलाव की कहानी है। वो दिखाती हैं कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।
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