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कश्मीर की पहचान: Nooraari Crafts से महिलाओं की नई उड़ान

कश्मीर की हसीन वादियां अपनी ख़ूबसूरती के लिए मशहूर हैं, लेकिन यहां की बेमिसाल कढ़ाई भी अब देशभर में अपनी ख़ास पहचान बना रही है। सदियों पुरानी आरी वर्क़ कढ़ाई, जो कभी सिर्फ़ कश्मीर तक महदूद थी, अब देश के हर कोने में अपनी चमक बिखेर रही है। इस शानदार कढ़ाई को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय Nooraari Crafts को जाता है, जिसने कश्मीर की परंपरा और संस्कृति को फिर से ज़िंदा कर दिया है।

हुनर को नई पहचान

करीब 600 महिलाओं की रोज़ी-रोटी का सहारा बन चुका Nooraari Crafts इन महिलाओं को न सिर्फ़ आर्थिक रूप से सक्षम बना रहा है, बल्कि उनके हुनर को भी दुनिया तक पहुंचा रहा है। पहले, इन महिलाओं के पास हुनर तो था, लेकिन मौके नहीं थे। Nooraari Crafts ने इन्हें एक ऐसा मंच दिया, जहां वे अपने घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ अपने हुनर को भी संवार रही हैं।

अब यह कला सिर्फ़ कश्मीर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत के बाज़ारों में अपनी पहचान बना चुकी है। महिलाओं के हाथों से निकली यह ख़ूबसूरत कढ़ाई न केवल कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को बचा रही है, बल्कि हर टुकड़ा उनके जज़्बे और मेहनत की मिसाल पेश कर रहा है।

कारीगरों की सेहत का भी ख़्याल

Nooraari Crafts केवल महिलाओं के रोज़गार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और भलाई का भी पूरा ध्यान रखता है। कढ़ाई करते समय आंखों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है, जिससे कई महिलाओं को परेशानी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए कंपनी नियमित रूप से मुफ़्त आंखों की जांच करवाती है, जिससे कारीगर हमेशा सेहतमंद रहें और बिना किसी दिक्कत के काम कर सकें। महिलाओं को वर्कशॉप के ज़रिए रंगों और डिज़ाइनों के बारे में सिखाया जाता है, ताकि वो नए-नए डिज़ाइन बना सकें और अपने हुनर को और निखार सकें।

कंपनी से क्लस्टर तक का सफ़र

Nooraari Crafts की डायरेक्टर साहिबा ने DNN24 को बताया कि ये अब एक क्लस्टर कंपनी बन चुकी है, जिसमें 600 कारीगर काम कर रहे हैं। यहां काम करने वाले कई कारीगर यहीं से सीखे हुए हैं और अब क्राफ्ट मैनेजर के रूप में काम कर रहे हैं। उनका सपना है कि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को रोज़गार मिले और ये कला और आगे बढ़े। वो बताती हैं कि इस क्लस्टर ने महिलाओं को बहुत कुछ सिखाया है, जैसे माल की खरीद, सही रंगों का चयन, और नए डिज़ाइनों का निर्माण। Nooraari Crafts में कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं, जिनमें आरी सूट, शॉल, फैरन, पर्दे, कुशन कवर और बैग शामिल हैं।

कारीगरों की कहानी: जोज़िया की जुबानी

करीब सात सालों से Nooraari Crafts से जुड़ी कारीगर जोज़िया बताती हैं, “पहले मैं जहां काम करती थी, वहां मुझे यह भी नहीं पता था कि मेरा हुनर क्या है। जब मैं Nooraari से जुड़ी, तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे हाथों में कितना हुनर है और मैं क्या कर सकती हूं।” पहले जहां कारीगरों को कम पैसे मिलते थे और बहुत बारीक काम करना पड़ता था, अब Nooraari Crafts उन्हें पहले से ज़्यादा मेहनताना देती है और हल्का वर्क करवाकर उनके काम को आसान बनाती है। ये कंपनी सिर्फ़ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि कश्मीर की परंपरा को ज़िंदा रखने की एक कोशिश है, जो महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना रही है।

Nooraari Crafts: एक नई रोशनी की ओर

Nooraari Crafts उन हज़ारों महिलाओं की कहानी है, जिन्होंने अपने हुनर के दम पर अपनी ज़िंदगी बदली। यह केवल कढ़ाई नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और एक उज्जवल भविष्य की दिशा में बढ़ता कदम है। Nooraari Crafts से जुड़ी ये महिलाएं न सिर्फ़ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को भी संजो रही हैं।

ये भी पढ़ें: डॉ. साइमा पॉल का शानदार इनोवेशन: अब Tea Bags में फेमस कश्मीरी नून टी

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