Saturday, May 9, 2026
34.1 C
Delhi

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी : साहित्य का एक अनमोल सितारा

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी को गुज़रे करीब चार साल हो गए, लेकिन उनकी यादें और उनका साहित्यिक योगदान आज भी ताज़ा हैं। मीर तकी मीर पर उनके अध्ययन और विश्लेषण ने उर्दू साहित्य को एक नई दिशा दी। उनकी बेजोड़ याददाश्त और पढ़ने की अद्भुत गति ने उन्हें एक अलग पहचान दी। फारूक़ी साहब का व्यक्तित्व साहित्यिक गुणों से भरपूर था। उन्होंने न सिर्फ़ साहित्य को समझा, बल्कि उसे अपने अनोखे अंदाज़ में प्रस्तुत भी किया। वह किताबों में छिपी गलतियों को मिनटों में पकड़ लेते थे। एक बार उन्होंने एक शायर के दीवान को चंद मिनटों में पढ़कर उसमें मौजूद अच्छाई और कमियों को उजागर किया था।

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी का लेखन में नया आयाम

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग में उनके व्याख्यान आज भी याद किए जाते हैं। उनके द्वारा “कसीदा” और “ग़ज़ल” पर दी गई अनमोल जानकारी ने विद्यार्थियों और विद्वानों को नई सोच दी थी। उन्होंने “दास्तान” को मौखिक कथा के रूप में परिभाषित किया और इसकी गहराई को उजागर किया। फारूक़ी साहब का लेखन और उनके साहित्यिक दृष्टिकोण कई लेखकों और कवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। उन्होंने न केवल नए लेखकों को प्रोत्साहित किया बल्कि उनके कार्यों को एक नई पहचान भी दी।

उनकी मृत्यु से पहले भी, उनका साहित्य के प्रति जुनून कायम था। आखिरी दिनों में भी उन्होंने मीर और मोमिन जैसे महान कवियों की रचनाओं पर चर्चा की। उनके साहित्यिक योगदान और व्यक्तित्व को भुला पाना संभव नहीं। वह उर्दू साहित्य के अनमोल सितारे थे, जिनकी रोशनी हमेशा बनी रहेगी।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: ग़ज़लों की जान, मुशायरों की शान और उर्दू अदब राहत इंदौरी के नाम

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Topics

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Red Chief से RedTape तक: कैसे कानपुर बना भारत का लेदर सिकंदर

एक ज़माने में कानपुर की सड़कों पर अंग्रेजों की...

Related Articles

Popular Categories