हिंदुस्तान को रंगों का जन्नत कहा जाता है, लेकिन क्या आप इस हकीकत से वाकिफ हैं कि यहां के बाज़ार, मोहल्ले और यहां तक कि पूरे शहर एक खास रंग की शान में डूबे हैं? ये सिर्फ खूबसूरती का तमाशा नहीं है, ये इतिहास, बादशाहत, इनकार और सूफियाना फन का वो समंदर है, जिसमें उतरना हर सैलानी का ख्वाब होता है।
आइए, आपको ले चलते हैं हिंदुस्तान के छह ऐसे रंगीन शहरों के सफर पर, जहां हर नक्काशी और रंग आपकी रूह से बात करेगी।

जोधपुर: वो शहर जहां आसमान ज़मीन पर उतर आया
राजस्थान के बंजर रेगिस्तान को चीरता हुआ, मेहरानगढ़ किले की शानो-शौकत के नीचे जोधपुर एक अजीब सी नशीली सुबह की तरह बिछा है। यहां के नीले मकान किसी फरेब की तरह लगते हैं। ये ‘नीला रंग’ कोई बेमानी हुनर नहीं है।
यहां की तारीख को खंगालें तो पता चलता है कि यह रंग पहले उन घरों के लिए खास था जहां पंडित जैसे रूहानी लोग रहते थे, यानी ब्राह्मणों की मोहब्बत। वहीं दूसरी हकीकत ये है कि नीला रंग रेगिस्तान की तपश को ठुकराने वाली सियासत भी करता है। इसमें चूना मिला होता है, जो कीड़ों को दूर भगाता है और गर्मी में AC का एहसास देता है। तंग गलियों में टहलना जैसे किसी सपनों की नगरी में पैर रखना है।

जयपुर: याराना का रंग जो गुलाबी नहीं, समंदर है
जयपुर को देखो तो दिल करता है कि ये रंग किसी शायर ने रचा हो। सन 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स का स्वागत करने के लिए पूरे शहर को लाल गेरू से रंगा गया था। उस वक्त गुलाबी रंग मेहमाननवाजी की अलामत समझा जाता था।
लेकिन ध्यान रहे, ये ‘गुलाबी’ मॉडर्न वाली पिंक नहीं है। ये तो चूना, भुरकट और पके हुए मिट्टी के रंग का वो फ़न है जो सूरज ढलते ही सुनहरी नज़र आने लगता है। हवा महल के पन्नों से लेकर जंतर मंतर की रेखाओं तक, यह पिंक सल्तनत की तहजीब आपको मुरीद बना लेगी।

उदयपुर : चांदनी की अदा जो रूह को सुकून दे
उदयपुर को ‘वेनिस ऑफ द ईस्ट’ कहने की बजाय, इसे ‘रूह का सुकून’ कहिए। यहां का संगमरमर और सफेद बलुआ पत्थर चांदनी रातों में दूध में भीगे हुए किनारे जैसा लगता है। सिटी पैलेस, लेक पिछोला के आइने में देखता है तो जग मंदिर सूफी संगीत की तरह खामोश है।
इस सफेदी का फलसफा मेवाड़ के बादशाहों की खूबसूरत सोच थी कि रात में ये महल चांदनी बिखेरें और बादलों को छूने का एहसास दें। सफेद रंग यहां सिर्फ रंग नहीं, पाकीजगी और सल्तनत की निशानी है।

जैसलमेर : ज़मीन से निकला सोना
जैसलमेर को देखना उस वक्त जैसे हैरान करता है, जब सूरज की पहली किरण इसके किलों पर पड़े। थार के रेगिस्तान में यह शहर सोने के माफिक चमकता है। यहां की हवेलियों और किलों में लगा पीला बलुआ पत्थर जैसे मखमल की तरह मुलायम होता है।
सोने का यह रंग सिर्फ नुमाइश नहीं है, बल्कि यहां के पत्थरों में वो तासीर है कि ये तपिश को पी जाते हैं और शाम ढलते ही पूरा शहर एक बंजारे के ख्वाब की तरह सुनहरी चमक बिखेरता है।
ये शहर आपको सिखाते हैं कि रंग कोई तस्वीर नहीं, एक बोली है। जयपुर की गुलाबी मेहमाननवाज़ी है, जोधपुर का नीला आसमान से बात है, जैसलमेर का सोना जमीन की सल्तनत है, उदयपुर का सफेद रूह की सफाई है।
इन शहरों में जाकर सिर्फ एक ‘फोटो’ मत खिंचवाइए, बल्कि रंग को अपनी आंखों में और कहानी को दिल में उतारिए। यकीन जानिए, आप इन्हीं रंगों में कहीं खो जाएंगे।
ये भी पढ़ें: हीरे के पेपरवेट और 50 Rolls-Royce वाले बादशाह: जब TIME मैगज़ीन ने निज़ाम को कहा था ‘The World’s Richest Man’
आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।



