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Inderjit Singh Bindra: पंजाब का वो बेटा जिसने Indian Cricket को नई दिशा दी, BCCI को बनाया शक्तिशाली

पंजाब के बेटे इंदरजीत सिंह बिंद्रा (Sardar Inderjit Singh Bindra), जिन्होंने भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) को एक नई दिशा दी, उन्हें किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। आधुनिक भारतीय क्रिकेट प्रशासन में एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में, बिंद्रा ने न केवल पंजाब क्रिकेट बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट इकोसिस्टम को आकार देने में भी निर्णायक भूमिका निभाई। 25 जनवरी 2026 को, भारतीय क्रिकेट प्रशासन (Indian cricket administration) की ये महान हस्ती दुनिया को अलविदा कह गई, और अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गई जिसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्पोर्ट्स बॉडीज़ में से एक में बदल दिया। अब ये चमकता सितारा हमारे बीच में नहीं हैं। 25 जनवरी 2026 को 84 साल की उम्र में इंदरजीत सिंह बिंद्रा इस दुनिया से रुख़सत हो गये हैं।

अपने पूरी लाइफ में, बिंद्रा ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया और लगातार क्रिकेट के बुनियादी ढांचे, शासन और वित्त को आधुनिक बनाने के लिए काम किया। उनके योगदान ने उस वैश्विक कद की नींव रखी जिसका भारतीय क्रिकेट आज आनंद ले रहा है।

पैदाइश और शुरुआती करियर

सरदार इंदरजीत सिंह बिंद्रा (Sardar Inderjit Singh Bindra) की पैदाइश 2 सितंबर 1942 को अमृतसर, पंजाब में हुई थी। एक प्रतिष्ठित सिविल सेवक, वो भारतीय प्रशासनिक सेवा (पंजाब कैडर) से थे। अपने नौकरशाही करियर के दौरान, उन्होंने लुधियाना और पटियाला के डिप्टी कमिश्नर के रूप में और बाद में भारत के राष्ट्रपति के विशेष सचिव के रूप में काम किया। जब उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में कदम रखा तो उनका प्रशासनिक अनुभव अमूल्य साबित हुआ।

पंजाब क्रिकेट में योगदान

पंजाब के एक गौरवशाली बेटे के रूप में, बिंद्रा ने राज्य के Cricket landscape को नया आकार देने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई। उन्होंने 1978 से 2014 तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो भारतीय क्रिकेट प्रशासन (Indian cricket administration) में सबसे लंबे कार्यकाल में से एक है।

उनके सबसे शानदार योगदानों में से एक मोहाली में PCA स्टेडियम का निर्माण था, जो 1993 में पूरा हुआ। इस स्टेडियम के साथ, मोहाली Global Cricket Map पर उभरा। अपनी आधुनिक सुविधाओं और उन्नत बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाने वाला ये स्टेडियम, साल 2011 से ICC क्रिकेट विश्व कप सेमीफाइनल सहित कई अंतर्राष्ट्रीय मैचों की मेज़बानी कर चुका है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराया था। इस मैच को भारत और पाकिस्तान दोनों के प्रधानमंत्रियों ने देखा था, जो स्टेडियम के वैश्विक महत्व को दिखाता है।

बिंद्रा के अपार योगदान को मान्यता देते हुए, अप्रैल 2015 में स्टेडियम का आधिकारिक तौर पर नाम बदलकर आई.एस बिंद्रा PCA स्टेडियम कर दिया गया।

भारतीय क्रिकेट में योगदान


बिंद्रा का प्रभाव पंजाब से कहीं आगे तक फैला हुआ था। उनके लगातार प्रयासों से, भारत ने 1987 में पहली बार क्रिकेट विश्व कप की सह-मेज़बानी की, जो पहली बार था जब ये टूर्नामेंट इंग्लैंड के बाहर आयोजित किया गया था। इस मील के पत्थर ने क्रिकेट के ग्लोबल सेंटर को उपमहाद्वीप की ओर शिफ्ट कर दिया।

बाद में उन्होंने BCCI के प्रेसिडेंट (1993–1997) के रूप में काम किया। इस दौरान, उन्होंने 1996 के ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप को ऑर्गनाइज़ करने में अहम भूमिका निभाई, जिसकी मेज़बानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर की थी। इस टूर्नामेंट ने उपमहाद्वीप को वर्ल्ड क्रिकेट के केंद्र के रूप में और मज़बूत किया।

BCCI की फाइनेंशियल पावर को मज़बूत करना

बिंद्रा के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक BCCI की फाइनेंशियल आज़ादी को मज़बूत करना था। 1990 के दशक की शुरुआत तक, दूरदर्शन का भारत के इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों के ब्रॉडकास्टिंग पर एकाधिकार था।

1994 में, बिंद्रा के नेतृत्व में, BCCI ने टेलीविज़न ब्रॉडकास्ट रेवेन्यू पर अपना अधिकार जताने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया। एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई के बाद, BCCI ने ये अधिकार हासिल कर लिए। इस फैसले ने भारतीय क्रिकेट की इकोनॉमी को मौलिक रूप से बदल दिया, कमर्शियल ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत की और BCCI को दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बना दिया।

इंटरनेशनल क्रिकेट में योगदान


बिंद्रा की हैसियत को दुनिया भर में तब पहचान मिली जब उन्हें 2010 से 2012 तक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) का प्रिंसिपल एडवाइज़र नियुक्त किया गया। इस दौरान, इंटरनेशनल क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन (International Cricket Administration) में भारत का प्रभाव और मज़बूत हुआ।

अंतिम विदाई


पंजाब की धरती पर जन्मे इंदरजीत सिंह बिंद्रा (Indrajeet Singh Bindra) ने अपना जीवन क्रिकेट को ऊपर उठाने के लिए समर्पित कर दिया। पंजाब के लोकल मैदानों से लेकर दुनिया के मंच तक। उनके विज़न, एडमिनिस्ट्रेटिव समझ और साहसिक फैसलों ने भारतीय क्रिकेट की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।

उनका निधन 25 जनवरी 2026 को 84 साल की उम्र में हो गया, लेकिन उनकी विरासत भारतीय क्रिकेट के स्ट्रक्चर, सिस्टम और ग्लोबल हैसियत में ज़िंदा है। आज भारतीय क्रिकेट उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व का सबूत है।

इस लेख को अंग्रेज़ी और पंजाबी में पढ़ें

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