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जम्मू और कश्मीर की शाज़िया लतीफ़: वकालत से Emu फार्मिंग तक का सफ़र

साउथ कश्मीर के शोपियां ज़िले में सैयद शाज़िया लतीफ़, जो पेशे से वकील हैं, इनोवेटिव फार्मिंग कर रही हैं। पारंपरिक खेती के साथ उन्होंने Integrated Farming को अपनाया और पिछले तीन सालों से पक्षी पालन भी कर रही हैं। इंटरनेट पर रिसर्च करने के बाद उन्होंने टर्की और Emu जैसे विदेशी पक्षियों को अपने फार्म में शामिल किया। जिसकी कीमत लगभग 6 से 7 हज़ार रुपये होती है। उन्होंने दुनिया भर में मौजूद अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को अपने फार्म का हिस्सा बनाया, जिनमें से कई विदेशों से मंगवाए गए हैं।

शुतुरमुर्ग को दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि Emu दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी है? आकार और बनावट में ये काफी हद तक शुतुरमुर्ग जैसा दिखता है। Emu के पंख होते हैं, लेकिन ये उड़ नहीं सकते। हालांकि, तेज़ दौड़ने में ये माहिर होते हैं और एक कदम में लगभग 9 फीट की दूरी तय कर सकते हैं।

Emu फार्मिंग से मुनाफ़ा और बढ़ती लोकप्रियता

शाज़िया बताती हैं कि जब उन्होंने Emu को देखा, तो उन्हें लगा कि ये एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। उन्होंने इन्हें मंगवाया। अब उनके फार्म में 8 महीने के Emu मौजूद हैं, जिनका वज़न क़रीब 40 से 50 किलो तक हो सकता है। आमतौर पर मेल Emu फीमेल पक्षी से बड़े होते हैं। इन पक्षियों की देखभाल और पालन से उन्हें अच्छा मुनाफ़ा हो रहा हैं।

शुरुआत में जब गर्मियों में वो सेब की खेती करती, तो उसमें बचने वाले वेस्ट को पक्षियों को खिला देती थी। इससे खाद्य अपशिष्ट का सही उपयोग भी हो जाता है और पक्षियों को प्राकृतिक आहार भी मिलता है। उनके Emu और अन्य विदेशी पक्षी बाज़ार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं।

घर से ही सफल व्यवसाय की शुरुआत

शाज़िया का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को अच्छा व्यवसाय करने के लिए घर से बाहर जाने की ज़रूरत नहीं होती। अगर वो मेहनत और हिम्मत रखे तो घर से भी बिज़नेस किया जा सकता है। वो कभी बेरोज़गार थीं, लेकिन अब न केवल उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि 15 से 20 लोगों को रोज़गार दे रही हैं। उनके इस सफ़र में उनका पूरा परिवार उनका साथ देता है और सभी मिलकर इस फॉर्म को संभालते हैं।

Emu
शाज़िया Emu के साथ

विदेशी सब्ज़ियों और पशुपालन से बढ़ती आमदनी

अपने फार्म में शाज़िया सिर्फ पक्षी पालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने विदेशी सब्ज़ियों की खेती भी शुरू की है। इसके अलावा, उनके फार्म में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी, बत्तख, मछलियां और दूसरे पशु भी मौजूद हैं। पशुपालन से उन्हें ज़्यादा फ़ायदा मिलता है, जिससे उनका व्यवसाय और भी मज़बूत हो गया है।

Emu की विशेषताएं और महत्व

अगर Emu की बात करें, तो इसका वैज्ञानिक नाम Dromaius novaehollandiae है। ये आमतौर पर भूरे, ग्रे और काले रंग के होते हैं और उनकी आवाज़ काफ़ी दमदार होती है। शाज़िया का मानना है कि इन पक्षियों का पालन करना न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पारंपरिक खेती से हटकर एक नई राह अपनाने जैसा भी है।

Emu

शाज़िया लतीफ़ किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

शाज़िया लतीफ़ की ये पहल न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि वह अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल बन गई हैं। उनकी फार्मिंग तकनीकों को देखकर कई और किसान भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके खेत में कई तरह के पशु हैं, जिनमें उन्हें अतिरिक्त मुनाफ़ा होता है। शाज़िया लतीफ़ का यह इनोवेटिव फार्मिंग मॉडल आने वाले समय में कश्मीर के किसानों के लिए एक नई राह दिखा सकता है।

शाज़िया लतीफ़ ने यह साबित कर दिया है कि अगर इंसान मेहनत और लगन से काम करे, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो परंपरागत सोच से आगे बढ़कर कुछ नया करने का जज़्बा रखते हैं।

ये भी पढ़ें: कश्मीर की पहचान: Nooraari Crafts से महिलाओं की नई उड़ान

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